वाराणसी में भोजपुरी स्टार पवन सिंह पर ठगी और धमकी का मुकदमा- कोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में FIR दर्ज।

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता और गायक पवन सिंह, जिन्हें 'पावर स्टार' के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। वाराणसी

Aug 20, 2025 - 14:39
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वाराणसी में भोजपुरी स्टार पवन सिंह पर ठगी और धमकी का मुकदमा- कोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में FIR दर्ज।
वाराणसी में भोजपुरी स्टार पवन सिंह पर ठगी और धमकी का मुकदमा- कोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में FIR दर्ज।

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता और गायक पवन सिंह, जिन्हें 'पावर स्टार' के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। वाराणसी की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) की अदालत ने 13 अगस्त 2025 को पवन सिंह और तीन अन्य लोगों के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। यह मामला 2018 में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म 'बॉस' से जुड़ा है, जिसमें वाराणसी के एक होटल व्यवसायी विशाल सिंह ने 1.57 करोड़ रुपये का निवेश किया था। विशाल सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें निवेश के बदले न तो मुनाफा दिया गया और न ही निर्माता का श्रेय, और जब उन्होंने अपने पैसे मांगे, तो पवन सिंह ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

यह खबर न केवल भोजपुरी सिनेमा जगत में हलचल मचा रही है, बल्कि यह भी सवाल उठा रही है कि क्या मशहूर हस्तियां कानून से ऊपर हैं। मामले की शुरुआत 2017 में हुई, जब विशाल सिंह की मुलाकात मुंबई में फिल्म निर्देशक प्रेमशंकर राय और उनकी पत्नी सीमा राय से हुई। दोनों ने खुद को फिल्म निर्माण से जुड़ा बताया और विशाल को भोजपुरी फिल्म 'बॉस' में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। विशाल सिंह के वकील, अशोक सिंह और राहुल द्विवेदी के अनुसार, प्रेमशंकर और सीमा ने विशाल को आकर्षक मुनाफे और फिल्म में निर्माता का श्रेय देने का वादा किया। विश्वास में आकर विशाल ने 2017 में पवन सिंह से वाराणसी में उनके कार्यालय में मुलाकात की, जहां पवन सिंह ने भी उन्हें निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। विशाल ने अपनी और अपने भाई की कंपनी, सनशाइन होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, के जरिए विभिन्न खातों में 32.60 लाख रुपये जमा किए। जुलाई 2018 में उन्हें फिल्म का निर्माता घोषित किया गया और 50% मुनाफे का वादा किया गया। इसके बाद, उन्होंने 1.25 करोड़ रुपये और निवेश किए, जिससे कुल निवेश 1.57 करोड़ रुपये हो गया।

फिल्म 'बॉस' 2018 में रिलीज हुई, लेकिन विशाल सिंह को न तो कोई मुनाफा मिला और न ही निर्माता का श्रेय। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा। विशाल ने आरोप लगाया कि पवन सिंह ने उन्हें फोन पर धमकी दी और कहा कि अगर वह पैसे मांगना बंद नहीं करेंगे, तो उनकी जान को खतरा होगा। डर और निराशा के बीच, विशाल ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मजबूर होकर, उन्होंने धारा 173(4) भर्तीया नगरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत वाराणसी की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) की अदालत में अर्जी दाखिल की। इस अर्जी की सुनवाई के बाद, 13 अगस्त 2025 को अदालत ने कैंट थाने को पवन सिंह, प्रेमशंकर राय, सीमा राय, और उनकी कंपनी श्रेयस फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद, कैंट थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज, बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड, और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। कैंट थाने के प्रभारी निरीक्षक राजेश पांडेय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में विशाल सिंह के दावों की पुष्टि के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने प्रेमशंकर राय और सीमा राय से भी पूछताछ शुरू की है, जो मुंबई में रहते हैं। पवन सिंह से अभी तक औपचारिक पूछताछ नहीं हुई है, क्योंकि वह फिलहाल वाराणसी में नहीं हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है।

