Deoband News: 1993 में हुए बम धमाके के दोषी हिजबुल मुजाहिदीन के कथित आतंकी नजीर अहमद वाणी को सबूतों के अभावों में दोष मुक्त

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1993 में देवबंद के यूनियन तिराहे पर हुए बम धमाके में दो पुलिसकर्मियों सहित आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। पुलिस ने मुकद...

Jun 10, 2025 - 23:33
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Deoband News: 1993 में हुए बम धमाके के दोषी हिजबुल मुजाहिदीन के कथित आतंकी नजीर अहमद वाणी को सबूतों के अभावों में दोष मुक्त
Photo: Social Media

सार-

  • 31 वर्ष चली मामले की सुनवाई में पुलिस अभियुक्त के खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत नही कर पाई
  • वानी को हिजबुल आतंकी बताते हुए उसे गिरफ्तार करने पर पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए मीडिया में खूब वाहवाही लूटी थी

By INA News Deoband.

देवबंद: एसीजेएम परविंदर सिंह की अदालत ने देवबंद में 1993 में हुए बम धमाके के दोषी हिजबुल मुजाहिदीन के कथित आतंकी नजीर अहमद वाणी को सबूतों के अभावों में दोष मुक्त कर दिया। देवबंद एसीजेएम अदालत में 31 वर्ष चली मामले की सुनवाई में पुलिस अभियुक्त के खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत नही कर पाई। जिसका लाभ अभियुक्त को देते हुए अदालत ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1993 में देवबंद के यूनियन तिराहे पर हुए बम धमाके में दो पुलिसकर्मियों सहित आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। पुलिस ने मुकदमा संख्या 265 1994 में कश्मीर के बडगांम जिला निवासी नजीर अहमद वानी को दोषी बताते हुए धारा 467,468 व 471 में मुकदमा दर्ज करते हुए अभियुक्त को गिरफतार कर जेल भेज दिया था। जेल जाने के कुछ समय बाद ही वानी को न्यायालय से जमानत मिल गई थी। बीते कई वर्षों से वह न्यायालय में पेशी पर नही आ रहा था।

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जिस पर नवम्बर 2024 में एसीजेएम न्यायालय से उसके गैर जमानती वारंट जारी हो गए थे। न्यायालय की सख्ती के बाद पुलिस व एटीएस ने कार्रवाई करते हुए वानी को कश्मीर से गिरफ्तार किया था। वानी को हिजबुल आतंकी बताते हुए उसे गिरफ्तार करने पर पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए मीडिया में खूब वाहवाही लूटी थी। हालांकि जनवरी 2025 में वानी को दोबारा जमानत मिल गई थी। बीते 33 वर्षों में देवबंद एसीजेएम अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान पुलिस अभियुक्त को दोषी सिद्ध करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नही कर सकी। मंगलवार को एसीजेएम अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए सबूतों के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।

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