Sitapur : भाद्रपद के शनिश्चरी अमावस्या पर्व पर नैमिषारण्य में हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु
देश के विभिन्न जिला व राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने नैमिष तीर्थ स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए। इनमें मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानग
Report : सुरेन्द्र मोठी INA न्यूज़ नीमसार
नैमिषारण्य- सीतापुर : विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य में भाद्रपद मास की अमावस्या पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। भोर होते ही चक्रतीर्थ कुंड और गोमती नदी राजघाट एवं देवदेवेश्वर महादेव के घाटों पर स्नान दर्शन, पूजन और दान पुण्य का क्रम शुरू हो गया। इस बार दो दिन पूर्व से ही श्रद्धालुओं का अपने अपने निजी वाहनों एवं रोडवेस व रेलगाड़ी के मध्यम से आने का सिलसिला शुरू हो गया था, आये हुए श्रद्धालु अपने परिचित पुरोहितों एवं अपने जान पहचान वालों के वह रात भर रुकते है और भोर होते ही दर्शन पूजन का कार्यक्रम शुरू करते हैं।
देश के विभिन्न जिला व राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने नैमिष तीर्थ स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए। इनमें मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, त्रिशक्ति धाम और देवदेवेश्वर नाथ महादेव आदि कई प्राचीन तीर्थ, स्थलों पर दर्शन कर माथा टेक मनोकामनापूर्ण होने का वरदान मांगा।
कुशोत्पाटनी अमावस्या पर विशेष दान.पुण्य का कार्यक्रम रहता है।
जनश्रुति के अनुसार इस अमावस्या को कुशोत्पाटनी अमावस्या एवं शनिश्चरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। शनिवार को पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जा रहा है। इस दिन काली वस्तुओं के दान करने से न्याय के देवता भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त होती हैं एवं शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इस विशेष दिन को संग्रह किया गया कुश एक वर्ष तक उपयोग में लाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी पूजन में कुश और पवित्री का विशेष महत्व होता है। इस पर्व पर नैमिषारण्य, तीर्थ जैसे धर्मस्थलों पर किए गए स्नान दान. पुण्य करने से पितृ दोष में शांति माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है एवं परिवार में सुख शांति बनी रहती हैं। इस अमावस्या के पावन पर्व नैमिषारण्य थाना की पुलिस बल नैमिषारण्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं मुख्य नदी के घाटों व माजूद रही।
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