धांधली का बड़ा आरोप: आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के चयन में बड़ी हेरफेर, बाल विकास योजना के अंतर्गत चहेतों को सेलेक्ट किया गया

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नीलम पूर्व प्रधान की बहू है तथा उसके जेठ भी प्रधान पद पर रह चुके हैं। उसके पति दवाखाना चलाते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति सही है। फिर भी उसने कम आय का सर्टिफिकेट बनवाकर आवेदन पत्र के साथ ल...

Apr 1, 2025 - 23:50
Apr 2, 2025 - 13:11
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धांधली का बड़ा आरोप: आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के चयन में बड़ी हेरफेर, बाल विकास योजना के अंतर्गत चहेतों को सेलेक्ट किया गया

By INA News Hardoi.

बाल विकास योजना के अंतर्गत रिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए रिक्त पदों पर कार्यकत्रियों की चयन प्रक्रिया में बड़ी धांधली सामने आई है। बिलग्राम विकास खंड से जुड़ा यह मामला बाल विकास योजना के तहत आंगनबाड़ी के लिए चयनित किये जाने वाली कार्यकत्रियों के साथ होने वाले अन्याय को बयां करता है।दरअसल, बिलग्राम विकास खंड की ग्राम पंचायत हसौलिया में एक युवती का चयन अनारक्षित कोटे में किया गया है जबकि मेरिट लिस्ट में उसका नाम तीसरे नंबर पर है। इससे उलट एक युवती का चयन नहीं किया गया है, जबकि वह ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत लिस्ट में पहले स्थान पर है। इससे रिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।इस मामले को लेकर मुस्कान सिंह पुत्री धर्मेंद्र सिंह निवासिनी गांव हसौलिया पोस्ट सांडी बिलग्राम हरदोई ने जिलाधिकारी को एक लिखित शिकायती पत्र के माध्यम से बताया कि वह बीपीएल और ईडब्ल्यूएस वर्ग में आती है और उसका नाम मेरिट लिस्ट में पहले नंबर पर है लेकिन रिक्त आंगनबाड़ी केंद्र के लिए चयन तीसरे नंबर वाली अभ्यर्थी नीलम गौतम पत्नी संजय कुमार का किया गया।उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नीलम पूर्व प्रधान की बहू है तथा उसके जेठ भी प्रधान पद पर रह चुके हैं। उसके पति दवाखाना चलाते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति सही है। फिर भी उसने कम आय का सर्टिफिकेट बनवाकर आवेदन पत्र के साथ लगाया है, जो कि सरासर गलत है। मुस्कान ने जिलाधिकारी से लिखित पत्र के माध्यम से गुहार लगाई कि रिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों में सही जांच कर चयन प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए आदेश दें।

जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ)  मनोज कुमार ने बताया कि बाल विकास योजना के अंतर्गत रिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए रिक्त पदों पर कार्यकत्रियों की जो चयन प्रक्रिया हुई है वह जिलाधिकारी और मुख्य विकासधिकारी की देख रेख में हुई है जो पूरी तरह से पारदर्शी और ऑनलाइन सत्यापन के बाद हुई है। अगर इसके बाद भी कोई ऐसी जानकारी मिलती है तो इसकी जांच कर कार्यवाही की जाएगी। 

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