Sitapur : मिश्रिख में एसआईआर फॉर्म भरने में 2003 की पुरानी मतदाता सूची से बड़ी परेशानी
कई महिलाएं निरक्षर हैं और उनके मायके में कोई जीवित सदस्य नहीं बचा है। ज्यादातर महिलाओं का विवाह 18 साल की उम्र पूरी होते ही हो गया था, इसलिए उनका नाम मायके
Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
सीतापुर जिले की मिश्रिख तहसील में नई मतदाता सूची तैयार करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत फॉर्म भरे जा रहे हैं। लेकिन यह काम 2003 की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर किया जा रहा है, जिससे इलाके के आधे से ज्यादा मतदाताओं को गंभीर मुश्किलें आ रही हैं।
बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम 2003 की सूची में दर्ज नहीं हैं। जिनके नाम हैं, उनमें नाम या पिता/पति का नाम गलत लिखा हुआ है। खासकर महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 2003 में बीएलओ ने महिलाओं के नाम बिना आधार कार्ड या सही दस्तावेजों के मनमाने तरीके से दर्ज कर दिए थे। अब उनसे मायके की सूची का भाग संख्या और क्रमांक पूछा जा रहा है, जो बताना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
कई महिलाएं निरक्षर हैं और उनके मायके में कोई जीवित सदस्य नहीं बचा है। ज्यादातर महिलाओं का विवाह 18 साल की उम्र पूरी होते ही हो गया था, इसलिए उनका नाम मायके की सूची में आया ही नहीं। कुछ के नाम सूची में हैं तो वे पूरी तरह गलत दर्ज हैं, जिससे एसआईआर फॉर्म नहीं भर पा रही हैं।
मतदाताओं का कहना है कि 2013 में आधार कार्ड से सूची संशोधित की गई थी और नाम व वल्दियत सही कर दी गई थी। लेकिन निर्वाचन अधिकारी 2013 की संशोधित सूची को नहीं मान रहे और सिर्फ 2003 की सूची को आधार बना रहे हैं।
इस वजह से मिश्रिख तहसील में 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं और पुरुष गलत नाम, गलत वल्दियत या नाम न होने के कारण एसआईआर फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने निर्वाचन विभाग से मांग की है कि 2013 की आधार संशोधित सूची को मान्य किया जाए, महिलाओं के लिए विशेष छूट दी जाए और दस्तावेजों के आधार पर नाम सुधार की अनुमति मिले ताकि कोई पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।
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