77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ हुआ, विजय चौक भारतीय धुनों से गूंज उठा

इस वर्ष विशेष रूप से समारोह में भारतीय वाद्य यंत्रों पर जोर दिया गया। विजय चौक पर बैठने की व्यवस्था को भारतीय वाद्य यंत्रों के नामों से नामित किया गया, जैसे बांसुरी, डमरू, ए

Jan 30, 2026 - 07:40
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77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ हुआ, विजय चौक भारतीय धुनों से गूंज उठा
77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ हुआ, विजय चौक भारतीय धुनों से गूंज उठा

  • 77वें गणतंत्र दिवस के भव्य समापन में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी ने दिखाई सैन्य अनुशासन और सांस्कृतिक धरोहर की झलक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया अध्यक्षता
  • विजय चौक पर आयोजित बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी ने 77वें गणतंत्र दिवस को किया समाप्त, भारतीय सेना की बैंड और देशभक्ति संगीत ने मचाया जादू

नई दिल्ली में 29 जनवरी 2026 को आयोजित बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी ने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का आधिकारिक और भव्य समापन किया। यह कार्यक्रम विजय चौक पर शाम को आयोजित हुआ, जहां पूरा क्षेत्र भारतीय धुनों, देशभक्ति संगीत और सैन्य बैंड की प्रस्तुतियों से गूंज उठा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, ने इस समारोह की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य केंद्रीय मंत्री भी इस अवसर पर मौजूद रहे।बीटिंग रिट्रीट एक पारंपरिक सैन्य समारोह है, जो गणतंत्र दिवस उत्सवों को समाप्त करने का प्रतीक है। यह आयोजन प्रतिवर्ष विजय चौक पर होता है, जो राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने स्थित है। इस वर्ष समारोह में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की बैंड्स ने भाग लिया। इन बैंड्स ने भारतीय संगीत की मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं, जिनमें पारंपरिक और देशभक्ति से भरे गीत शामिल थे। समारोह की शुरुआत शाम 5 बजे हुई और यह सैन्य अनुशासन, एकता तथा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाला था।इस समारोह में बैंड्स द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें मार्चिंग, म्यूजिकल परफॉर्मेंस और लाइट्स के साथ फॉर्मेशन शामिल थे। भारतीय सेना के जवानों ने 'मैप ऑफ इंडिया' जैसी प्रभावशाली फॉर्मेशन बनाई, जिसमें लाइट्स और संगीत का संयोजन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना। इसके अलावा 'वंदे मातरम्' जैसे राष्ट्रीय गीत की धुनें गूंजीं, जो दर्शकों को देशभक्ति की भावना से भर गईं। बैंड्स ने 'भारत हमको जान से प्यारा है' जैसी धुनें भी बजाईं, जो पूरे विजय चौक पर प्रतिध्वनित हुईं।इस वर्ष विशेष रूप से समारोह में भारतीय वाद्य यंत्रों पर जोर दिया गया। विजय चौक पर बैठने की व्यवस्था को भारतीय वाद्य यंत्रों के नामों से नामित किया गया, जैसे बांसुरी, डमरू, एकतारा आदि। यह कदम देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने वाला था। बैंड्स ने मृदंगम, तबला जैसे वाद्य यंत्रों से जुड़ी धुनों को शामिल किया, जो ब्रिटिश काल की परंपराओं से हटकर भारतीय संगीत पर केंद्रित था।समारोह के दौरान सैन्य बैंड्स ने अनुशासित मार्चिंग और संगीत का प्रदर्शन किया, जिसमें पाइप्स एंड ड्रम्स, मास्ड बैंड्स आदि शामिल थे। भारतीय सेना की प्रस्तुतियां विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं, जिनमें ओपी सिंदूर फॉर्मेशन और गगनयान फॉर्मेशन जैसे प्रदर्शन दिखाए गए। इन फॉर्मेशनों ने भारत की रक्षा तैयारियों और अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को भी दर्शाया। भारतीय वायुसेना को श्रद्धांजलि देते हुए मिग-21 जैसे विमानों का प्रदर्शन भी शामिल था, जो सैन्य परंपरा और आधुनिक तकनीक का मिश्रण था। राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और संसद भवन पर रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई थी, जो समारोह को और भव्य बनाती थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर राष्ट्रपति बॉडीगार्ड ने उन्हें एस्कॉर्ट किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। यह समारोह राष्ट्रपति भवन के सामने विजय चौक की भव्यता के बीच हुआ, जहां पूरा क्षेत्र सैन्य संगीत और रोशनी से जगमगा उठा।बीटिंग रिट्रीट की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, जो सैन्य इतिहास से जुड़ी है। यह सेना के वापस लौटने और दिन के अंत का संकेत देता है। भारत में यह गणतंत्र दिवस के तीन दिन बाद 29 जनवरी को आयोजित होता है। इस वर्ष यह 77वें गणतंत्र दिवस का समापन था, जो पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह में शामिल बैंड्स ने भारतीय सेना की बहादुरी, अनुशासन और एकता को प्रदर्शित किया।विजय चौक पर हजारों दर्शकों ने इस कार्यक्रम का सजीव आनंद लिया। संगीत की धुनें और सैनिकों की परेड ने वातावरण को भावुक बना दिया। 'कदम कदम बढ़ाए जा' जैसी मार्चिंग धुनों के साथ बैंड्स ने प्रदर्शन किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान और अन्य देशभक्ति गीतों के साथ हुआ, जो पूरे क्षेत्र में गूंजता रहा। यह आयोजन भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक था।

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