भारत बंद का असर: 35 बच्चों को जिन्दा जलाने की साजिश, पटना में SDM तक पिटे
Bharat Band: देश में भारत बंद के आवाहन के बाद कई स्थानों पर इसका असर देखने को मिला। जहां बिहार के गोपालगंज में प्रदर्शन के बहाने स्कूली बस को जलाने की साजिश की गयी तो वहीं एसडीएम भी इस हिंसा का शिकार हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त को एससी-एसटी के आरक्षण पर फैसला दिया था, जो कि कोटे के अंदर कोटा का मामला है। इसके खिलाफ बुधवार को देशभर के 21 संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया। संगठनों का कहना है कि इससे आरक्षण के मूल सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा। पटना के एसएसपी के मुताबिक, डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने यातायात बाधित किया। बैरिकेड्स हटाने पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना में कोई घायल नहीं हुआ। स्थिति नियंत्रण में है। प्रदर्शनकारियों ने जहानाबाद में नेशनल हाईवे-83 बाधित कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाकर्मियों से झड़प हुई। इसके बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, सारण, बेगूसराय, हाजीपुर और पूर्णिया में प्रदर्शनकारियों ने कई जगह यातायात बाधित करने की कोशिश की। हालांकि, सुरक्षा बलों ने उन्हें तितर-बितर कर दिया। इन जिलों में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर टायर जलाए। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और उनके समर्थक भी सड़कों पर उतरे। पटना में पुलिस के लाठीचार्ज का एसडीएम को भी सामना करना पड़ गया। सदर एसडीएम श्रीकांत कुंडलीक खांडेकर डीजे के ठेले के पास खड़े थे। ये डीजे बंद समर्थक लेकर आए थे। खांडेकर भी ठेले के पास खडे थे।
इसी दौरान पीछे से आए सिपाही ने एसडीएम को लाठी मार दी। जब तक वो कुछ समझते, सिपाही लाठी मार चुका था। इसके बाद तुरंत सिपाही के दूसरे साथी उसे किनारे लेकर गए और समझाया। झारखंड में भारत बंद का मिलाजुला असर रहा। बंद की वजह से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक परिवहन की बसें सड़कों पर नहीं दिखीं, स्कूल बंद रहे। बंद की वजह से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपना पलामू का दौरा रद्द कर दिया। झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरजेडी ने बंद को समर्थन दिया। वामपंथी दल भी बंद के समर्थन में उतरे. दरभंगा और बक्सर रेलवे स्टेशन पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंच गए। कुछ देर के लिए बिहार संपर्क क्रांति और फरक्का एक्सप्रेस ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद आरपीएफ और रेल पुलिस के जवानों ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को हटाया। आरजेडी और इंडिया गठबंधन के कई दलों ने बंद का समर्थन किया है। गुजरात के दलित और आदिवासी इलाकों में भारत बंद का असर देखने को मिला। सुरेंद्रनगर, छोटा उदयपुर, नर्मदा, साबरकांठा और अरावली जिले के आदिवासी और दलित बहुल इलाकों में बंद का असर दिखा। यहां बाजार बंद रहे। सुरेंद्रनगर जिले के वाधवन में प्रदर्शनकारियों ने मालगाड़ी रोक दी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस मौके पर पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने अरावली जिले के भिलोदा और शामलाजी में सड़कों पर जाम लगा दिया। राजस्थान में भारत बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। जयपुर, अजमेर व कई शहरों में बाजार बंद रहे। राज्य के डीजीपी ने कहा कि एक-दो छिटपुट घटनाओं को छोड़कर राज्य में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. पुलिस-प्रशासन के प्रयासों से बंद शांतिपूर्ण रहा। जयपुर में एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष समिति ने रैली निकाली। खातीपुरा, टोंक रोड, बजाज नगर, झोटवाड़ा और मालवीय नगर में बाजार बंद रहे। भारत बंद का असर जहानाबाद जिला मुख्यालय से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाके में काफी असर देखा गया।
