Sambhal: 27 रजब पर कदम रसूल की मजार पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, मूऐ मुबारक की जियारत में शामिल हुए हजारों लोग।
इस्लामी माह रजब की 27 तारीख को कोतवाली सम्भल थाना क्षेत्र के मोहल्ला कोट गर्वी स्थित कदम रसूल की मजार पर अकीदत और आस्था का अद्भुत नज़ारा
उवैस दानिश, सम्भल
इस्लामी माह रजब की 27 तारीख को कोतवाली सम्भल थाना क्षेत्र के मोहल्ला कोट गर्वी स्थित कदम रसूल की मजार पर अकीदत और आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। मजार प्रबंधक बिट्टू वारसी की देखरेख में हजारों अकीदतमंदों ने मूऐ मुबारक और कदम रसूल की जियारत की। इस मौके पर दूर-दराज़ से आए जायरीनों ने रसूल-ए-पाक हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) से जुड़ी निशानियों के दीदार कर दुआएं मांगीं।
बिट्टू वारसी ने बताया कि 27 रजब के दिन सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार मूऐ मुबारक (दाढ़ी का बाल) और कदम रसूल (पैर का चिन्ह) की जियारत कराई जाती है। यह कार्यक्रम फजर की नमाज के बाद शुरू होता है और दोपहर तक चलता है। ठंड के कारण जायरीनों की आमद थोड़ी देर से शुरू हुई, लेकिन दोपहर तक मजार परिसर पूरी तरह भरा रहा। उन्होंने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों से चली आ रही है और वे स्वयं पिछले करीब 25 वर्षों से इस आयोजन से जुड़े हुए हैं। मान्यता है कि ये पाक निशानियां उनके पूर्वज जिंदा शाह वली रहमतुल्लाह अलैह बादशाह औरंगजेब के दौर में लेकर आए थे, जिन्हें सम्भल में सुरक्षित रखा गया है। कार्यक्रम के दौरान मोहल्ला कोट गर्वी में मिलाद, कुरान ख्वानी, नात और तकरीर का आयोजन भी किया गया, जिसमें उलमा-ए-किराम ने 27 रजब की अहमियत पर रोशनी डाली। बताया गया कि इसी दिन अल्लाह और रसूल-ए-पाक की मुलाकात (मेअराज) हुई थी, इसलिए यह दिन इस्लाम में विशेष महत्व रखता है। पूरे आयोजन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी मुस्तैद रहा। अकीदतमंदों ने देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआ के साथ जियारत संपन्न की।
What's Your Reaction?











