खाटूश्याम के अनोखे भक्त Keshav Saxena- 12 जंजीरों में बंधकर दी मांसाहार बंदी की अपील।
Rajasthan News: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर में 17 जुलाई 2025 को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। उत्तराखंड ....
Rajasthan News: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर में 17 जुलाई 2025 को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। उत्तराखंड के नैनीताल से आए 21 वर्षीय भक्त Keshav Saxena ने 12 लोहे की जंजीरों में बंधकर रींगस से खाटूश्याम तक 18 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूरी की। उनकी इस अनोखी भक्ति ने न केवल श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा, बल्कि पूरे देश में एक सामाजिक संदेश भी पहुंचाया। केशव का मकसद कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं थी, बल्कि वे भारत में मांसाहार पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग लेकर बाबा श्याम के दरबार पहुंचे। उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि देश में मांसाहार को पूरी तरह बंद किया जाए। यह उनकी दूसरी ऐसी कठिन यात्रा थी, जिसने उनकी भक्ति और सामाजिक संदेश को सुर्खियों में ला दिया।
- Keshav Saxena की कहानी
Keshav Saxena उत्तराखंड के रुद्रपुर के रहने वाले हैं। उनकी जिंदगी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। नौ साल की उम्र में उनके माता-पिता का निधन हो गया, जिसके बाद वे बेसहारा हो गए। उस मुश्किल समय में उन्होंने बाबा खाटूश्याम की शरण ली और तब से उनकी भक्ति में लीन हैं। केशव का कहना है कि बाबा श्याम ही उनका सहारा हैं, और उनकी कृपा से उनकी जिंदगी संवर गई। पिछले 12 सालों से वे लगातार खाटूश्याम मंदिर के दर्शन के लिए आ रहे हैं। उनकी भक्ति का अंदाज इतना अनोखा है कि लोग उन्हें देखकर हैरान रह जाते हैं।
इस बार केशव ने अपने शरीर को 10 किलो वजनी 12 लोहे की जंजीरों से बांधा, जिसमें उनके हाथ, पैर और कमर शामिल थे। बिना अन्न-जल ग्रहण किए उन्होंने 27 घंटे में रींगस से खाटूश्याम तक की 18 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। यह उनकी दूसरी ऐसी कठिन पदयात्रा थी। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी उन्होंने जंजीरों में बंधकर ऐसी ही यात्रा की थी। उनकी इस भक्ति को देखकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं, और हर कोई उनकी श्रद्धा से प्रभावित हुआ।
- मांसाहार बंदी का संदेश
केशव का इस यात्रा का उद्देश्य कोई व्यक्तिगत मुराद पूरी करना नहीं था। उनका मकसद था भारत में मांसाहार को पूरी तरह बंद करने की मांग को बाबा श्याम के सामने रखना। न्यूज18 और आज तक की रिपोर्ट्स के अनुसार, केशव ने बताया कि वे हल्द्वानी में भजन गायक कन्हैया मित्तल के एक कार्यक्रम में जा रहे थे, तभी रास्ते में खुलेआम मांस काटने और खाने का दृश्य देखकर उनका मन विचलित हो गया।
इस दृश्य ने उन्हें गहरी पीड़ा दी, और उन्होंने फैसला किया कि मांसाहार के खिलाफ आवाज उठानी है। उनका मानना है कि मांसाहार हिंसा को बढ़ावा देता है, और इसे रोकने के लिए वे बाबा श्याम की शरण में आए। खाटूश्याम मंदिर में उन्होंने अपनी अरदास रखी कि पूरे भारत में मांसाहार पर प्रतिबंध लगे। इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि इस दिशा में कदम उठाए जाएं। उनकी इस मांग ने सामाजिक और धार्मिक मंचों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
- खाटूश्याम मंदिर और बाबा श्याम की महिमा
खाटूश्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है और इसे बाबा श्याम के नाम से जाना जाता है। बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार और महाभारत के योद्धा बर्बरीक के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, बर्बरीक भीम और हिडिम्बा के पौत्र थे, जिन्होंने अपने शीश का दान देकर धर्म की रक्षा की थी। खाटूश्याम मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, और इसे ‘हारे का सहारा’ के रूप में जाना जाता है।
मंदिर में श्याम निशान चढ़ाने की परंपरा बर्बरीक के बलिदान और दान का प्रतीक है। भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर पैदल यात्रा करके निशान चढ़ाते हैं। केशव की यात्रा भी इस परंपरा का हिस्सा थी, लेकिन उनका संदेश सामाजिक बदलाव की दिशा में एक अनोखा कदम था।
केशव की इस कठिन यात्रा ने न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक मंचों पर भी चर्चा को जन्म दिया। उनकी भक्ति और मांसाहार बंदी की मांग ने कई लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए, जिसमें वे जंजीरों में बंधे हुए मंदिर की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। फर्स्ट इंडिया न्यूज और आज तक ने उनकी कहानी को प्रमुखता से दिखाया, जिससे उनकी बात देशभर में पहुंची।
केशव की इस यात्रा को देखकर कई श्रद्धालुओं ने उनकी भक्ति की सराहना की। कुछ लोगों ने उनके मांसाहार बंदी के संदेश का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत पसंद पर थोपा गया प्रतिबंध मानकर असहमति जताई। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी बहस शुरू हो गई, जहां कुछ यूजर्स ने मांसाहार को सांस्कृतिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा बताया, तो कुछ ने केशव के विचारों को पर्यावरण और अहिंसा से जोड़ा।
केशव का मांसाहार बंदी का संदेश भारत में पहले से चल रही अहिंसा और शाकाहार की बहस का हिस्सा बन गया है। भारत में कई धार्मिक समुदाय, जैसे जैन और कुछ हिंदू समुदाय, शाकाहार को बढ़ावा देते हैं। केशव का यह कदम उन लोगों के लिए प्रेरणा बना, जो अहिंसा को जीवन का हिस्सा मानते हैं। हालांकि, भारत में मांसाहार को लेकर सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता है, और इस पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग कई लोगों के लिए विवादास्पद हो सकती है।
केशव ने अपनी यात्रा के दौरान केंद्र सरकार से भी मांसाहार पर प्रतिबंध लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जो अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दें। उनकी इस मांग पर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का प्रतिबंध लागू करना जटिल होगा, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, आर्थिक गतिविधियों, और सांस्कृतिक प्रथाओं से जुड़ा है।
Keshav Saxena की खाटूश्याम मंदिर की यात्रा और उनका मांसाहार बंदी का संदेश एक अनोखी भक्ति और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है। 12 लोहे की जंजीरों में बंधकर 18 किलोमीटर की कठिन यात्रा करना उनकी श्रद्धा और संकल्प को दर्शाता है। उनकी कहानी यह दिखाती है कि भक्ति केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन सकती है। हालांकि, उनकी मांसाहार बंदी की मांग पर समाज में अलग-अलग विचार हैं, लेकिन उनकी भक्ति और साहस ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है। यह घटना खाटूश्याम मंदिर की महिमा और भक्तों की अनोखी श्रद्धा को एक बार फिर सामने लाती है।
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