कटिहार के मनिहारी गंगा घाट पर मची भारी चीख-पुकार, स्नान के दौरान अचानक लापता हुई 6 साल की मासूम बच्ची

इस अप्रत्याशित और दुखद घटना ने मनिहारी गंगा घाट पर जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं और भीड़ प्रबंधन के दावों पर भी कई गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और घाट पर नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि इतने म

Jun 19, 2026 - 15:57
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कटिहार के मनिहारी गंगा घाट पर मची भारी चीख-पुकार, स्नान के दौरान अचानक लापता हुई 6 साल की मासूम बच्ची
कटिहार के मनिहारी गंगा घाट पर मची भारी चीख-पुकार, स्नान के दौरान अचानक लापता हुई 6 साल की मासूम बच्ची

  • परिजनों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल, स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीमें गहरे पानी में लगातार चला रही हैं खोजी अभियान
  • धार्मिक अनुष्ठान के पावन अवसर पर पसरा गहरा मातम, पुलिस प्रशासन घाट पर मुस्तैद रहकर हर संभावित कोण से कर रहा है मामले की तफ्तीश

बिहार के कटिहार जिले के अंतर्गत आने वाले सुप्रसिद्ध मनिहारी गंगा घाट से एक बेहद ही हृदयविदारक और चिंताजनक घटना सामने आ रही है। यहां अपने परिवार के साथ गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान के सिलसिले में आई एक महज छह साल की मासूम बच्ची अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई है। इस दुखद घटना के बाद से ही पवित्र गंगा घाट के पूरे परिक्षेत्र में अचानक अफरा-तफरी और भारी चीख-पुकार का माहौल पैदा हो गया है। खिलखिलाती और अपनों के बीच खेलती हुई बच्ची के अचानक आंखों से ओझल हो जाने की वजह से पीड़ित माता-पिता और उनके साथ आए अन्य सगे-संबंधियों का रो-रोकर बहुत ही बुरा हाल हो चुका है। धार्मिक उल्लास और आस्था के माहौल से सराबोर रहने वाला यह पूरा घाट क्षेत्र अब एक गहरे सन्नाटे और अज्ञात आशंकाओं के भारी मातम में तब्दील हो चुका है, जिससे वहां मौजूद हर एक श्रद्धालु की आंखें नम हैं।

पारिवारिक सूत्रों से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, पीड़ित परिवार कटिहार जिले के ही एक नजदीकी ग्रामीण इलाके का रहने वाला है और वे सभी लोग घर में आयोजित एक विशेष मांगलिक कार्य की सफलता के बाद मनिहारी गंगा घाट पर मुंडन संस्कार और पवित्र स्नान के पवित्र उद्देश्य से पहुंचे थे। सुबह के समय जब घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी और चारों तरफ पूजा-अर्चना के श्लोक गूंज रहे थे, ठीक उसी दौरान यह दुखद हादसा घटित हुआ। बच्ची की मां और अन्य महिलाएं जब गंगा नदी के किनारे जल में खड़े होकर पूजा-पाठ की रस्मों को पूरा करने में पूरी तरह से मग्न थीं, तभी वह मासूम बच्ची किनारे के रेतीले हिस्से पर अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते अचानक कहीं दूर निकल गई या पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। कुछ ही मिनटों के बाद जब मां का ध्यान अपनी लाडली की तरफ गया, तो उसे वहां न पाकर उसके पैरों तले से मानो जमीन ही खिसक गई और उसने बदहवास होकर चिल्लाना शुरू कर दिया।

घटना की भयावहता को देखते हुए घाट पर मौजूद अन्य स्थानीय दुकानदारों, नाविकों और पुरोहितों ने बिना एक पल की भी देरी किए तुरंत अपने स्तर पर खोजबीन की कवायद शुरू कर दी थी। जैसे ही बच्ची के लापता होने की खबर मनिहारी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक चौकियों तक पहुंची, पुलिस बल दलबल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए फौरन आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क साधा, जिसके बाद स्थानीय कुशल गोताखोरों और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एसडीआरएफ की विशेषज्ञ टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए पानी में उतारा गया। सुरक्षा बल और गोताखोर मोटर बोट और आधुनिक लाइफ जैकेटों से लैस होकर गंगा नदी की तेज और उफनती धाराओं के बीच चप्पा-चप्पा छान रहे हैं, लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ा होने और पानी के भीतर तेज भू-कटाव के कारण खोज अभियान में कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

