लेटी सीमा चौकी ने नेपाल सीमा की सुरक्षा को मिली नई मजबूती, 38 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर एसएसबी की 58वीं बटालियन की नई चौकी। 

अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में नेपाल सीमा से सटे रामराज कस्बे के पास नवनिर्मित लेटी सीमा चौकी ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण

Feb 27, 2026 - 10:19
 0  3
लेटी सीमा चौकी ने नेपाल सीमा की सुरक्षा को मिली नई मजबूती, 38 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर एसएसबी की 58वीं बटालियन की नई चौकी। 
लेटी सीमा चौकी ने नेपाल सीमा की सुरक्षा को मिली नई मजबूती, 38 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर एसएसबी की 58वीं बटालियन की नई चौकी। 
  • वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 से सीमावर्ती गांवों में विकास और घुसपैठ पर लगाम

अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में नेपाल सीमा से सटे रामराज कस्बे के पास नवनिर्मित लेटी सीमा चौकी ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। यह चौकी सिकटी प्रखंड की नेपाल के मोरंग जिले से लगी करीब 38 किलोमीटर लंबी खुली सीमा की निगरानी के लिए बनाई गई है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 58वीं बटालियन को इस चौकी का प्रभार सौंपा गया है। नई चौकी में आधुनिक प्रशासनिक भवन, कर्मचारियों के लिए आवास, ऑपरेशनल रूम और निगरानी उपकरणों की व्यवस्था की गई है। चौकी का उद्घाटन हाल ही में हुआ और यह सीमा पर तैनात जवानों के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरी है। लेटी चौकी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र में तस्करी, घुसपैठ और अवैध गतिविधियों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

सिकटी प्रखंड की सीमा नेपाल के मोरंग जिले से लगती है और यहां की सीमा काफी हद तक खुली हुई है। घने जंगल, खेत और नदी-नालों के कारण पहले घुसपैठिए और तस्कर आसानी से आवागमन करते थे। लेटी चौकी के बनने से अब एसएसबी को निगरानी के लिए बेहतर सुविधाएं मिल गई हैं। चौकी में उच्च क्षमता वाले सर्विलांस कैमरे, नाइट विजन उपकरण और ड्रोन की मदद से सीमा की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। जवानों को आधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों से लैस किया गया है। चौकी के आसपास पेट्रोलिंग ट्रैक और वॉच टावर भी बनाए गए हैं। एसएसबी की 58वीं बटालियन ने पहले ही इस क्षेत्र में कई सफल ऑपरेशन किए हैं, जिसमें तस्करी की बड़ी खेप और घुसपैठिए पकड़े गए हैं। नई चौकी से इन ऑपरेशनों को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

लेटी चौकी का निर्माण केवल सुरक्षा के लिए ही नहीं किया गया है, बल्कि यह केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम टू’ का भी हिस्सा है। यह कार्यक्रम सीमा पर बसे गांवों के समग्र विकास के लिए चलाया जा रहा है। लेटी और आसपास के गांवों में सड़कें, बिजली, पेयजल, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती गांवों का विकास होने पर स्थानीय लोग वहां से पलायन नहीं करेंगे और घुसपैठियों को खाली जमीन पर डेरा डालने का मौका नहीं मिलेगा। गांव के लोग देश की पहली पंक्ति की सुरक्षा व्यवस्था बन जाते हैं। वे सीमा पर होने वाली हर गतिविधि की सूचना तुरंत देते हैं। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत लेटी में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें ग्रामीणों को प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में लेटी सीमा चौकी और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा कि सीमा पर बसे गांवों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है। अगर गांव मजबूत और समृद्ध होंगे तो घुसपैठ और तस्करी पर लगाम लगाना आसान होगा। लेटी में बने नए भवनों, सड़कों और अन्य सुविधाओं की सराहना की गई। कार्यक्रम के तहत स्थानीय युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन न करें। साथ ही सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से सुरक्षा बलों को भी बेहतर सहयोग मिलता है। लेटी चौकी और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम मिलकर इस क्षेत्र की सुरक्षा और विकास दोनों को सुनिश्चित कर रहे हैं।

नई चौकी से तस्करी और घुसपैठ पर लगाम लगाने में काफी मदद मिल रही है। पहले इस क्षेत्र से चोरी-छिपे आवागमन होता था लेकिन अब चौकी की निगरानी से कई तस्कर और घुसपैठिए पकड़े जा चुके हैं। एसएसबी के जवान दिन-रात पेट्रोलिंग कर रहे हैं और स्थानीय लोगों से भी सूचनाएं इकट्ठा कर रहे हैं। चौकी में स्थापित आधुनिक उपकरणों से सीमा की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों को भी सुरक्षा बलों से सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से गांव में विकास कार्य तेज हुए हैं, जिससे स्थानीय लोग खुश हैं और वे सीमा सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

यह चौकी सिकटी प्रखंड की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की सीमा काफी लंबी और खुली हुई है। पहले घुसपैठिए आसानी से पार कर जाते थे लेकिन अब चौकी की मौजूदगी से उनका मनोबल टूट रहा है। एसएसबी की 58वीं बटालियन ने कई सफल अभियान चलाए हैं और नई चौकी से उनकी क्षमता और बढ़ गई है। चौकी में जवानों के लिए बेहतर आवास और सुविधाएं हैं, जिससे उनका मनोबल भी ऊंचा है। ग्रामीणों ने भी चौकी की सराहना की है और कहा है कि अब उन्हें सुरक्षित महसूस हो रहा है। लेटी चौकी और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम ने सिकटी प्रखंड के सीमावर्ती गांवों के जीवन में बदलाव लाया है। सुरक्षा के साथ-साथ विकास कार्यों से गांवों में खुशहाली आई है। स्थानीय लोग अब सीमा सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह मॉडल अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

Also Read- Lucknow: आईटीबी बर्लिन-2026 में दिखेगी उत्तर प्रदेश पर्यटन की सशक्त मौजूदगी, समृद्ध विरासत का होगा भव्य प्रदर्शन।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।