Hardoi : बरम्हौला के गरीबी और सरकारी सिस्टम की लापरवाही मार झेल रहे बेघर बेदू को मिली मीडिया से मदद, डीएम ने लिया संज्ञान, गलत रिपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई का मिला आश्वासन

वेद प्रकाश का घर कच्चा था, जो पीढ़ियों से चला आ रहा था। इस साल की तेज बारिश ने उसे मलबे में बदल दिया। सिर्फ एक दीवार बची, जो अब खतरे का संकेत दे रही

Dec 15, 2025 - 00:16
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Hardoi : बरम्हौला के गरीबी और सरकारी सिस्टम की लापरवाही मार झेल रहे बेघर बेदू को मिली मीडिया से मदद, डीएम ने लिया संज्ञान, गलत रिपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई का मिला आश्वासन
प्रतीकात्मक चित्र; Hardoi : बरम्हौला के गरीबी और सरकारी सिस्टम की लापरवाही मार झेल रहे बेघर बेदू को मिली मीडिया से मदद, डीएम ने लिया संज्ञान, गलत रिपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई का मिला आश्वासन

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हरदोई जिले के बरम्हौला गांव में वेद प्रकाश उर्फ बेदू नामक गरीब व्यक्ति की जिंदगी गरीबी और सरकारी लापरवाही की मार झेल रही है। उनका छोटा परिवार पत्नी और एक छोटी बेटी को बारिश ने बेघर कर दिया। ऊपर से सरकारी आवास योजना में फर्जी दस्तावेजों से धोखा मिला। लेकिन मीडिया की खबर के बाद प्रशासन ने सुध ली और परिवार को आश्वासन दिया।

वेद प्रकाश का घर कच्चा था, जो पीढ़ियों से चला आ रहा था। इस साल की तेज बारिश ने उसे मलबे में बदल दिया। सिर्फ एक दीवार बची, जो अब खतरे का संकेत दे रही है। परिवार के पास न तो पैसे थे, न कोई सहारा। मजबूरी में वे अपनी भाभी के घर की दहलीज पर गुजारा करने लगे। बेदू रोज दिहाड़ी मजदूरी करता है, लेकिन अब दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बेटी की पढ़ाई और परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया। बेदू कहते हैं, "बाबू, आज कमाई न हुई तो कल बेटी भूखी सोएगी।" बेदू ने दैवीय आपदा के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन किया। अधिकारी गांव आए, टूटे घर और गरीबी देखी। उन्होंने कहा, "चिंता मत करो, घर बनेगा।" बेदू को उम्मीद बंधी। वे ठंड के मौसम में भी दफ्तर जाते, मुख्यमंत्री को पत्र लिखते। लेकिन जब फाइल खोली गई, तो झटका लगा। रिपोर्ट में लिखा था कि उनका घर पक्का है और वे योजना के हकदार नहीं। असल में, अधिकारियों ने उनके मृतक बड़े भाई के घर की तस्वीर लगा दी, जो भाभी का था। इससे आवेदन खारिज हो गया। बेदू के पैरों तले जमीन खिसक गई। पत्नी रो पड़ी, बेटी डर गई।

यह धोखा किसी जनप्रतिनिधि के इशारे पर हुआ। बेदू ने कई जगह गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई न हुई। आखिरकार, वे मीडिया के पास पहुंचे। एक पत्रकार ने उनकी दर्द भरी कहानी छापी। खबर में गरीबी, फर्जी रिपोर्ट और परिवार की बेबसी का जिक्र था। खबर फैलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया। उसी शाम नायब तहसीलदार और लेखपाल गांव पहुंचे। जमीनी हालात देखकर अधिकारियों का चेहरा पीला पड़ गया। उन्होंने फर्जी रिपोर्ट बनाने वालों को फोन किया और सवाल उठाए। परिवार को कंबल देकर सांत्वना दी। कहा, "तुम्हारी तकलीफ समझ आ रही है। अब दफ्तरों के चक्कर न लगाओ। तुम्हें जरूर घर मिलेगा। गलत रिपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई होगी।" बेदू की आंखों में आंसू थे, लेकिन अब कृतज्ञता के।

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