Ayodhya News: लोकसभा सीट गंवाने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल।
मिल्कीपुर मे बीजेपी मजबूत विकल्प तैयार करने की दिशा में...
रिपोर्ट- देव बक्श वर्मा
अयोध्या: लोकसभा सीट गंवाने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल हो गया है। उपचुनाव घोषित होने में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है कुछ ही दिनों में उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा के उपचुनाव का डंका बजाने वाला है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी इस प्रतिष्ठित सीट को नाक का बाल समझ रही है और अपना तंबू मिल्कीपुर में गढ़ दिया है। अपने-अपने ढंग से चुनाव जीतने के दावा भी कर रहे हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या, राम मंदिर के निर्माण के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर रहा है और पूरी दुनिया में अयोध्या का डंका बज रहा है । किंतु लोकसभा चुनाव में फैजाबादअयोध्या लोकसभा क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई, यहां तक की अयोध्या मंडल में भाजपा का खाता नहीं खुल सका, समाजवादी पार्टी ने अवधेश प्रसाद को टिकट दिया था जो मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे, उनके सांसद बनने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र खाली हो गया और अब उपचुनाव होना है।
जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने कमर कस लिया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं कमान संभाल लिया है ।कई बार मिल्कीपुर क्षेत्र का भ्रमण किया, जनसभा व रैली किया और मिल्कीपुर सीट को भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानकर चल रहे हैं । फैजाबाद लोकसभा सीट से अवधेश प्रसाद के सांसद बन जाने से मिल्कीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई। मिल्कीपुर समेत यूपी की 10 सीटों पर जल्द उपचुनाव कराए जाने हैं। अब जनता बहुत जागरूक हो गई है अपना भला बुरा जानती है किसी के बहकावे में नहीं आती है। नेताओं के चुनाव प्रचार करने से मत ग्राफ पर बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ता है। हां यह बात सही है कि चुनाव समीकरण पर निर्भर करता है, जनता के बीच में जैसा समीकरण बन जाए चुनाव इस तरफ करवट ले लेता है।
बताया जा रहा है कि मिल्कीपुर से सपा अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाएगी। हालांकि अभी नाम की घोषणा नहीं की गई है। चर्चा है कि सपा की देखा-देखी बीजेपी भी पासी वर्ग से जुड़े किसी नेता को यहां से उतार सकती है। बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व प्रत्याशी के नाम को लेकर मंथन कर रहा है। लोकसभा सीट हारने के बाद बीजेपी मजबूत समीकरण तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
मिल्कीपुर विधानसभा में 3 लाख 57 हजार 659 वोटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति वर्ग के हैं। दूसरे नंबर पर ओबीसी वोटर्स हैं। यहां पर यादव और मुस्लिम समाज के वोटरों पर सपा की मजबूत पकड़ मानी जाती है। अनुसूचित जाति वर्ग से पासी समाज का वोट सबसे ज्यादा सपा को मिलता रहा है। यही वजह से सपा और बीजेपी का जोर पासी उम्मीदवार पर ही है
2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बाबा गोरखनाथ को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस बार भी वह अपना टिकट फाइनल मानकर चल रहे हैं। गोरखनाथ को सपा के अवधेश प्रसाद ने 12 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। गोरखनाथ के अलावा बीजेपी के कई स्थानीय नेताओं का नाम संभावित प्रत्याशी के रूप में सामने आया है। इनमें पूर्व विधायक रामू प्रियदर्शी, नीरज कनौजिया, आरएसएस की पृष्ठिभूमि वाले जिला महामंत्री कांशीराम रावत, राधेश्याम त्यागी, चंद्रभानु पासवान, लक्ष्मी रावत और जिला पंचायत सदस्य बबलू पासी का नाम शामिल है। इनमें कई नेता पासी समाज के भी हैं।
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बताया जाता है कि मिल्कीपुर सीट पर सबसे ज्यादा चार मंत्रियों की ड्यूटी
लोकसभा सीट गंवाने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने चार मंत्रियों की ड्यूटी लगाई है। योगी ने भूमिहार, ठाकुर, यादव और ब्राह्मण समाज के मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतार कर जातिगत समीकरण साधने की तैयारी तेज कर दी है। मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम चाहे जो हो सपा और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा मानी जा रही है इस सीट को हारने और जितने से उत्तर प्रदेश सरकार पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है।
लेकिन इसको लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव के दृष्टि से देखा जा रहा है और यह सीट सपा भाजपा के लिए नाक का बाल साबित होगी। एक बात और है की अवधेश प्रसाद के बेटे को टिकट मिलने से यह सवाल उठ सकता है कि सपा परिवार वाद के घेरे में चल रही है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ को भाजपा से टिकट मिलता है तो जनता के बीच में उनके विरोध का सामना भाजपा को करना पड़ रहा है। ऐसे में अब जब तक भाजपा का टिकट फाइनल नहीं हो जाता तब तक समीकरण के बारे में कुछ कह पाना संभव नहीं है। क्योंकि चुनाव अब नेता के मेहनत और कार्य पर नहीं बल्कि समीकरण पर निर्भर करता है । जनता का मूड किस पर जाता है आने वाले समय में पता चल जाएगा।
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