Viral: शामली के डीएम अरविंद कुमार चौहान ने घुटनों के बल बैठकर सुनी बुजुर्ग महिला की फरियाद, वीडियो वायरल।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जिलाधिकारी (डीएम) अरविंद कुमार चौहान ने अपनी संवेदनशीलता और मानवता का एक अनूठा उदाहरण पेश ...
शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जिलाधिकारी (डीएम) अरविंद कुमार चौहान ने अपनी संवेदनशीलता और मानवता का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की शिकायत सुनने के लिए डीएम साहब अपने वातानुकूलित कार्यालय से बाहर निकले और जमीन पर घुटनों के बल बैठकर उनकी बात सुनी। इस मार्मिक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, और लोगों ने डीएम की इस मानवीय पहल की जमकर तारीफ की। बुजुर्ग महिला ने आंसुओं भरी आंखों से डीएम को आशीर्वाद देते हुए कहा, “बेटा, तुम हमेशा खुश रहो।” यह घटना न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक मिसाल है, बल्कि समाज में मानवीय संवेदनशीलता की अहमियत को भी रेखांकित करती है।
- डीएम की संवेदनशीलता
23 जून 2025 को शामली के डीएम कार्यालय में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला अपनी शिकायत लेकर पहुंची थी। यह महिला, जिसकी पहचान गोपनीय रखी गई है, जमीन पर बैठी थी और अपनी समस्या को लेकर परेशान थी। बताया जाता है कि उनकी शिकायत जमीन विवाद से संबंधित थी, और वह कई बार कार्यालय के चक्कर लगा चुकी थी। उनकी उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए, वह कार्यालय के अंदर तक नहीं पहुंच पाईं और बाहर ही बैठ गईं।
जब डीएम अरविंद कुमार चौहान को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत अपने कार्यालय से बाहर निकलकर महिला के पास जाने का फैसला किया। वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि डीएम साहब जमीन पर घुटनों के बल बैठकर बुजुर्ग महिला की बात ध्यान से सुन रहे हैं। उन्होंने न केवल उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया, बल्कि तत्काल कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। इस दौरान महिला की आंखों में आंसू छलक आए, और उन्होंने डीएम को आशीर्वाद देते हुए कहा, “बेटा, तुम्हारा भला हो।”
डीएम ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को बुलाकर मामले का निपटारा करने के निर्देश दिए। महिला की शिकायत का समाधान उसी दिन कर दिया गया, जिसके बाद वह संतुष्ट होकर घर लौटीं। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा बटोरी।
यह मार्मिक दृश्य किसी राहगीर ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो को न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे @news24tvchannel, @priyarajputlive, और @IBC24News ने साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। एक यूजर ने लिखा, “काश सभी अधिकारी इतने संवेदनशील हों। डीएम साहब ने साबित कर दिया कि मानवता अभी जिंदा है।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यह वीडियो हर उस अधिकारी को देखना चाहिए जो अपने कार्यालय में बैठकर जनता की अनदेखी करता है।”
सोशल मीडिया पर लोगों ने डीएम की इस पहल को ‘जनता जनार्दन’ की भावना का प्रतीक बताया। एक पोस्ट में लिखा गया, “ये मेरी यूपी की जनसेवा है। डीएम अरविंद कुमार चौहान ने दिखाया कि सच्ची सेवा कैसे की जाती है।” इस वीडियो ने न केवल डीएम की छवि को एक संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में मजबूत किया, बल्कि लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास को भी बढ़ाया।
- अरविंद कुमार चौहान: एक प्रेरणादायक अधिकारी
अरविंद कुमार चौहान, 2015 बैच के आईएएस अधिकारी, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मूल निवासी हैं। उन्होंने बी.एससी. की डिग्री हासिल करने के बाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और उत्तर प्रदेश कैडर में शामिल हुए। उनकी पहली नियुक्ति आजमगढ़ में सहायक मजिस्ट्रेट/सहायक कलेक्टर के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने मिर्जापुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट, बहराइच में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), और लखनऊ में सामाजिक कल्याण विभाग में विशेष सचिव के रूप में कार्य किया। सितंबर 2024 में उन्हें शामली का डीएम नियुक्त किया गया।
चौहान अपने अनूठे कार्यशैली के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। नवंबर 2024 में, उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड के लिए निजी संस्थानों में रेफरल की शिकायतों की जांच के लिए स्वयं एक आम नागरिक के रूप में निरीक्षण किया था। इस बार, उनकी मानवता ने लोगों का दिल जीत लिया।
- प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल
यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक मिसाल है। अक्सर शिकायत की जाती है कि अधिकारी आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन डीएम अरविंद चौहान ने दिखाया कि एक छोटा सा कदम भी जनता के बीच विश्वास और सम्मान पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना की सराहना की और अधिकारियों से ऐसी संवेदनशीलता अपनाने का आह्वान किया।
शामली के स्थानीय निवासी रामपाल सिंह ने कहा, “हमने कई डीएम देखे, लेकिन अरविंद साहब ने जो किया, वह दिल को छू गया। उनकी वजह से हमें लगता है कि हमारी बात सुनी जाएगी।” एक अन्य निवासी, शबाना बेगम, ने कहा, “यह वीडियो देखकर मेरी आंखें भर आईं। डीएम साहब ने बुजुर्ग मां की इज्जत की।”
यह घटना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण संदेश देती है। पहला, यह दर्शाती है कि प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह होना चाहिए। दूसरा, यह समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देने की जरूरत को रेखांकित करता है। तीसरा, यह सोशल मीडिया की ताकत को दर्शाता है, जिसने एक सकारात्मक कार्य को लाखों लोगों तक पहुंचाया।
सामाजिक कार्यकर्ता रीना मेहता कहती हैं, “यह घटना हमें सिखाती है कि सत्ता और पद का उपयोग जनता की सेवा के लिए होना चाहिए। डीएम अरविंद चौहान ने यह दिखाया कि एक अधिकारी का असली कर्तव्य जनता की आवाज सुनना है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार को ऐसे अधिकारियों को प्रोत्साहित करना चाहिए और उनकी कार्यशैली को अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा बनाना चाहिए।
इस वीडियो के वायरल होने से सोशल मीडिया की सकारात्मक शक्ति एक बार फिर सामने आई है। जहां अक्सर सोशल मीडिया पर नकारात्मक खबरें और विवाद वायरल होते हैं, वहीं इस बार एक सकारात्मक कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा। न्यूज18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और हजारों ने साझा किया। सोशल मीडिया पर लोग डीएम को ‘जनता का डीएम’ और ‘मानवता का प्रतीक’ जैसे नाम दे रहे हैं।
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह एक प्रचार स्टंट था। लेकिन स्थानीय लोगों और वीडियो की प्रामाणिकता ने इन दावों को खारिज कर दिया। एक स्थानीय पत्रकार ने कहा, “डीएम साहब का यह कदम स्वाभाविक था। उन्होंने पहले भी अपनी कार्यशैली से लोगों का दिल जीता है।”
शामली के डीएम अरविंद कुमार चौहान की इस पहल ने न केवल प्रशासनिक सेवा में एक नया मानदंड स्थापित किया है, बल्कि समाज को यह भी सिखाया है कि मानवता और संवेदनशीलता हर पद और स्थिति से ऊपर है। एक बुजुर्ग महिला की बात सुनने के लिए घुटनों के बल बैठना न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सच्ची सेवा का कोई पद नहीं होता।
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