Lucknow News: आरटीई में शिक्षा से वंचित हो रहे बच्चे- प्रदेश में सिर्फ 22% सीटों पर ही मिला प्रवेश, 26 जिलों में 30% से अधिक सीटें खाली

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि कम दाख़िला प्रतिशत वाले जिलों के बीएसए से जवाब मांगा गया है, और जिन स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ ...

Jun 22, 2025 - 20:58
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Lucknow News: आरटीई में शिक्षा से वंचित हो रहे बच्चे- प्रदेश में सिर्फ 22% सीटों पर ही मिला प्रवेश, 26 जिलों में 30% से अधिक सीटें खाली
प्रतीकात्मक चित्र

By INA News Lucknow.

लखनऊ : "शिक्षा का अधिकार अधिनियम" (RTE) के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने की मंशा सरकारी दस्तावेजों में तो मजबूत दिख रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। सत्र 2025-26 में प्रदेशभर के निजी स्कूलों को आरटीई के तहत लाखों सीटें आवंटित की गईं, लेकिन अब तक केवल 22% सीटों पर ही दाख़िला दिया गया है। यानी 6 लाख आवंटित सीटों में से केवल 1.30 लाख गरीब बच्चों को ही प्रवेश मिल पाया है।

  • स्कूलों की अनदेखी, विभाग की उदासीनता

RTE कानून के तहत निजी स्कूलों को 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं, लेकिन प्रदेश के 26 जिलों में 30% से ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं। विभाग ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए कम दाख़िला प्रतिशत वाले जिलों के बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) से जवाब-तलबी शुरू कर दी है। बावजूद इसके बड़े पैमाने पर स्कूलों की अनदेखी सामने आ रही है।

जिलेवार आरटीई में खराब प्रदर्शन:

मुरादाबाद – 67% सीटें खाली

कानपुर नगर – 52%

मेरठ – 47%

गाजियाबाद – 48%

कन्नौज – 41%

गोरखपुर – 38%

नोएडा – 37%

कानपुर देहात – 35%

वाराणसी – 35%

अयोध्या और बलिया – 34% सीटें खाली

इन जिलों में निजी स्कूलों द्वारा आरटीई सीटों पर बच्चों को दाख़िला देने में बेहद लापरवाही बरती गई है।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिले:

वहीं कुछ जिलों में आरटीई कानून को लेकर बेहतर कार्य हुआ है –

गोंडा – 94% दाख़िला

फिरोजाबाद – 93%

प्रतापगढ़ और ललितपुर – 92%

श्रावस्ती और हरदोई – 91% बच्चों को मिला प्रवेश

कुल आवेदन और असंतुलित स्थिति:

सत्र 2025-26 में 334953 गरीब परिवारों के बच्चों ने आरटीई के तहत आवेदन किया, लेकिन दाख़िले के आंकड़े दर्शाते हैं कि अधिकार के बावजूद हजारों बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए। स्कूलों की उदासीनता और शिक्षा विभाग की धीमी कार्यप्रणाली इस स्थिति की मुख्य वजह है।

आगे क्या?

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि कम दाख़िला प्रतिशत वाले जिलों के बीएसए से जवाब मांगा गया है, और जिन स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इसके बावजूद, इस बात की सख्त जरूरत है कि सरकार आरटीई को सिर्फ कानून की शक्ल में न रखे, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी और जवाबदेह बनाए।

आरटीई अधिनियम का मूल उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को समान शिक्षा का अधिकार दिलाना था, लेकिन मौजूदा हालात इस उद्देश्य पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई, तो लाखों बच्चों का भविष्य अधर में लटक सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और शिक्षा विभाग इस गंभीर खामी को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह भी एक औपचारिक कानून बनकर रह जाएगा।

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