Sambhal : शबे बारात पर इबादत और मग़फ़िरत का पैग़ाम, मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने बताया दिनभर का अमल

मुफ्ती साहब ने बताया कि शबे बारात के दिन सुबह से ही पाकीज़गी और इबादत का एहतिमाम करना चाहिए। अच्छे तरीके से ग़ुस्ल करें, खुशबू लगाएं और साफ़-सुथरा उम्दा लिबास पहनें।

By INA News Desk
Jan 29, 2026 - 17:29
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Sambhal : शबे बारात पर इबादत और मग़फ़िरत का पैग़ाम, मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने बताया दिनभर का अमल
मुफ्ती आलम रज़ा नूरी, धर्मगुरु

Report : उवैस दानिश, सम्भल

शबे बारात को लेकर इस्लामिक धर्मगुरु मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने मुसलमानों को अहम नसीहतें दीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में तीन रातें बेहद अहम मानी जाती हैं। पहली शबे मेराज, जिसमें अल्लाह ने रसूल-ए-पाक को नमाज़ का तोहफ़ा दिया। दूसरी शबे बारात, जो बख़्शिश, गुनाहों से निजात और जन्नत की ज़मानत की रात है। तीसरी शबे क़द्र, जो रमज़ानुल मुबारक में आती है।

मुफ्ती साहब ने बताया कि शबे बारात के दिन सुबह से ही पाकीज़गी और इबादत का एहतिमाम करना चाहिए। अच्छे तरीके से ग़ुस्ल करें, खुशबू लगाएं और साफ़-सुथरा उम्दा लिबास पहनें। असर और मग़रिब के दरमियान सात या ग्यारह बेर के पत्तों से नहाने की भी उन्होंने फ़ज़ीलत बयान की और कहा कि हदीस शरीफ़ में आता है कि ऐसा करने से इंसान पूरे साल जादू जैसी बीमारियों से महफ़ूज़ रहता है। उन्होंने कहा कि इस मुक़द्दस रात में अपने मरहूम रिश्तेदारों और बुज़ुर्गों की क़ब्रों पर जाकर उनके लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करना चाहिए।

क़ब्रिस्तान में जाकर बख़्शिश की दुआ करना और अल्लाह से उनके दर्जात बुलंद होने की इल्तिजा करना बहुत सवाब का काम है। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने ज़ोर देकर कहा कि शबे बारात की रात नफ़्ल नमाज़, क़ुरान की तिलावत, ज़िक्र-ओ-अज़कार और सदक़ा-ओ-ख़ैरात का खास एहतिमाम किया जाए। ग़रीबों, मिस्कीनों और ज़रूरतमंदों का ख़याल रखें, पड़ोसियों के हक़ अदा करें और जिन लोगों का दिल दुखाया हो या किसी का हक़ मारा हो, उनसे दिल से माफ़ी मांगें। उन्होंने कहा कि यह रात दुआओं की क़ुबूलियत की रात है। बे-औलाद औलाद मांगे, बेरोज़गार रोज़गार मांगे और हर मोमिन अपनी जायज़ हाजतों के लिए अल्लाह की बारगाह में गिड़गिड़ाकर दुआ करे। मुफ्ती साहब के मुताबिक़ पूरी रात फ़ज्र तक अल्लाह की रहमत पुकारती रहती है कि “ए मेरे बंदो, मांगो, जो मांगोगे अता किया जाएगा।” शबे बारात को इबादत, तौबा और इंसानियत के पैग़ाम के साथ मनाने की उन्होंने सभी मुसलमानों से अपील की।

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