उदयपुर डेंटल कॉलेज में छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में कॉलेज स्टाफ पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप
श्वेता ने लिखा कि उनके बैच के कई छात्र इंटर्नशिप शुरू कर चुके हैं, लेकिन वे दो साल से अंतिम वर्ष में अटके हुए हैं। कॉलेज ने वादा किया था कि दो महीने में परीक्षाएं पूरी हो जाएंगी,
उदयपुर के पैसिफिक डेंटल कॉलेज में 24 जुलाई 2025 की रात एक दुखद घटना घटी। बीडीएस अंतिम वर्ष की 25 वर्षीय छात्रा श्वेता सिंह ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। श्वेता जम्मू-कश्मीर की रहने वाली थीं। उनके कमरे से पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने कॉलेज स्टाफ पर मानसिक प्रताड़ना, परीक्षा में अनियमितता और पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस घटना के बाद कॉलेज में छात्रों ने प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटना उदयपुर के भीलों का बेदला क्षेत्र में स्थित पैसिफिक डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल की है। 24 जुलाई 2025 की रात करीब 11 बजे श्वेता की रूममेट ने उन्हें अपने हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटके हुए पाया। रूममेट के शोर मचाने पर अन्य छात्राएं मौके पर पहुंचीं और श्वेता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस को मौके से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसमें श्वेता ने कॉलेज के दो स्टाफ सदस्यों—माही मैम और भगवत सर—पर मानसिक और भावनात्मक प्रताड़ना का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि पिछले दो साल से उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था। नोट में श्वेता ने कॉलेज प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए, श्वेता ने लिखा कि उनके बैच के कई छात्र इंटर्नशिप शुरू कर चुके हैं, लेकिन वे दो साल से अंतिम वर्ष में अटके हुए हैं। कॉलेज ने वादा किया था कि दो महीने में परीक्षाएं पूरी हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मनमानी और अनियमितता: श्वेता ने आरोप लगाया कि कॉलेज मनमाने ढंग से छात्रों को फेल करता है। कुछ छात्रों को पैसे लेकर पास किया जाता है, जबकि मेहनती छात्रों को जानबूझकर रोका जाता है।
पैसे की मांग: श्वेता ने लिखा कि जो छात्र पैसे नहीं देते, उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, "वे पैसों के लिए बच्चों को प्रताड़ित करते हैं। अगर पैसे दोगे तो पास हो जाओगे, नहीं तो खून चूस लेंगे।"
करियर को नुकसान: श्वेता ने लिखा, "उन्होंने मेरा करियर बर्बाद कर दिया। मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती।" उन्होंने यह भी मांग की कि भगवत सर को उनके कृत्यों के लिए जेल भेजा जाए।
सुखेर थाना पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया। सुखेर थाना प्रभारी रमेश चंद्र ने बताया कि नोट में नामित स्टाफ सदस्यों से पूछताछ शुरू की गई है और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
कॉलेज प्रशासन ने बढ़ते दबाव के बीच सुसाइड नोट में नामित दोनों स्टाफ सदस्यों—माही मैम और भगवत सर—को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया। कॉलेज के संचालक राहुल अग्रवाल ने प्रिंसिपल रवि कुमार को चेतावनी दी और छात्रों को भरोसा दिलाया कि अगले दो-तीन महीनों में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
श्वेता की आत्महत्या की खबर फैलते ही 25 जुलाई 2025 की सुबह कॉलेज में तनाव का माहौल बन गया। सैकड़ों छात्रों ने कॉलेज के मुख्य द्वार को बंद कर धरना शुरू किया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की। छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन उपस्थिति और परीक्षा के नाम पर बार-बार दबाव बनाता है। कुछ छात्रों ने बताया कि श्वेता उस बैच में थी, जिसे 75% उपस्थिति न होने या अन्य कारणों से बार-बार रोका गया। नियमों के अनुसार, ऐसे छात्रों की परीक्षा छह महीने में होनी चाहिए, लेकिन कॉलेज ने इसे अनदेखा किया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन वे दोषियों की गिरफ्तारी तक पोस्टमॉर्टम न कराने पर अड़े रहे। श्वेता के माता-पिता, जो जम्मू-कश्मीर से 26 जुलाई को उदयपुर पहुंचे, ने भी कॉलेज प्रशासन से मुलाकात की। उन्होंने पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति देने से पहले दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
श्वेता सिंह जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की रहने वाली थीं। उनके पिता बलवंत सिंह पुलिस में कांस्टेबल हैं और श्वेता उनकी इकलौती बेटी थी। श्वेता ने जम्मू के टीनी टोर्स हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और एसपी स्मार्ट स्कूल से 12वीं पास की। पढ़ाई में होनहार श्वेता डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थीं। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने पैसिफिक डेंटल कॉलेज में दाखिला लिया था। उनके पिता ने बताया कि श्वेता ने पहले भी कॉलेज के स्टाफ द्वारा दबाव बनाने की शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि कई अन्य छात्र भी ऐसी ही परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
श्वेता की आत्महत्या ने निजी शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह घटना हाल ही में ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में एक बीडीएस छात्रा की आत्महत्या से मिलती-जुलती है, जहां भी सुसाइड नोट में शिक्षकों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया गया था।
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर गुस्सा और दुख व्यक्त किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, "यह बेहद दुखद है कि छात्रों को ऐसी यातनाओं से गुजरना पड़ता है। कॉलेज प्रशासन को जवाबदेह बनाना होगा।" कई लोगों ने मांग की कि सरकार को निजी कॉलेजों में ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए।
श्वेता सिंह की आत्महत्या एक दुखद और चेतावनी देने वाली घटना है, जो निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है। सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है, लेकिन यह घटना समाज और सरकार के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि छात्रों को ऐसी परिस्थितियों से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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