नोएडा में वृद्धाश्रम से अमानवीय स्थिति में 39 बुजुर्गों को बचाया गया: तहखाने जैसे कमरों में कैद, बदहाल हालत में मिले। 

उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक वृद्धाश्रम में अमानवीय परिस्थितियों का खुलासा हुआ है, जहां 39 बुजुर्गों को तहखाने जैसे कमरों में कैद रखा गया था। यह चौंकाने....

Jun 27, 2025 - 16:23
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नोएडा में वृद्धाश्रम से अमानवीय स्थिति में 39 बुजुर्गों को बचाया गया: तहखाने जैसे कमरों में कैद, बदहाल हालत में मिले। 

उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक वृद्धाश्रम में अमानवीय परिस्थितियों का खुलासा हुआ है, जहां 39 बुजुर्गों को तहखाने जैसे कमरों में कैद रखा गया था। यह चौंकाने वाली घटना तब सामने आई जब जिला प्रशासन और पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-63 स्थित एक वृद्धाश्रम पर छापेमारी की। इस अभियान में 22 महिलाओं और 17 पुरुषों को बचाया गया, जिनमें से कई की हालत अत्यंत दयनीय थी। रेस्क्यू किए गए बुजुर्गों में कुछ के शरीर पर आधे-अधूरे कपड़े थे, और कई मल-मूत्र में सने हुए पाए गए। इस घटना ने वृद्धाश्रमों की कार्यप्रणाली और बुजुर्गों की देखभाल के प्रति गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन को शिकायत मिली थी कि सेक्टर-63 में संचालित इस वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर 26 जून 2025 को जिला प्रोबेशन अधिकारी और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने वृद्धाश्रम पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे दिल दहला देने वाले थे। वृद्धाश्रम के तहखाने जैसे कमरों में बुजुर्गों को बंद रखा गया था, जहां न तो पर्याप्त रोशनी थी और न ही वेंटिलेशन। कमरों में गंदगी और बदबू का आलम था। रेस्क्यू की गई 22 महिलाओं में से कई के कपड़े फटे हुए थे, और कुछ बुजुर्गों की शारीरिक स्थिति इतनी खराब थी कि वे ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रहे थे। पुरुषों की हालत भी कुछ कम दयनीय नहीं थी। कई बुजुर्गों ने बताया कि उन्हें नियमित भोजन और दवाइयां नहीं दी जाती थीं, और उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की जाती थी।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि वृद्धाश्रम बिना उचित अनुमति और पंजीकरण के संचालित हो रहा था। वृद्धाश्रम के संचालक और कर्मचारियों पर बुजुर्गों के साथ अमानवीय व्यवहार और उपेक्षा के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने वृद्धाश्रम के संचालक और कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया है, और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 342 (गलत तरीके से कैद करना), और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, वृद्धाश्रम की लाइसेंसिंग और संचालन प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है।

जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि सभी 39 रेस्क्यू किए गए बुजुर्गों को तुरंत मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। कई बुजुर्गों को कुपोषण और शारीरिक कमजोरी के लक्षण मिले हैं, जिनका इलाज शुरू कर दिया गया है। प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क करने की कोशिश शुरू की है, ताकि उन्हें उनके परिवारों के पास वापस भेजा जा सके। जिन बुजुर्गों के परिवार नहीं मिलेंगे, उन्हें सरकारी आश्रय स्थलों या अन्य पंजीकृत वृद्धाश्रमों में स्थानांतरित किया जाएगा।

यह घटना नोएडा में वृद्धाश्रमों के संचालन पर सवाल उठाती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि सभी वृद्धाश्रमों की नियमित जांच हो और उनके संचालन के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि हमारे समाज में बुजुर्गों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है। सरकार को चाहिए कि वृद्धाश्रमों के लिए सख्त निगरानी तंत्र बनाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”

पुलिस और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी वृद्धाश्रम या संस्थान के बारे में जानकारी दें, जहां बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार की आशंका हो। इस घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है, और लोग अब बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, जांच जारी है, और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

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