उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों की चांदी: योगी सरकार ने मानदेय वृद्धि के लिए जारी किए 250 करोड़ रुपये।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षा मित्रों और इंस्ट्रक्टरों
- 1.67 लाख परिवारों में खुशियों की लहर: अब 10 हजार नहीं बल्कि 18 हजार रुपये मिलेगी शिक्षा मित्रों को मासिक सैलरी
- शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से प्रभावी हुई नई दरें, मई के पहले हफ्ते से बैंक खातों में आएगी बढ़ी हुई रकम
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षा मित्रों और इंस्ट्रक्टरों (अनुदेशकों) को एक बड़ी सौगात देते हुए उनके मानदेय में भारी वृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। सरकार ने इस वृद्धि को अमलीजामा पहनाने के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट फंड आवंटित कर दिया है, जो विशेष रूप से बढ़े हुए वेतन के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। काफी समय से अपने आर्थिक हितों और मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इन संविदा कर्मियों के लिए यह निर्णय किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि बजट आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसे संबंधित जिलों के शिक्षा अधिकारियों को हस्तांतरित किया जा रहा है, ताकि भुगतान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का तकनीकी विलंब न हो सके। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत शिक्षा मित्रों के मानदेय में करीब 80 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है। अब तक शिक्षा मित्रों को प्रति माह मात्र 10,000 रुपये का मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसी तरह, अनुदेशकों के मानदेय में भी जबरदस्त उछाल आया है; उन्हें पहले मिलने वाले 9,000 रुपये के स्थान पर अब हर महीने 17,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह वृद्धि उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है जो लंबे समय से बढ़ती महंगाई के बीच कम वेतन में गुजारा करने को मजबूर थे। सरकार का यह कदम राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और संविदा पर कार्यरत शिक्षकों के मनोबल को ऊँचा उठाने की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है। मानदेय में की गई यह वृद्धि 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी। इसका अर्थ यह है कि मई माह में जब अप्रैल का वेतन कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा होगा, तो वह बढ़ी हुई दरों के साथ आएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भुगतान की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
इस फैसले का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के लगभग 1.67 लाख कर्मचारियों को मिलने जा रहा है। इनमें शिक्षा मित्रों की संख्या सर्वाधिक है जो ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षा की नींव को संभाले हुए हैं। फंड जारी होने के बाद शिक्षा विभाग ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र लाभार्थियों का डेटाबेस अपडेट करें ताकि 1 मई से बैंक खातों में सीधी राशि (DBT) भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। यह पहली बार है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों के वेतन में लगभग दोगुना इजाफा किया गया है। बजट में आवंटित 250 करोड़ रुपये की पहली किस्त मुख्य रूप से अप्रैल और मई के अंतर को पाटने और सुचारू भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम के पीछे की मंशा राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना भी है। जानकारों का कहना है कि आर्थिक रूप से निश्चिंत होने के बाद शिक्षा मित्र और अनुदेशक अपनी शिक्षण गतिविधियों में अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ योगदान दे सकेंगे। पूर्व में कम मानदेय के कारण इन कर्मचारियों के बीच काफी असंतोष था और समय-समय पर आंदोलन की स्थिति भी बनती रही थी। अब 18,000 और 17,000 रुपये की सम्मानजनक राशि मिलने से उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में भी इस मद में फंड की कमी न हो, इसके लिए आगामी बजट प्रावधानों में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं।
अनुदेशकों के संदर्भ में देखा जाए तो उनकी सैलरी में हुआ 8,000 रुपये का इजाफा उनके जीवन स्तर को बदलने वाला साबित होगा। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कला, शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा जैसे विषयों को पढ़ाने वाले ये अनुदेशक पिछले कई वर्षों से अपने विनियमितीकरण और वेतन वृद्धि की लड़ाई लड़ रहे थे। यद्यपि यह वृद्धि अभी भी संविदा के आधार पर ही है, लेकिन राशि में हुई इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने उन्हें वर्तमान आर्थिक संकट से उबरने में बड़ी मदद दी है। मई माह के पहले सप्ताह में जब पहली बार बढ़ा हुआ मानदेय खातों में दिखेगा, तो यह राज्य के शिक्षा इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, मानदेय बढ़ाने की इस फाइल पर मुख्यमंत्री स्तर से विशेष रुचि लेकर काम करवाया गया है। सरकार की प्राथमिकता थी कि नए सत्र की शुरुआत के साथ ही इन शिक्षकों को प्रोत्साहन दिया जाए। फंड जारी करने के साथ ही विभाग ने एक निगरानी सेल भी गठित किया है जो यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी जिले में स्थानीय स्तर पर बजट की उपलब्धता के बावजूद भुगतान में देरी न हो। डिजिटल ट्रांजैक्शन के माध्यम से होने वाला यह भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार से जुड़े खाते में पहुंचेगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि यदि उनके केवाईसी (KYC) संबंधी कोई कार्य लंबित हैं, तो उन्हें तुरंत पूरा कर लें।
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