Sambhal News: श्राद्ध के दिनों में इस गांव में ब्राह्मण की नो इंट्री, क्यों नहीं होते श्रद्ध जाने पूरा मामला।
सम्भल के एक गांव में श्राद्ध नहीं होते हैं श्राद्ध के दिनों में गांव में ब्राह्मण ....
रिपोर्ट- उवैस दानिश
सम्भल। बुधवार को जलदान पूर्णिमा से श्राद्ध शुरु हो गए हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक श्राद्ध को मरणोपरांत मृतक के पुत्र पौत्रादि करते हैं मगर सम्भल के एक गांव में श्राद्ध नहीं होते हैं श्राद्ध के दिनों में गांव में ब्राह्मण की नो इंट्री रहती है इन दिनों गांव में भिक्षुक को भी भिक्षा नहीं दी जाती है।
जलदान पूर्णिमा पर लोग अपने पितरों को जल पिला कर तर्पित करते हैं गंगा पर तर्पण को हजारों लोग उमड़ते हैं इस दिन से ही घरों में श्राद्ध होता है जिसमें ब्राहमण को भोजन दान आदि किया जाता है। मगर रजपुरा थाना के गांव भगता नगला में यादव जाति के लोग श्राद्ध नहीं करते हैं इन दिनों में न ब्राह्मण को भोजन कराया जाएगा और न ही इन दिनों ब्राह्मण इस गांव में जाते हैं। श्राद्ध के दिनों में इस गांव में न भिक्षुक जाएगा यदि कोई भूल से पह़ुच भी जाए तो उसे भिक्षा नहीं दी जाती है। करीब सौ साल से भगता नगला के लोग श्राद्ध नहीं करते हैं।
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बाकी के दिनों में ब्राह्मणों का गांव में आना जाना रहता है विवाह आदि संस्कार भी ब्राह्मण ही करते हैं। श्राद्ध न करने की पीछे ग्रामीणों का कहना है कि करीब सौ साल पहले पड़ोस के गांव की ब्राह्मणी श्राद्ध में भोजन को गांव में आई थीं मौसम खराब होने की वजह से वह गांव में ही रुक गईं अगले दिन अपने घर पह़ुचीं तो उनके पति ने आक्षेप लगाते हुए उन्हें घर से निकाल दिया जिसके बाद ब्राह्मणी रोते हुए भगतानगला गांव पहुंची जहां उन्होंने गांव वालों से कहा कि आपकी वजह से मेरे पति ने मुझे घर से निकाला है यदि आपने श्राद्ध किया तो आपका बुरा हो जाएगा। ब्राह्मणी की पीड़ा को श्राप मानते हुए इस गांव के लोग करीब सौ साल श्राद्ध न करने की परंपरा पर कायम हैं।
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