बिहार चुनाव से पहले चिराग पासवान का एलान- मेरी राजनीति का आधार जाति नहीं, बिहार और बिहारी पहले

यह बयान 30 सितंबर 2025 को आया, जब चिराग पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव के एक बयान का जवाब दिया। तेजस्वी ने हाल ही में अत्यंत पिछड़े वर्ग (ईबीसी) के एक का

Oct 1, 2025 - 13:36
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बिहार चुनाव से पहले चिराग पासवान का एलान- मेरी राजनीति का आधार जाति नहीं, बिहार और बिहारी पहले
बिहार चुनाव से पहले चिराग पासवान का एलान- मेरी राजनीति का आधार जाति नहीं, बिहार और बिहारी पहले

बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, जो जाति की राजनीति को पीछे छोड़ने की दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी राजनीति का आधार जाति या समुदाय नहीं, बल्कि बिहार और बिहारियों का विकास है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले यह बयान विपक्षी नेता तेजस्वी यादव पर सीधा हमला भी है। पासवान ने तेजस्वी को जातिवादी मानसिकता का धनी बताते हुए कहा कि ऐसी सोच ही बिहार को बर्बाद कर रही है। यह बयान न केवल एनडीए के भीतर एकजुटता का संदेश देता है, बल्कि विपक्ष पर दबाव बनाने का प्रयास भी है। बिहार में जहां जाति आधारित वोट बैंक की राजनीति हावी रही है, वहां पासवान का यह नया विजन राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

यह बयान 30 सितंबर 2025 को आया, जब चिराग पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव के एक बयान का जवाब दिया। तेजस्वी ने हाल ही में अत्यंत पिछड़े वर्ग (ईबीसी) के एक कार्यक्रम में कहा था कि एनडीए ईबीसी को वोट बैंक मानता है, जबकि वे पावर बैंक हैं। बिहार सरकार के जाति सर्वेक्षण के अनुसार ईबीसी आबादी का 36 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। तेजस्वी ने यह भी कहा कि अगर इंडिया गठबंधन सत्ता में आया तो ईबीसी के लिए अत्याचार निवारण कानून बनाया जाएगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पासवान ने कहा कि उनके लिए बिहार के सभी 14 करोड़ लोग एक हैं। उन्होंने कहा, मेरी राजनीति का आधार जाति नहीं है। मैं सभी को बिहारी मानता हूं। बिहार पहले, बिहारी पहले। विपक्ष की यह जातिवादी सोच ही बिहार को नुकसान पहुंचा रही है। पासवान ने तेजस्वी को 21वीं सदी का नेता बताने पर तंज कसा कि वे तो लोगों को जातियों में बांट रहे हैं।

चिराग पासवान का यह बयान उनके पुराने नारे बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट से जुड़ा हुआ है। 2020 में जब उन्होंने अपनी पार्टी को अलग कर चुनाव लड़ा था, तब भी उन्होंने इसी नारे को अपनाया था। उस समय लोक जनशक्ति पार्टी ने 243 में से 135 सीटों पर अकेले लड़ाई लड़ी, लेकिन एक भी सीट नहीं जीती। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के हिस्से के रूप में पांच सीटें जीतकर उन्होंने अपनी वापसी की। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में पासवान अपनी पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जाति से ऊपर उठकर विकास और एकजुटता का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये भेजकर वास्तविक कल्याण किया है, जबकि विपक्ष केवल वादे करता रहता है। पासवान ने तेजस्वी के नकलची सरकार वाले बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष घबरा गया है और चुनाव से पहले राजनीतिक खेल खेल रहा है। आरजेडी की यह रणनीति वोटों के लिए जाति को हथियार बनाने की है।

बिहार चुनाव 2025 की पृष्ठभूमि में यह बयान और महत्वपूर्ण हो जाता है। चुनाव की तारीखें अभी घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन सभी दल पूरी ताकत लगा रहे हैं। एनडीए में भाजपा, जदयू, एलजेपी (आरवी) और हम जैसे दल शामिल हैं। सीट बंटवारे पर चर्चा चल रही है, जिसमें जदयू को 102-103, भाजपा को 101-102 और पासवान की पार्टी को 25-28 सीटें मिल सकती हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए का चेहरा बनाए रखने का फैसला हो चुका है। पासवान ने नीतीश का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नीतीश एनडीए का मजबूत स्तंभ हैं। विपक्षी महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल हैं। तेजस्वी यादव इसका चेहरा हैं। वे युवाओं को नौकरियां, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घेर रहे हैं। लेकिन पासवान का कहना है कि तेजस्वी की जाति आधारित राजनीति बिहार को पीछे धकेल रही है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद और उनके बेटे ने 15 साल की सरकार में जाति सर्वेक्षण तक नहीं कराया, अब वोट के लिए याद आ रहा है।

