Ajab Ghazab News: युद्ध के समय पाकिस्तान को कोई आर्थिक मदद नहीं देता, अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह का बेतुका बयान।
अमरुल्लाह सालेह ने उठाए सवाल, क्या युद्ध के समय पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता आतंकवाद को बढ़ावा देती है?...
- पहलगाम हमले के बाद IMF की पाकिस्तान को आर्थिक मदद: वैश्विक वित्तीय संस्थानों की नीतियों पर सवाल
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत ने भारत को कड़ा जवाब देने के लिए मजबूर किया, जिसके परिणामस्वरूप भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत हवाई हमले किए, जिसमें 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर आई। इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने की घोषणा की, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर तीखी आलोचना शुरू हो गई। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा, "ऐसा क्यों है कि जब भी पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में आता है, IMF, विश्व बैंक, और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थान ऋण और अनुदान पर प्रतिबंधों में ढील देते हैं?"
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने भारत को झकझोर दिया। इस हमले को भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जोड़ा और इसके जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। भारत की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण संघर्ष चला, जिसके बाद 10 मई को युद्धविराम पर सहमति बनी। इस दौरान IMF ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर के तत्काल ऋण के साथ-साथ 2.4 अरब डॉलर की कुल आर्थिक मदद को मंजूरी दी, जिसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहायता भी शामिल थी।
- अमरुल्लाह सालेह का आरोप
अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह, जो तालिबान विरोधी गठबंधन नॉर्दर्न अलायंस के सदस्य रह चुके हैं, ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए वैश्विक वित्तीय संस्थानों की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लंबे समय से आतंकवाद को संरक्षण दिया है, जिसमें तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, और यहां तक कि ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को शरण देना शामिल है। सालेह ने पूछा, "पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के बावजूद प्रतिबंध क्यों नहीं लगाए जाते? हर बार जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता है, ये संस्थान पाकिस्तान को आर्थिक मदद क्यों देते हैं?"
सालेह ने यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तान ने पश्चिमी सहायता का उपयोग अक्सर भारत के खिलाफ सैन्य और आतंकी गतिविधियों के लिए किया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान की सैन्य अकादमी के पास शरण मिली थी, फिर भी पश्चिमी देशों ने कभी इस पर कड़े प्रतिबंध नहीं लगाए।
- भारत का विरोध और वैश्विक प्रतिक्रिया
भारत ने IMF के इस फैसले का कड़ा विरोध किया। भारतीय वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि IMF की सहायता में नैतिक सुरक्षा उपायों का अभाव है, और इससे प्राप्त धन का उपयोग पाकिस्तान सैन्य और सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों के लिए कर सकता है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस पर नाराजगी जताई और कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय कैसे मान सकता है कि उपमहाद्वीप में तनाव कम होगा, जब IMF पाकिस्तान को हथियारों और तबाही के लिए धन दे रहा है?"
भारत ने न केवल IMF, बल्कि विश्व बैंक और ADB से भी पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद का विरोध किया है। भारत ने IMF की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान बार-बार राहत पैकेज लेने के कारण IMF का 'too-big-to-fail' कर्जदार बन गया है, और इस प्रक्रिया में राजनीतिक कारक भी भूमिका निभाते हैं। भारत ने यह भी मांग की कि ऐसी सहायता पर शर्तें लगाई जाएं, ताकि इसका उपयोग हथियारों की खरीद या आतंकवाद के लिए न हो।
- IMF और अन्य संस्थानों का रुख
IMF ने अपने बचाव में कहा कि पाकिस्तान ने बेलआउट पैकेज के लिए सभी आवश्यक मानकों को पूरा किया है। एक प्रेस ब्रीफिंग में IMF ने स्पष्ट किया कि यह धन केवल भुगतान संतुलन के मुद्दों को हल करने के लिए है और सीधे पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के भंडार में जाता है, न कि सरकारी बजट में। हालांकि, IMF ने यह भी स्वीकार किया कि केंद्रीय बैंक से सरकार को उधार देने की कोई सीमा नहीं है, जिससे इस धन के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
विश्व बैंक भी जून 2025 में पाकिस्तान को 20 अरब डॉलर का राहत पैकेज देने की तैयारी में है, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत सरकार ने घोषणा की है कि वह इस मुद्दे को विश्व बैंक और FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के समक्ष उठाएगी, ताकि पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में डाला जाए।
- पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। देश पर 131 अरब डॉलर का कर्ज है, जो उसकी जीडीपी का 42% है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 2025-26 के लिए GDP वृद्धि दर को 2.68% तक सीमित कर दिया है, जो पहले अनुमानित 3.6% से कम है। इसके बावजूद, पाकिस्तान का रक्षा बजट 2,414 अरब रुपये से बढ़कर 2,500 अरब रुपये हो गया है, जो IMF के राजकोषीय संतुलन लक्ष्यों के विपरीत है।
वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक मदद का दुरुपयोग सैन्य और आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी कहा था कि पाकिस्तान ने पश्चिमी सहायता का उपयोग भारत के खिलाफ किया है। IMF ने पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें थोपी हैं, जिसके बाद कुल शर्तों की संख्या 50 हो गई है। इनमें बिजली बिलों पर सरचार्ज बढ़ाना, पुरानी कारों के आयात पर प्रतिबंध हटाना, और 2026 के बजट को संसद से पारित कराना शामिल है। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को IMF और अन्य संस्थानों से मिलने वाली आर्थिक मदद ने वैश्विक मंच पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। अमरुल्लाह सालेह का सवाल कि क्या ये संस्थान अनजाने में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, विचारणीय है।
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