Sambhal : महाराष्ट्र में मुस्लिम 5% आरक्षण खत्म होने पर उलेमाओं की नाराज़गी, फैसले पर पुनर्विचार की मांग

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि यह फैसला मुसलमानों के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि देश में मुसलमान सामाजिक और

Feb 19, 2026 - 13:51
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Sambhal : महाराष्ट्र में मुस्लिम 5% आरक्षण खत्म होने पर उलेमाओं की नाराज़गी, फैसले पर पुनर्विचार की मांग
Sambhal : महाराष्ट्र में मुस्लिम 5% आरक्षण खत्म होने पर उलेमाओं की नाराज़गी, फैसले पर पुनर्विचार की मांग

Report : उवैस दानिश, सम्भल

महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुसलमानों को मिलने वाले 5 प्रतिशत आरक्षण को समाप्त किए जाने के फैसले पर धार्मिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस मुद्दे पर देश के प्रमुख उलेमाओं ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है।इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि यह फैसला मुसलमानों के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि देश में मुसलमान सामाजिक और शैक्षिक रूप से सबसे अधिक पिछड़ा वर्ग है। मौलाना ने कहा कि अगर आरक्षण जारी रहता तो मुसलमानों की तरक्की की रफ्तार तेज़ होती और दशकों में होने वाला सुधार कुछ वर्षों में संभव हो सकता था। उन्होंने इस मामले में सीधे नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात कर इस आरक्षण को बहाल कराएं। वहीं, मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने भी सरकार के इस फैसले को अफसोसजनक बताया।उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमान इसी देश के नागरिक हैं, यहीं पैदा हुए हैं और यहीं उनका भविष्य है। जब अन्य समाजों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो मुसलमानों से यह अधिकार छीनना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुसलमान सरकार से जुड़े हुए हैं, वोट देते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, ऐसे में उनके साथ ऐसा व्यवहार निराशाजनक है। उलेमाओं ने महाराष्ट्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और सामाजिक न्याय की भावना के तहत मुस्लिम आरक्षण को फिर से लागू करने की मांग की है।

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