हमीरपुर में यमुना नदी के बीचों-बीच बड़ा हादसा: नाविक की लापरवाही ने डुबोई नाव, कई लोग लापता।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बुधवार का दिन एक बड़ी त्रासदी का गवाह बना, जब यमुना नदी की लहरों के बीच एक नाव असंतुलित

By INA News Desk
May 7, 2026 - 16:26
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हमीरपुर में यमुना नदी के बीचों-बीच बड़ा हादसा: नाविक की लापरवाही ने डुबोई नाव, कई लोग लापता।
हमीरपुर में यमुना नदी के बीचों-बीच बड़ा हादसा: नाविक की लापरवाही ने डुबोई नाव, कई लोग लापता।
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  • बीच जलधारा में मोबाइल पर बात करना पड़ा भारी, नाविक खुद तैरकर निकला लेकिन मासूमों को छोड़ गया मौत के मुहाने पर
  • उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में कोहराम: रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, सगे भाइयों समेत आधा दर्जन लोगों की तलाश में जुटी गोताखोरों की टीम

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बुधवार का दिन एक बड़ी त्रासदी का गवाह बना, जब यमुना नदी की लहरों के बीच एक नाव असंतुलित होकर पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब नाव बीच मझधार में थी और नाविक अपनी जिम्मेदारी भूलकर मोबाइल फोन पर बात करने में मशगूल था। नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार नहीं थे, लेकिन संतुलन बिगड़ने की मुख्य वजह नाविक का खड़े होकर फोन का इस्तेमाल करना बताया जा रहा है। जैसे ही नाव पलटी, चीख-पुकार मच गई और नाव पर सवार पांच बच्चों समेत कुल नौ लोग उफनती नदी की धारा में समा गए। यह घटना क्षेत्र में मातम का सबब बन गई है और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।

हादसे के तुरंत बाद जो दृश्य सामने आया, वह दिल दहला देने वाला था। नाविक, जिसे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी थी, वह नाव पलटते ही तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आया। उसके पीछे-पीछे एक साहसी युवक और एक किशोरी ने भी हिम्मत दिखाई और संघर्ष करते हुए नदी के किनारे तक पहुंचने में सफलता हासिल की। हालांकि, शेष छह लोग जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे, पानी के तेज बहाव में बह गए। इस हृदय विदारक घटना की सूचना मिलते ही तट पर मौजूद ग्रामीण और स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन तब तक नदी की लहरें लापता लोगों को काफी दूर ले जा चुकी थीं। सुरक्षित बचे लोगों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और वे गहरे सदमे में हैं।

नदी की गहराई और बहाव की गति ने राहत कार्य में शुरुआती मुश्किलें पैदा कीं। स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सूचना दिए जाने के कुछ ही समय बाद राहत दल मौके पर पहुंच गया। लापता लोगों की पहचान स्थानीय निवासियों के रूप में हुई है, जिनमें दो सगे भाई भी शामिल हैं। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे नदी के किनारे अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से गोताखोरों की कई टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा दिया है। जाल डालकर और मोटर बोट्स के माध्यम से लापता बच्चों और वयस्कों की तलाश की जा रही है, लेकिन समय बीतने के साथ ही उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं। यमुना और बेतवा जैसी नदियों में नाव संचालन के लिए सख्त नियम होने के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में अक्सर नाविक बुनियादी सुरक्षा उपकरणों जैसे लाइफ जैकेट या लाइफ गॉर्ड्स के बिना ही नावों का संचालन करते हैं। मोबाइल फोन का उपयोग और खड़े होकर संतुलन बिगाड़ना मानवीय चूक की एक गंभीर मिसाल है। घटना के पीछे की तकनीकी और मानवीय वजहों पर गौर करें तो पता चलता है कि नदी के उस हिस्से में जलस्तर काफी अधिक था। जब नाविक मोबाइल पर बात करने के लिए खड़ा हुआ, तो उसका केंद्र भार बदल गया और छोटी नाव एक तरफ झुक गई। पानी नाव के भीतर भरने लगा और कुछ ही सेकंड में वह पूरी तरह पलट गई। पानी में गिरते ही बच्चे संभल नहीं पाए और धारा के साथ बहने लगे। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि अगर नाविक ने सावधानी बरती होती और अपना ध्यान केवल नाव के संतुलन पर रखा होता, तो इतने बड़े हादसे को टाला जा सकता था। वर्तमान में पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि क्या नाव के पास वैध लाइसेंस था और क्या वह नियमों का पालन कर रही थी।

क्षेत्रीय प्रशासन ने घटना स्थल पर डेरा डाल दिया है और आला अधिकारी रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। यमुना के विभिन्न घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और पड़ोसी जिलों को भी सूचित कर दिया गया है ताकि यदि कोई शव या व्यक्ति बहकर आगे निकलता है, तो उसे तुरंत रिकवर किया जा सके। स्थानीय ग्रामीणों ने भी अपनी छोटी नावों के साथ खोजबीन में प्रशासन का साथ दिया है। हालांकि, शाम ढलने और रोशनी कम होने के कारण गोताखोरों को पानी के नीचे देखने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सर्च लाइटों के माध्यम से रात में भी अभियान को जारी रखने की कोशिश की गई है ताकि लापता लोगों के बारे में कोई सुराग मिल सके। हादसे की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से हजारों की भीड़ नदी किनारे जमा हो गई। परिजनों के विलाप ने माहौल को और भी गमगीन कर दिया है। लापता लोगों में शामिल सगे भाइयों के माता-पिता की स्थिति को देखकर हर किसी की आंखें नम हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर नाव का संचालन लंबे समय से इसी तरह लापरवाही से किया जा रहा था, लेकिन कभी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस घटना ने एक बार फिर जल परिवहन में सुरक्षा ऑडिट की कमी को उजागर किया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।

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