स्वतंत्रता संग्राम से संविधान तक: 102 साल पुराने मदरसे की गौरवशाली परंपरा, आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका, IPS-डॉक्टर-वकील बनाने वाला मदरसा, गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति का उदाहरण।
मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उलूम सम्भल में इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति, संविधान और राष्ट्रीय एकता का संदेश
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उलूम सम्भल में इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति, संविधान और राष्ट्रीय एकता का संदेश पूरे जोश के साथ देखने को मिला। मदरसे के शिक्षक मौलाना वसी अशरफ ने बताया कि यह मदरसा 102 वर्ष पुराना है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार इसके 103 साल पूरे हो चुके हैं, जबकि अंग्रेज़ी तारीख के हिसाब से वर्ष 2025 में इसके 100 साल पूरे हुए। इस मदरसे की स्थापना विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान हज़रत मुफ़्ती मुहम्मद अजमल शाह साहब (रहमतुल्लाही अलैह) ने की थी।
मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान इस मदरसे ने अहम भूमिका निभाई। जब देश अंग्रेज़ों की गुलामी में जकड़ा हुआ था, उस दौर में यहाँ देश को आज़ाद कराने की रणनीतियाँ बनाई जाती थीं और मुफ़्ती अजमल शाह साहब अपने साथियों के साथ स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि मदरसे में केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। यहाँ कंप्यूटर, हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित जैसे विषयों के लिए विशेष शिक्षक मौजूद हैं। इसी का नतीजा है कि यहाँ से पढ़े हुए छात्र IPS अधिकारी, डॉक्टर और वकील बनकर देश की सेवा कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर छात्रों ने हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू में संविधान पर भाषणों की तैयारी की। बच्चों को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान की अहमियत बताई गई और यह समझाया गया कि संविधान सभी धर्मों और समुदायों को बराबरी का अधिकार देता है। मदरसे के छात्र मुहम्मद अय्यूब रज़ा ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे लिए गर्व का दिन है। यह वही दिन है जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और हम सबको इसे मानना और इसकी रक्षा करना चाहिए। वहीं छात्र हाफ़िज़ मुहम्मद सुहैल ने कहा कि वे आगे पढ़-लिखकर अपने देश और समाज की हिफ़ाज़त करना चाहते हैं। कार्यक्रम के अंत में यही संदेश दिया गया कि संविधान ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसे मानना व बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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