Crime News: परीक्षा देकर लौटी दसवीं की छात्रा बनी मां, कांग्रेस ने साधा निशाना।
कांग्रेस पार्टी (congress party) ने दसवीं की छात्रा के द्वारा परीक्षा के बाद एक बच्चे को जन्म देने के मामले में सरकार पर निशाना साधने का काम किया उन्होंने कहा कि....
कांग्रेस पार्टी (congress party) ने दसवीं की छात्रा के द्वारा परीक्षा के बाद एक बच्चे को जन्म देने के मामले में सरकार पर निशाना साधने का काम किया उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय से एक महिला देश कि राष्ट्रपति है तो यहां के मुख्यमंत्री (Chief Minister) भी आदिवासी हैं। फिर भी बच्चों के प्रति इतनी बड़ी लापरवाही कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।
- छात्रा के मां बनने पर मचा बवाल
ओड़िशा (Odisha) में कक्षा 10 की छात्रा के द्वारा पेपर देने के बाद बच्चे को जन्म देने का मामला काफी गर्माता हुआ दिखाई दे रहा है। इस मामले में कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। दरअसल बताते चलें कि मामला मलकानगिरी जिले का है। सोमवार को 10वीं की बोर्ड परीक्षा से लौटने के बाद लड़की ने अपने छात्रावास में समय से पहले बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद मां और उसके नवजात शिशु दोनों को मलकानगिरी जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले में पुलिस ने बुधवार को 22 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इसी युवक ने सरकारी आवासीय विद्यालय की 10वीं कक्षा की छात्रा से बलात्कार कर उसे गर्भवती किया।
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- कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने ओडिशा सरकार और प्रशासन की आदिवासी समुदाय के मामलों में लापरवाही की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय से आने वाली एक छात्रा, जो 10वीं कक्षा की छात्रा थी और छात्रावास में रहती थी, परीक्षा देने जाते वक्त बच्चे को जन्म देती है। इसे राज्य और प्रशासन के लिए शर्मनाक घटना मानते हुए उन्होंने प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।
उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी बच्चों और स्कूलों की स्थिति पर नजर रखना राज्यपाल की जिम्मेदारी है, और उन्हें आदिवासी बच्चों की देखभाल की समीक्षा करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने विधानसभा की एससी-एसटी समिति से अपील की कि वह आदिवासी स्कूलों का दौरा करें और स्थिति की जाँच करें। दास ने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह अत्यंत निराशाजनक है कि जब एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति और एक आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, तब भी आदिवासी बच्चों के प्रति ऐसी लापरवाही बरती जा रही है।
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