Trending News: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘ऑपरेशन बंगाल’ की तैयारी?, ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर तीखा हमला।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। कोलकाता में एक....
29 मई 2025 को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। कोलकाता में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए, ममता ने पीएम मोदी के हालिया बयानों की निंदा की और उन पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप लगाया। उन्होंने खास तौर पर ऑपरेशन सिंदूर और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में पीएम के बयानों पर आपत्ति जताई। ममता ने कहा, “मोदी जी समझते हैं कि वे ऑपरेशन सिंदूर की तरह ऑपरेशन बंगाल शुरू करेंगे। मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि अगर हिम्मत है, तो कल ही चुनाव में उतरें। बंगाल उनकी चुनौती स्वीकार करने को तैयार है।” यह बयान भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ममता की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।
- ममता बनर्जी का बयान
ममता बनर्जी ने यह बयान कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में आयोजित एक रैली में दिया। यह रैली तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें हजारों समर्थकों ने हिस्सा लिया। ममता ने अपने भाषण में केंद्र सरकार की नीतियों, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के बयान से हम स्तब्ध हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह राष्ट्रीय हितों की बात करते हुए बंगाल को निशाना बना रहे हैं। पूरा विपक्ष देश के हितों की रक्षा के लिए एकजुट है, लेकिन पीएम और उनके नेता बंगाल के खिलाफ अनुचित बयानबाजी कर रहे हैं।”
ममता का यह बयान हाल ही में पीएम मोदी के एक भाषण के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया था। ऑपरेशन सिंदूर, जो अप्रैल 2025 में शुरू हुआ, भारत की सेना द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले का हिस्सा था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी। पीएम मोदी ने बीकानेर में 22 मई 2025 को एक रैली में कहा था, “पाकिस्तान ये भूल गया कि मां भारती का सेवक मोदी यहां सीना तानकर खड़ा है। यह शोध प्रतिशोध का खेल नहीं, यह न्याय का नया स्वरूप है।”
ममता ने पीएम के इस बयान को बंगाल के खिलाफ एक परोक्ष हमले के रूप में देखा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों का इस्तेमाल बंगाल में अपनी छवि मजबूत करने के लिए कर रही है। ममता ने यह भी कहा कि केंद्र की नीतियां बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ हैं, और वह किसी भी तरह की “राजनीतिक साजिश” को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
- ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला
ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का एक हिस्सा था। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश हिंदू पर्यटक थे। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया, और भारत ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर के तहत, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बहावलपुर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिसमें 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया। इसके साथ ही, भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया और अटारी बॉर्डर पर व्यापार बंद कर दिया।
ममता बनर्जी ने इस ऑपरेशन का समर्थन तो किया, लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार पर इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग देश की सुरक्षा के लिए हमेशा एकजुट रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान नहीं कर रही। ममता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार बंगाल में अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रही है।
- ममता की चुनौती और राजनीतिक निहितार्थ
ममता बनर्जी का ‘ऑपरेशन बंगाल’ का जिक्र और पीएम मोदी को चुनाव में उतरने की चुनौती पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाती है। 2021 के विधानसभा चुनावों में, ममता ने बीजेपी को कड़ी टक्कर देते हुए तृणमूल को तीसरी बार सत्ता में लाया था। हालांकि, बीजेपी ने बंगाल में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है और कई विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की है।
ममता का यह बयान बीजेपी को एक प्रत्यक्ष चुनौती है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर बंगाल के खिलाफ “राजनीतिक युद्ध” छेड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल के लोग किसी भी बाहरी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे और अपनी पहचान और स्वाभिमान की रक्षा करेंगे। ममता ने अपने भाषण में बंगाल की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा, “बंगाल वह धरती है जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे लोग पैदा हुए। हम किसी के सामने नहीं झुकेंगे।”
- पश्चिम बंगाल और केंद्र के बीच तनाव
ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, ममता ने केंद्र की नीतियों, जैसे कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), और केंद्र द्वारा वित्तीय आवंटन में कथित भेदभाव, पर लगातार सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र पर बंगाल को वित्तीय सहायता में कमी करने और विकास परियोजनाओं में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में ममता का बयान इस तनाव को और बढ़ाने वाला है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार बंगाल में अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सैन्य अभियानों का सहारा ले रही है। ममता ने यह भी कहा कि बंगाल के लोग राष्ट्रीय हितों के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन वे केंद्र की “बंगाल विरोधी” नीतियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
- ममता बनर्जी की रणनीति
ममता बनर्जी का यह बयान उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 2026 में पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव होने हैं, और ममता अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रही हैं। बीजेपी ने हाल के वर्षों में बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, और ममता इसे एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखती हैं। उनका यह बयान बंगाल के लोगों में क्षेत्रीय गौरव और एकजुटता की भावना को जगाने का प्रयास है।
ममता ने अपने भाषण में यह भी कहा कि बंगाल के लोग केंद्र सरकार की किसी भी “साजिश” का जवाब वोट के जरिए देंगे। उन्होंने बीजेपी पर बंगाल में सामाजिक और सांस्कृतिक विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी सरकार बंगाल की एकता और समावेशी संस्कृति को बनाए रखेगी।
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