Sambhal : गरीबी की परिभाषा बदलकर आंकड़ों का खेल: बजट 2026 पर जियाउर्रहमान बर्क का सरकार पर तीखा हमला

बर्क ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि मौजूदा मानकों के अनुसार शहरी क्षेत्र में रू.1,944 प्रतिमाह और ग्रामीण क्षेत्र में रू.1,632 प्रतिमाह आय वाले व्यक्ति को गरीब नहीं माना जा

Feb 1, 2026 - 22:15
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Sambhal : गरीबी की परिभाषा बदलकर आंकड़ों का खेल: बजट 2026 पर जियाउर्रहमान बर्क का सरकार पर तीखा हमला
जियाउर्रहमान बर्क की फेसबुक पोस्ट

Report : उवैस दानिश, सम्भल

बजट भाषण 2026 में वित्त मंत्री द्वारा 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने के दावे पर सियासी बहस तेज हो गई है। सम्भल सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि सरकार गरीबी घटाने के बजाय उसकी परिभाषा बदलकर आंकड़ों का जादू दिखा रही है।

बर्क ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि मौजूदा मानकों के अनुसार शहरी क्षेत्र में रू.1,944 प्रतिमाह और ग्रामीण क्षेत्र में रू.1,632 प्रतिमाह आय वाले व्यक्ति को गरीब नहीं माना जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम आय में जीवन यापन करने वाला व्यक्ति कैसे गैर-गरीब हो सकता है? उन्होंने कहा, जब गरीब की परिभाषा ही इतनी नीचे तय कर दी जाए, तो आंकड़ों में गरीबी अपने आप कम दिखने लगती है। यह गरीबी का खत्म होना नहीं, बल्कि गरीबों को कागज़ों से गायब करना है। जियाउर्रहमान बर्क ने आरोप लगाया कि सरकार जनता को सच्चाई बताने के बजाय संख्याओं के जरिए भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने बजट को “सिर्फ आंकड़ों का बजट” करार देते हुए कहा कि इसमें गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, अल्पसंख्यकों और आम आदमी के लिए कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि यह बजट जमीनी हकीकत से कटा हुआ है और इससे देश के कमजोर तबकों में निराशा बढ़ी है।

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