Kanpur News: परेड का रावण- जाति धर्म पर बना मिसाल, कई पीढ़ियों से मुस्लिम परिवार बना रहा रावण का पुतला।
राजस्थान से आते है रावण बनाने वाले मुस्लिम कारीगर, 22 वर्षो से मुस्लिम दादा- पोते, पिता- बेटा मिलकर बना रहे पुतला....
कानपुर। भारत देश में सभी धर्म एक समान है अनेकता में एकता की छवि भी बखूबी भारत में दिखाई देती है। इतना ही नहीं हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले त्योहारों को भी सभी धर्म के लोग मिलजुल कर मानते हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि कानपुर शहर में जाति धर्म पर मिसाल बन चुके एक मुस्लिम परिवार की है। विजयदशमी का त्यौहार हो और कानपुर की सबसे पुरानी रामलीला पर चर्चा ना की जाए। ऐसा नहीं हो सकता इस बार परेड की रामलीला अपने अनोखे अंदाज और भिन्न-भिन्न जाति धर्म को संजो कर रखने के साथ कई मिसालो को भी पेश कर रहा है।
आपको जानकर अचंभा होगा कि कानपुर की सबसे पुरानी परेड रामलीला में विजयदशमी के दिन दहन होने वाले रावण के पुतले का निर्माण कई पीढियां से एक मुस्लिम परिवार कर रहा है। इस बार भी या मुस्लिम परिवार रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलो को तैयार कर रहा है। राजस्थान से आये इन मुस्लिम कारीगरों में दादा- पोते, पिता- बेटे से लेकर तीन पीढ़ियां इस कार्य में लगी हुई है। यह रावण न सिर्फ सच्चाई पर बुराई की जीत का प्रतीक है, बल्कि सभी धर्म की एकजुटता का भी प्रतीक बना हुआ है।
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आधुनिकता और नवीनीकरण के साथ तैयार हो रहा परेड रामलीला का रावण 90 फुट का है। मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला 70 फीट का है । रावण जो रामलीला देखने आए दर्शकों को गर्दन घुमा कर देखेगा और उसके एक एक सिर को बारी बारी से विस्फोट किया जाएगा। आँख से अंगारे और मुंह से फूलों की वर्षा भी करेगा। कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों पर पैर बनाए गए हैं तो वही रावण अपनी शाही पोशाक में दिखाई देगा।
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