Lucknow News: UP में DNA विवाद: ब्रजेश पाठक (Brijesh Pathak) का समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला, योगी (Yogi) ने भी साधा निशाना
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से पाठक के खिलाफ एक कथित आपत्तिजनक पोस्ट किया गया, जिसमें उनके DNA संबंधी बयान पर निशाना साधा गया। जवाब में, पाठक ....
By INA News Lucknow.
लखनऊ: UP की सियासत में DNA विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brijesh Pathak) ने समाजवादी पार्टी (सपा) और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया। पाठक ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक लंबे पोस्ट में सपा के DNA को जातिवाद, तुष्टिकरण और दलित-विरोधी मानसिकता से जोड़ा, जिसके जवाब में सपा और बीजेपी के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी (Yogi) आदित्यनाथ ने भी सपा के सोशल मीडिया हैंडल्स की भाषा को अशोभनीय और अभद्र करार देते हुए सख्त टिप्पणी की।
- विवाद की शुरुआत और पाठक का बयान
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से पाठक के खिलाफ एक कथित आपत्तिजनक पोस्ट किया गया, जिसमें उनके DNA संबंधी बयान पर निशाना साधा गया। जवाब में, पाठक ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, "अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) जी, आप DNA के सवाल पर बहुत भड़के हुए हैं। मैंने ये कह क्या दिया कि समाजवादी पार्टी के DNA में ख़राबी है, आप आपे से उसी तरह बाहर हो गए जैसे दस साल पहले यूपी की सत्ता से बाहर हो गए थे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि सपा की राजनीतिक सोच से है, जो उनके अनुसार जातिवाद, मुस्लिम तुष्टिकरण और दलित-विरोधी नीतियों पर आधारित है।
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पाठक ने सपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी राजनीति का मूल आधार ही वोटबैंक की राजनीति रहा है। उन्होंने दावा किया कि सपा ने शिक्षा, नियुक्तियों और कानून-व्यवस्था में एक विशेष वर्ग को प्राथमिकता दी, जिससे समाज में विभाजन और अविश्वास की खाई गहरी हुई। पाठक ने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के मुख्यमंत्री कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अपने हस्ताक्षर से आतंकियों से जुड़े 14 केस वापस लिए, ताकि "मुस्लिम तुष्टिकरण वाला DNA" मजबूत रहे।
- दलित-विरोधी मानसिकता का आरोप
पाठक ने सपा पर दलितों के प्रति भेदभाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "आपकी पार्टी का DNA तो दलितों के भी खिलाफ रहा है। सपा शासन में दलितों के अधिकारों को कुचला गया, उन्हें हाशिए पर रखा गया, और उनके खिलाफ अन्याय की घटनाएं बढ़ीं।" उन्होंने इसे मात्र प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सपा की गहरी राजनीतिक मानसिकता का परिणाम बताया।
- सपा की सोशल मीडिया रणनीति पर सवाल
पाठक ने सपा के सोशल मीडिया हैंडल की भाषा और रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा ने जेपी, लोहिया और राजनारायण जैसे समाजवादी नेताओं के आदर्शों को "गंदी और कलुषित गालियों" में बदल दिया है। उन्होंने अखिलेश के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपने सोशल मीडिया हैंडलरों को समझाएंगे। पाठक ने तंज कसते हुए कहा, "आपका ट्विटर हैंडलर इतना नादान है कि उसने आपके जरिए यह कुबूल करवा लिया कि आपकी पार्टी का DNA ही खराब है।"
- योगी (Yogi) आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी (Yogi) आदित्यनाथ ने इस विवाद में सपा की आलोचना करते हुए कहा, "यद्यपि समाजवादी पार्टी से किसी आदर्श आचरण की अपेक्षा करना व्यर्थ है, किंतु सभ्य समाज उनके अशोभनीय और अभद्र वक्तव्यों को सहन नहीं कर सकता।"
यद्यपि समाजवादी पार्टी से किसी आदर्श आचरण की अपेक्षा करना व्यर्थ है, किंतु सभ्य समाज उनके अशोभनीय एवं अभद्र वक्तव्यों को सहन नहीं कर सकता।
समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को चाहिए कि वे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स की भली भांति समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि वहां प्रयुक्त… — Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 19, 2025
उन्होंने सपा नेतृत्व से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स की समीक्षा करने और मर्यादित, संयमित व गरिमापूर्ण भाषा का उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की।
- सपा का जवाब और तनाव
सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की सलाह दी है। हालांकि, उन्होंने पाठक पर निशाना साधते हुए कहा कि वह भी ऐसी बयानबाजी से बचें, जो विवाद को बढ़ाए। अखिलेश ने पाठक के DNA बयान को भगवान कृष्ण और उनकी यादववंशी पहचान पर हमला बताकर इसे आस्था से जोड़ा। उन्होंने कहा, "यह सामान्य व्यक्ति भी समझ सकता है कि यह आस्था पर हमला है।"
- सियासी घमासान और जनता की नजर
इस विवाद ने UP की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजेपी ने सपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेठी में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का पुतला फूंका, जबकि सपा ने पाठक के बयानों को व्यक्तिगत हमला करार दिया। लखनऊ में बीजेपी नेता आनंद द्विवेदी की शिकायत पर सपा के एक्स हैंडल के खिलाफ हजरतगंज थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
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स्थानीय निवासियों और विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दलों के बीच सियासी तनाव को और बढ़ाएगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "यह DNA विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और सामाजिक विभाजन के आरोपों तक पहुंच गया है। नेताओं को ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए और विकास के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।"
ब्रजेश पाठक (Brijesh Pathak) और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के बीच यह ताजा विवाद UP की सियासत में जाति, धर्म और वोटबैंक की राजनीति जैसे संवेदनशील मुद्दों को फिर से उजागर करता है। पाठक ने जहां सपा की नीतियों और इतिहास को निशाने पर लिया, वहीं सपा ने इसे व्यक्तिगत और सांस्कृतिक हमला बताकर जवाब दिया। मुख्यमंत्री योगी (Yogi) की टिप्पणी ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि यह सियासी जंग किस दिशा में जाती है और क्या यह जनता के बीच विकास के मुद्दों को पीछे छोड़ देती है।
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