विशाल सिंह ने अपने बयान में कहा, "मैंने पवन सिंह और उनकी टीम पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने मेरे साथ धोखा किया। मेरे परिवार की मेहनत की कमाई डूब गई, और जब मैंने अपने हक की बात की, तो मुझे धमकियां मिलीं। मैं चाहता हूं कि कोर्ट और पुलिस इस मामले में सख्त कार्रवाई करें ताकि कोई और इस तरह की ठगी का शिकार न हो।" उनके वकील अशोक सिंह ने कहा कि यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी का है, बल्कि यह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में पारदर्शिता की कमी को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, "कई लोग मशहूर हस्तियों के नाम पर भरोसा करके निवेश करते हैं, लेकिन उन्हें धोखा मिलता है।

यह मामला उदाहरण है कि कैसे बड़े नामों का दुरुपयोग किया जाता है।" पवन सिंह ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह जल्द ही अपने वकीलों के माध्यम से जवाब देंगे। कुछ सूत्रों ने दावा किया कि पवन सिंह का इस मामले में सीधा संबंध नहीं है, और यह प्रेमशंकर राय और उनकी कंपनी की गलती हो सकती है। हालांकि, कोर्ट के आदेश और विशाल सिंह के आरोपों ने पवन सिंह की छवि पर सवाल उठाए हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ प्रशंसकों ने इसे साजिश करार दिया, जबकि अन्य ने कहा कि अगर आरोप सही हैं, तो पवन सिंह को जवाब देना चाहिए।

यह पहली बार नहीं है जब पवन सिंह विवादों में घिरे हैं। 2021 में, उन्होंने लखनऊ के गोमती नगर थाने में अपने प्रतिद्वंद्वियों महेश पांडेय और सुमित द्विवेदी के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने अपनी छवि खराब करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, 2024 में पटना में एक महिला यूट्यूबर ने उनके खिलाफ हत्या की धमकी देने की शिकायत दर्ज की थी। ये घटनाएं पवन सिंह की छवि को बार-बार विवादों से जोड़ती हैं। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में निवेश और पारदर्शिता को लेकर यह मामला एक बड़ा सवाल उठाता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि भोजपुरी सिनेमा में छोटे निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बड़े सितारों के नाम का उपयोग आम है, लेकिन पारदर्शी अनुबंध और लेखा-जोखा की कमी के कारण ऐसी समस्याएं पैदा होती हैं। वाराणसी के वकील और सामाजिक कार्यकर्ता रमेश यादव ने कहा, "भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले पहले भी सामने आए हैं। इस मामले में कोर्ट का आदेश एक सख्त संदेश है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।"

इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा शुरू कर दी है। कुछ स्थानीय नेताओं ने इस घटना को भोजपुरी सिनेमा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का मौका माना है। वाराणसी के एक स्थानीय भाजपा नेता ने कहा, "पवन सिंह एक बड़े सितारे हैं, और उनकी छवि का असर उत्तर प्रदेश की जनता पर पड़ता है। अगर आरोप सही हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।" वहीं, समाजवादी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने इसे भोजपुरी इंडस्ट्री की अनियमितताओं का उदाहरण बताया और जांच की मांग की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अगले कुछ दिनों में और जानकारी सामने आ सकती है।

प्रेमशंकर राय और सीमा राय से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि निवेश की राशि का क्या हुआ और पवन सिंह की इसमें कितनी भूमिका थी। विशाल सिंह ने दावा किया है कि उनके पास बैंक लेनदेन और बातचीत के कुछ सबूत हैं, जो जांच में पेश किए जाएंगे। कोर्ट ने पुलिस को 60 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। इस मामले ने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के प्रशंसकों और निवेशकों में भी बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग पवन सिंह का समर्थन कर रहे हैं, उनका कहना है कि वह एक कलाकार हैं और इस तरह के विवाद उनकी छवि खराब करने की साजिश हो सकते हैं। वहीं, कुछ लोग विशाल सिंह के पक्ष में हैं और कहते हैं कि छोटे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी को रोका जाना चाहिए।

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