विभिन्न संगठन के लोग सड़क पर उतरकर झंडा बैनर के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया। सड़क जाम कर रहे लोगों का कहना था कि जिस तरह से आरक्षण समाप्त करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा साजिश रची जा रही है उस साजिश को हम लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। लोगों का कहना था कि बाबा साहब ने हम लोगों को आरक्षण देकर समाज के मुख्य धारा से जोड़ने का जो सपना देखा था आज वह सपना भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों के द्वारा चकनाचूर करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पटना-गया एनएज 83 को जाम कर दिया गया। जिला मुख्यालय में सड़क जाम होने के कारण स्कूली बच्चों के वाहन जाम में जहां फंसे रहे। बोधगया जाने वाले पर्यटकों को भी परेशानियां झेलनी पड़ी। इसके अलावे जाम के कारण मरीज को ले जा रहे एंबुलेंस को भी परेशानी उठानी पड़ी। नालंदा में अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति द्वारा बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग को बिंद चौराहा के पास जाम कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण समाप्त करने की कथित साजिश का विरोध किया और बाबा साहब के सपनों को चकनाचूर करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आरक्षण समाप्त करने को लेकर साजिश रची जा रही है, जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुजफ्फरपुर में भारत बंद को सफल बनाने के लिए भीम आर्मी के सदस्यों ने 57 को जाम कर दिया। जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र इलाके के शाहबाजपुर के पास जाम से लोक परेशान रहे।
वहीं मुजफ्फरपुर छपरा न 102 को भी जाम करवा दिया गया। इस कारण सड़क के दोनों ओर से ट्रक और अन्य वाहनों की लंबी कतार लग गई। इतना ही नहीं दुकानों को भी बंद करवा दिया गया। आरा में भी भारत बंद का मिला जुला असर दिख रहा था। प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों की रफ्तार रोक दी। इतना ही नहीं आगजनी कर चक्का जाम कर दिए। विभिन्न दलों के नेताओं ने आरा रेलवे स्टेशन पर चक्का जाम कर दिया। मैसूर रानी कमलापति सहरसा ट्रेन को रोककर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस मौके पर आरपीएफ और जीआरपी पुलिस मौजूद थे। मौके पर डीएम और एसपी पहुंच प्रर्दशनकारियों को समझा कर ट्रैक खाली करवाये। उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने समाहरणालय के समीप पहुंच कर अम्बेडकर चौक को जाम कर दिया। जाम कर रहे प्रदर्शनकारी में भाकपा-माले, बासपा,आरजेडी और लोजपा रामविलास की पार्टी मौजूद रही। उधर सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग टायर में आग लगाकर स्कूली बस के पहिए के नीचे रख देते हैं।
बस के अंदर करीब 35 बच्चे मौजूद थे, जिनका डर के मारे बुरा हाल हो गया। हालांकि बस ड्राइवर और पुलिस प्रशासन के चतुराई से एक बड़ा हादसा टल गया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब कोटा देने का फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने दिया था। जिसके खिलाफ विरोध करते हुए 21 अगस्त को एससी-एसटी समुदायों ने राष्ट्रव्यापी 'भारत बंद' का आह्वान किया। बिहार में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। यहां के गोपालगंज जिले में उपद्रवियों ने जगह - जगह आगजनी और तोड़फोड़ की। वहां का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि कुछ उपद्रवियों ने स्कूली बस को भी जलाने की कोशिश की हालांकि पुलिस और प्रशासन ने इस कोशिश को नाकाम कर दिया।
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सपा चीफ अखिलेश यादव ने इस मामले पर कहा कि आरक्षण की रक्षा के लिए जन-आंदोलन एक सकारात्मक प्रयास है. ये शोषित-वंचित के बीच चेतना का नया संचार करेगा और आरक्षण से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के ख़िलाफ़ जन शक्ति का एक कवच साबित होगा। शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार होता है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने पहले ही आगाह किया था कि संविधान तभी कारगर साबित होगा जब उसको लागू करनेवालों की मंशा सही होगी। सत्तासीन सरकारें ही जब धोखाधड़ी, घपलों-घोटालों से संविधान और संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों के साथ खिलवाड़ करेंगी तो जनता को सड़कों पर उतरना ही होगा। जन-आंदोलन बेलगाम सरकार पर लगाम लगाते हैं।
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