Sambhal : उपनगरी सरायतरीन में स्थित मदरसा फ़ैज़ उल उलूम में वार्षिक जलसा
कार्यक्रम का समापन सलात-ओ-सलाम और मुल्क में अमन-चैन की दुआ के साथ हुआ। जलसे को अध्यक्षता मुफ्ती मुहम्मद महबूब मिस्बाही ने की तथा संचालन मौलाना ज़ैग़म र
Report : उवैस दानिश, सम्भल
तहफ्फुज-ए-इस्लाम' कॉन्फ्रेंस एवं दस्तारबंदी का आयोजन पूरी शान-ओ-शौकत और दीनी जज्बे के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, उलेमा-ए-किराम और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
कार्यक्रम को शुरुआत तिलावत क़ुरान से हुई उसके बाद हम्द और नात पढ़ी गईं जिससे लोग मंत्रमुग्ध हो गए। मशहूर नातख्वा मौलाना ग़ुलाम नबी फ़ैज़ी ने ख़ूबसूरत नात ए रसूल पढ़ी।
कॉन्फ्रेंस के मुख्य वक्ता मुफ्ती मोहम्मद आकिल मिस्बाही ने इस्लाम में इल्म (शिक्षा) की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कुरान की आयतों और हदीस-ए-पाक के हवाले से बताया कि:
* इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज है।
* कुरान की पहली आयत ही 'इक़रा' (पढ़ो) से शुरू हुई, जो शिक्षा के महत्व को दर्शाती है।
* सच्चा इल्म वही है जो इंसान को अपने रब की पहचान कराए और समाज में मानवता का संदेश दे।
विशिष्ट अतिथि मौलाना तौसीफ मिस्बाही ने मदरसों की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि मदरसा शिक्षा न केवल दीन की हिफाजत करती है, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण में भी अहम योगदान देती है। उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जीवन और उनकी पवित्र शिक्षाओं का जिक्र करते हुए उपस्थित लोगों को सुन्नत के रास्ते पर चलने की ताकीद की।
जलसे का मुख्य आकर्षण उन छात्रों की 'दस्तारबंदी' (पगड़ी बांधना) रही, जिन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। उलेमाओं के हाथों छात्रों के सिर पर दस्तार सजाई गई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की गई।
कार्यक्रम का समापन सलात-ओ-सलाम और मुल्क में अमन-चैन की दुआ के साथ हुआ। जलसे को अध्यक्षता मुफ्ती मुहम्मद महबूब मिस्बाही ने की तथा संचालन मौलाना ज़ैग़म रज़ा बरकाती ने किया। इस मौके पर मुख्य रूप से मदरसा प्रबंधक कलीम अशरफ सलामी, हाजी नूर इलाही, मौलाना कामिल मिस्बाही, मौलाना अब्बास अजमली, मौलाना अज़ीमुर रहमान, मौलाना फ़हीम, कारी आरिफ मूसापुरी, कारी अकबर, मौलाना आदिल मिस्बाही, मौलाना शोकत, मौलाना आलिम, कारी इश्त्याक, हाजी ताहिर सलामी, शराफ़त हुसैन, मोहम्मद ज़ीशान, हाजी मर्ग़ूब, मुहम्मद आलम, बिलाल, मेहदी हसन, इरफ़ान, अज़ीम, रहबर, तालिब आदि के अलावा सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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