Lucknow: उत्तर प्रदेश में बाल गृहों व महिला शरणालयों की 24×7 निगरानी के लिए स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर संचालित।
महिला कल्याण विभाग द्वारा बाल गृहों एवं महिला शरणालयों की निगरानी केन्द्रीय सीसीटीवी व्यवस्था के तहत की जा रही है- संदीप कौर-निदेशक महिला कल्याण
लखनऊ: निदेशक महिला कल्याण संदीप कौर ने जानकारी दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा, संरक्षण तथा संस्थागत व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल की गई है। इसके तहत विभाग द्वारा संचालित बाल गृहों एवं महिला शरणालयों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की सतत निगरानी हेतु स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर (SDMC) का संचालन महिला कल्याण निगम, बंगला बाजार स्थित भवन में माह अप्रैल 2025 से 24×7 आधार पर किया जा रहा है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रदेश के 60 बाल गृहों एवं 10 महिला शरणालयों, कुल 70 संस्थाओं, में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, जिससे इन संस्थाओं में निवासरत बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा, देख-रेख तथा समग्र व्यवस्थाओं पर निरंतर नजर रखी जा सके।
निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं विकेन्द्रित बनाने के उद्देश्य से संबंधित 17 मंडल के सापेक्ष 15 मंडलीय कार्यालय में एवं 31 जनपदों के सापेक्ष 28 जनपदीय कार्यालय में भी मॉनिटरिंग हेतु डिस्प्ले लगाए जा चुके हैं, शेष 2 मंडल कार्यालय यथा चित्रकूट एवं अयोध्या एवं 3 जनपद कार्यालय यथा चित्रकूट, अयोध्या, सहारनपुर में कार्य प्रक्रियाधीन है जो कि 1 सप्ताह के भीतर पूर्ण कर दिया जाएगा।
ताकि मंडल एवं जिला स्तर पर भी अधिकारी संस्थाओं की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकें। इसके साथ ही मुख्यालय स्तर पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना की गई है, जो पूरे प्रदेश की सभी संस्थाओं की केन्द्रीय निगरानी का कार्य कर रहा है।
मुख्यालय स्थित एसडीएमसी में कुल 6 प्रशिक्षित कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं, जो 2-2 कर्मियों की 3 शिफ्टों में कार्य करते हुए 24×7 इस केंद्र का संचालन कर रहे हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समय निगरानी व्यवस्था बाधित न हो और संस्थाओं की गतिविधियों पर लगातार नजर बनी रहे।
एसडीएमसी द्वारा प्रदेश की समस्त 70 संस्थाओं में नियमित रूप से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष निगरानी की जाती है—
1. संस्थाओं में साफ-सफाई एवं स्वच्छता की स्थिति।
2. समस्त स्टाफ की उपस्थिति एवं ड्यूटी के प्रति उनकी नियमितता।
3. बच्चों के प्रति स्टाफ का व्यवहार, संवेदनशीलता एवं अनुशासन।
4. किचन में स्वच्छता, भोजन की तैयारी की स्थिति एवं गंदगी की संभावना।
5. ड्यूटी के समय सुरक्षा गार्ड की सतर्कता, जागरूकता एवं निर्धारित स्थान पर उपस्थिति।
6. संस्था में निवासरत सभी बच्चों की समुचित देख-रेख, सुरक्षा, रहन-सहन एवं सुव्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित करना।
स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर के माध्यम से किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी जाती है, जिससे समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
निदेशक महिला कल्याण संदीप कौर ने बताया कि विभाग की यह पहल न केवल बाल संरक्षण एवं महिला सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि संस्थागत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही को भी नई मजबूती प्रदान करती है। यह व्यवस्था प्रदेश में महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और अनुकरणीय कदम है।
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