Mussoorie : मसूरी की वादियों में गूंजा इंजन का नॉस्टेल्जिक शोर, विंटेज कार रैली बनी पर्यटन का संदेशवाहक, मसूरी की मॉल रोड पर चली विंटेज कारों की शाही सवारी
हिमालय की गोद में बसे मसूरी की वादियाँ मंगलवार को क्लासिक इंजनों की गड़गड़ाहट से गूंज उठीं। क्लासिक हिमालयन ड्राइव 2025 विंटेज कार रैली जब मॉल रोड पर पहुं
रिपोर्टर : सुनील सोनकर
हिमालय की गोद में बसे मसूरी की वादियाँ मंगलवार को क्लासिक इंजनों की गड़गड़ाहट से गूंज उठीं। क्लासिक हिमालयन ड्राइव 2025 विंटेज कार रैली जब मॉल रोड पर पहुंची, तो यह नज़ारा मानो समय को पीछे ले गया। इस भव्य आयोजन में 30 क्लासिक कारें शामिल हुईं । जिनमें 20 विदेशी कारें और 10 भारतीय क्लासिक मॉडल आकर्षण का केंद्र बनीं।
3 नवंबर को ग्रेटर नोएडा से झंडी दिखाकर रवाना हुई यह रैली रामनगर और ऋषिकेश के रास्ते मसूरी पहुंची। वेलकम होटल बाय आईटीसी होटल्स द सोवे (द सवॉय) में प्रतिभागियों का पारंपरिक आतिथ्य के साथ स्वागत किया गया। रैली में 1958 मर्सिडीज 180।, 1970 फोर्ड मस्टैंग, मिनी कूपर, फिएट, लैंड रोवर, जगुआर जैसी दुर्लभ कारें शामिल हैं, जो आज भी अपने पुराने गौरव के साथ सड़क पर चलती हैं।
रैली के आयोजक टीम फायर फॉक्स के राजन स्याल ने बताया क्लासिक हिमालयन ड्राइव का मकसद सिर्फ मोटरिंग विरासत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत के हिमालयी राज्यों में पर्यटन को नई पहचान देना भी है।
उन्होने कहा कि यह रैली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और सड़कों की उत्कृष्टता को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाने का माध्यम है। स्याल ने बताया कि 1980 के दशक में भी यह रैली टीम फायर फॉक्स द्वारा आयोजित की जाती थी। कोविड के दौरान जब सब दोस्त ऑनलाइन जुड़े, तभी हमने इसे दोबारा शुरू करने की योजना बनाई।
राजन स्याल ने बताया कि इस रैली को सफल बनाने में उत्तराखंड सरकार खासकर र्प्यटन विभाग का विशेष सहयोग मिला। उन्होने कहा कि रैली का उद्देश्य केवल पुरानी कारों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उत्तराखंड की खूबसूरत सड़कों और पर्यटन संभावनाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना भी था।
प्रतिभागी पंकज मलिक और माधव गुप्ता का कहना है कि क्लासिक हिमालयन ड्राइव 2025 विंटेज कार रैली जैसे आयोजन न केवल मोटरिंग के जुनून को जिंदा रखते हैं बल्कि उत्तराखंड को साहसिक और विरासत पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम हैं। उन्होने कहा पुरानी कारों को मेंनटेन करने में दिक्कते तो आती है पर विंटेज कारों के षोकिन रखने वाले मालिक कारों को विपरीत परिस्थियों में मेंनटेन कर सडकों पर चलाते है जो लोगो के लिये आकर्षण का केन्द्र बनती है।
होटल सवाय के स्वामी केके काया ने बताया कि हमें इस ऐतिहासिक रैली की मेजबानी का अवसर मिला, यह गर्व की बात है। यह आयोजन न केवल मोटरिंग संस्कृति को जीवित रखता है, बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन और आतिथ्य को वैश्विक स्तर पर पहचान भी दिलाता है। उन्होने बताया कि उन्होने अपने होटल के ऐतिहासिक महत्व को आज तक जिंदा रखा है और इसी लिये भी होटल सवाय देष विदेष के पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बनता है।
वेलकम होटल बाय आईटीसी होटल्स द सोवे (द सवॉय) के मषूहर लेखक गणेष षैली ने कहा कि यह रैली न सिर्फ पुरानी कारों का जश्न है, बल्कि यह एक संदेश भी है कि विरासत और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। उत्तराखंड की सड़कों पर दौड़ती ये कारें न केवल इतिहास की याद दिलाती हैं, बल्कि भविष्य के पर्यटन की दिशा भी तय कर रही हैं।
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