चिराग पासवान का राजनीतिक सफर भी रोचक रहा है। वे राम विलास पासवान के बेटे हैं, जो दलित नेता के रूप में प्रसिद्ध थे। 2020 में चाचा पशुपति कुमार पारस ने पार्टी पर कब्जा कर लिया था, जिससे चिराग को अलग होना पड़ा। उन्होंने नई पार्टी बनाई और अकेले लड़े। अब वे केंद्रीय मंत्री हैं और बिहार पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2030 के चुनाव में वे विधानसभा में उतरेंगे। पासवान ने जाति सर्वेक्षण का समर्थन किया है, लेकिन जाति राजनीति का विरोध। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है, लेकिन वोट बैंक के लिए नहीं। वे महिलाओं और युवाओं के लिए एमवाई फॉर्मूला पर जोर दे रहे हैं। पासवान ने प्राशांत किशोर को अपना दोस्त बताया, जिनकी जातिविहीन समाज की विचारधारा से सहमत हैं।

तेजस्वी यादव पर पासवान का यह हमला चुनावी माहौल को गर्म कर रहा है। तेजस्वी ने पहले भी पासवान को भाजपा का पिट्ठू कहा था। जुलाई 2025 में जब तेजस्वी ने विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर चुनाव बहिष्कार की बात कही, तो पासवान ने चुनौती दी कि हिम्मत हो तो बहिष्कार करो। उन्होंने कहा कि आरजेडी अकेले लड़ने की हिम्मत नहीं रखती। पासवान ने याद दिलाया कि 2020 में उन्होंने अकेले लड़ा, जबकि आरजेडी गठबंधन में थी। यह टकराव दलित और पिछड़े वोटों पर केंद्रित है। पासवान पांच प्रतिशत पासवान समुदाय के प्रतिनिधि हैं, जबकि तेजस्वी 14 प्रतिशत यादवों के। ईबीसी का वोट दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

एनडीए की रणनीति में पासवान को युवा दलित चेहरा बनाया जा रहा है, ताकि तेजस्वी के प्रभाव को रोका जा सके। भाजपा नेता ने कहा कि पासवान की आक्रामकता से जदयू में असहजता है, लेकिन भाजपा संतुलन बनाए रख रही है। विपक्ष का मानना है कि एनडीए में दरारें हैं। आरजेडी ने कहा कि पासवान नीतीश के वोट बैंक को चुराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पासवान ने कहा कि उनका उद्देश्य एनडीए को मजबूत बनाना है। उन्होंने लोकसभा चुनाव का जिक्र किया, जहां बिहार में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया।

यह बयान बिहार की राजनीति को नई बहस दे रहा है। जाति सर्वेक्षण के बाद सभी दल सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी जाति डेटा को जनगणना में शामिल करने का फैसला लिया, जिसका पासवान और नीतीश ने स्वागत किया। तेजस्वी ने इसे अपनी जीत बताया। लेकिन पासवान का जोर विकास पर है। उन्होंने बिहार फर्स्ट विजन डॉक्यूमेंट का जिक्र किया, जिसमें राज्य के हर समस्या का समाधान है। वे बुनियादी ढांचे, रोजगार और कानून व्यवस्था पर फोकस कर रहे हैं। पासवान ने कहा कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है, जैसे सीएए पर किया था।

बिहार के युवा और महिलाएं इन मुद्दों पर नजर रख रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में जाति अभी भी प्रभावी है, लेकिन शहरीकरण से विकास के मुद्दे उभर रहे हैं। पासवान का बयान एनडीए को एकजुट करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि एनडीए 225 सीटें जीतेगा। विपक्ष की हार तय है। तेजस्वी ने पलटवार में कहा कि पासवान भाजपा के इशारे पर नाच रहे हैं। लेकिन पासवान ने कहा कि वे दबाव की राजनीति में विश्वास नहीं करते।

यह घटना बिहार चुनाव को रोचक बना रही है। पासवान का यह एलान जाति की बेड़ियां तोड़ने का संदेश देता है। लेकिन क्या बिहार की राजनीति वाकई जाति से ऊपर उठ पाएगी? समय बताएगा। फिलहाल, दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बिहार के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह बहस विकास पर केंद्रित रहे। पासवान का बयान एक सबक है कि राजनीति में एकजुटता और विकास ही असली ताकत हैं। उम्मीद है कि चुनाव शांतिपूर्ण होंगे और बिहार प्रगति की राह पर चलेगा।

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