Sambhal: सिरसी की मजलिस से गरजे मौलाना कल्वे जव्वाद अली, 56 मुस्लिम देशों को कटघरे में खड़ा किया।
ईरान में पहले इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्वे जव्वाद अली ने गुरुवार को सिर
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: ईरान में पहले इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्वे जव्वाद अली ने गुरुवार को सिरसी के इमामबाड़ा कला में आयोजित मजलिस के दौरान 56 मुस्लिम देशों की नीतियों पर तीखा और बेबाक हमला बोला। अवार्ड मिलने के बाद क्षेत्र में पहली बार पहुंचे मौलाना कल्वे जव्वाद अली के स्वागत में बड़ी संख्या में अकीदतमंद उमड़े।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना कल्वे जव्वाद अली ने दो टूक कहा कि मजलूम की मदद न करने वाला मुसलमान, इस्लाम की निगाह में मुसलमान नहीं है। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि किसी इंसान की मदद मजहब या अकीदे की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह इंसानियत का तकाज़ा है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब मजलूम मदद की गुहार लगाए और मुसलमान खामोश रहे, तो उसकी इस्लामी पहचान पर सवाल खड़े होते हैं। फिलिस्तीन के मुद्दे पर बोलते हुए मौलाना कल्वे जव्वाद अली ने कहा कि आज 56 मुस्लिम देश बे-गैरती की चादर ओढ़े खामोश तमाशबीन बने हुए हैं, जबकि फिलिस्तीनी अरब और मुसलमान होने के बावजूद उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर आज कोई मुल्क खुलकर फिलिस्तीन के मजलूमों के साथ खड़ा है तो वह सिर्फ ईरान है, जो इजरायल की मुखालफत की कीमत महंगाई, प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय बॉयकॉट के रूप में चुका रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान पर लगी तमाम पाबंदियां और आर्थिक संकट इसी वजह से हैं कि वह ज़ालिम के साथ खड़ा होने के बजाय मजलूम का साथ दे रहा है। अगर ईरान भी चुप हो जाए, तो उसकी परेशानियां खत्म हो सकती हैं, लेकिन उसने इंसानियत और इस्लामी उसूलों से समझौता नहीं किया। मौलाना कल्वे जव्वाद अली ने कहा कि आज हालात साफ बता रहे हैं कि हकीकी मायनों में मुसलमान कौन है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि मजलूम की हिमायत करना ही इस्लाम और शिया समुदाय की असली पहचान है। मजलिस के अंत में दुआ कराई गई, जबकि उनके बयान को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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