Deoband : किसानों, गरीबों और युवाओं के लिए यूनियन बजट में कुछ नहीं- भगत सिंह वर्मा
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट घुमाकर कॉर्पोरेट घरानों को मजबूत करने वाला है। अगर देश की 80 प्रतिशत आबादी खेती और ग्रामीण इलाकों में रहती है तो बजट का कम से कम 25 प्रतिश
देवबंद। भारतीय किसान यूनियन (वर्मा) और पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा पेश यूनियन बजट को किसान, गरीब और युवा विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए पूरी तरह निराशाजनक है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि देश की करीब 80 प्रतिशत आबादी अब भी खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है लेकिन बजट में गांव, किसान और खेती के लिए सिर्फ नाममात्र के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान देश भारत तब तक आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो सकता जब तक किसानों की खरीदने की क्षमता नहीं बढ़ाई जाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट घुमाकर कॉर्पोरेट घरानों को मजबूत करने वाला है। अगर देश की 80 प्रतिशत आबादी खेती और ग्रामीण इलाकों में रहती है तो बजट का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा किसानों और ग्रामीण विकास के लिए होना चाहिए था। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार चाहती तो मनरेगा जैसी योजनाओं के जरिए किसानों को मजदूर उपलब्ध करा सकती थी जिससे खेती को सहारा मिलता। इसके अलावा उन्होंने महंगी शिक्षा और चिकित्सा को मुफ्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गांवों में छोटे उद्योग लगाकर गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देना चाहिए था लेकिन बजट में इस ओर कोई ठोस कदम नहीं दिखता। अंत में भगत सिंह वर्मा ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट भ्रष्टाचार बढ़ाने और कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाला है जबकि किसान, गरीब और युवा पूरी तरह नजरअंदाज किए गए हैं।
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