Hardoi News : जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा के मुख्य आतिथ्य में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर संगोष्ठी, राष्ट्रहित में उनके योगदान को किया गया याद
संगोष्ठी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रहित में किए गए अविस्मरणीय योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में डॉ. मुखर्जी ..
By INA News Hardoi.
हरदोई : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रख्यात शिक्षाविद्, चिंतक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर मल्लावां विकास खंड सभागार में स्मृति दिवस पखवाड़े के अंतर्गत एक मंडल संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर संगोष्ठी की शुरुआत की।
संगोष्ठी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रहित में किए गए अविस्मरणीय योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में डॉ. मुखर्जी का नाम एक ऐसी शख्सियत के रूप में दर्ज है, जिनके लिए देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि थी। उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देते हुए "एक देश, एक विधान, एक निशान" के सिद्धांत के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनके बलिदान और विचारों ने भारतीय जनता पार्टी की नींव को मजबूत किया, जिसके आधार पर पार्टी आज देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनी है।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए धारा 370 और परमिट राज के खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाया। उनके इस संघर्ष का परिणाम आज देखने को मिल रहा है, जब धारा 370 को हटाकर कश्मीर को पूर्ण रूप से भारत के साथ जोड़ा गया है। उनके विचार आज भी कार्यकर्ताओं और देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष अजीत कश्यप, रामदास, मंडल महामंत्री वीरेंद्र मिश्रा, पूर्व मंडल अध्यक्ष रत्नेश कुमार सहित कई भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने डॉ. मुखर्जी के विचारों को आत्मसात करने और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी के रूप में उभरी। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की तुष्टिकरण नीतियों का विरोध किया और जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए आंदोलन चलाया। उनके नेतृत्व में जनसंघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ मिलकर हिंदू सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने का काम किया। कश्मीर में "दो विधान, दो निशान, दो प्रधान" के खिलाफ उनका आंदोलन ऐतिहासिक रहा, जिसके लिए उन्हें जेल में डाल दिया गया और 1953 में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। उनके बलिदान ने देश में राष्ट्रवादी विचारधारा को नई दिशा दी।
यह संगोष्ठी 23 जून से 6 जुलाई तक चलने वाले स्मृति दिवस पखवाड़े का हिस्सा थी, जिसमें भाजपा पूरे देश में डॉ. मुखर्जी के योगदान को याद कर रही है। इस दौरान बूथ स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें वृक्षारोपण और कार्यकर्ता बैठकों का आयोजन शामिल है।
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