समय बीतने के साथ-साथ पीड़ित माता-पिता की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और घाट के किनारे बैठी मां का विलाप देखकर वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा मुंह को आ रहा है। लापता बच्ची अपने भाई-बहनों में सबसे छोटी और पूरे परिवार की सबसे लाडली थी, जिसकी एक मुस्कान पर पूरे घर का माहौल खुशनुमा हो जाता था। पीड़ित पिता कभी पुलिस अधिकारियों के पैरों में गिरकर अपनी बेटी को ढूंढ निकालने की गुहार लगा रहे हैं, तो कभी गंगा मैया के आगे हाथ जोड़कर अपनी संतान की सलामती की मन्नतें मांग रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्य और सगे-संबंधी भी बदहवास हालत में घाट की सीढ़ियों और आसपास के जंगलों व झाड़ियों में अपनी बच्ची की तलाश में भटक रहे हैं। घर के बड़े-बुजुर्गों की हालत भी बेहद नाजुक बनी हुई है और वे लगातार ईश्वर से इस घोर संकट की घड़ी में किसी चमत्कार की प्रार्थना कर रहे हैं।

पुलिस प्रशासन इस पूरे संवेदनशील मामले को केवल पानी में डूबने की आशंका तक ही सीमित रखकर नहीं देख रहा है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से अन्य सभी संभावित कोणों और पहलुओं पर भी बहुत ही बारीकी से काम किया जा रहा है। मनिहारी गंगा घाट एक बहुत ही बड़ा और अंतर-प्रांतीय व्यापारिक केंद्र भी है, जहां से झारखंड और पश्चिम बंगाल के लिए नावों और जहाजों का नियमित परिचालन होता रहता है। इस भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पुलिस विभाग को इस बात की भी गहरी आशंका है कि भीड़भाड़ का फायदा उठाकर कहीं किसी असामाजिक तत्व या मानव तस्करी से जुड़े गिरोह ने बच्ची का अपहरण न कर लिया हो। इसी वजह से मनिहारी थाना प्रभारी के निर्देश पर एक विशेष खुफिया टीम का गठन किया गया है, जो घाट परिसर और उसके आसपास के रास्तों पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगालने में जुटी है ताकि किसी भी तरह का कोई संदिग्ध सुराग हाथ लग सके।

इस अप्रत्याशित और दुखद घटना ने मनिहारी गंगा घाट पर जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं और भीड़ प्रबंधन के दावों पर भी कई गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और घाट पर नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण और बड़े धार्मिक घाट पर सुरक्षा घेरा यानी बैरिकेडिंग की व्यवस्था बेहद लचर है और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी नाकाफी रहती है। विशेष अवसरों पर जब हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं, तब नदी के गहरे पानी वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने के लिए लगाए जाने वाले चेतावनी बोर्ड या लाल झंडे भी गायब मिलते हैं। इसके अलावा, लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार दी जाने वाली सुरक्षा चेतावनियों और खोया-पाय केंद्र की अनुपस्थिति के कारण भी ऐसी विषम परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जहां मासूम बच्चे अपने अभिभावकों से पल भर में बिछड़ जाते हैं।

मनिहारी के स्थानीय अनुमंडल अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस कप्तान खुद इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए हर संभव मदद का पूरा भरोसा दिया है। पुलिस ने मनिहारी घाट से खुलने वाली सभी छोटी-बड़ी नावों, फेरी सेवाओं और झारखंड के साहिबगंज जाने वाले जहाजों के कप्तानों को भी लापता बच्ची की तस्वीर और हुलिया भेजकर पूरी तरह से सतर्क कर दिया है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और जिला पुलिस के आधिकारिक संचार माध्यमों पर भी बच्ची की जानकारी साझा की गई है ताकि यदि किसी भी नागरिक को वह बच्ची कहीं लावारिस हालत में मिले, तो उसकी सूचना तुरंत दी जा सके। पूरे कटिहार जिले में इस घटना के बाद से लोग उस मासूम की सकुशल वापसी के लिए दुआएं मांग रहे हैं, जबकि प्रशासनिक टीमें पानी और जमीन दोनों मोर्चों पर अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं।

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