Hardoi News: हरदोई में मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स को झटका: उच्च न्यायालय के आदेश के बाद संदीप सिंह को मिलेगा 3.02 लाख का भुगतान

यह मामला वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के तहत दर्ज वाद संख्या पी.डब्ल्यू. 02/2023 से संबंधित है, जिसमें संदीप सिंह ने मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के खिलाफ बकाया वेतन और क्षतिपूर्ति की मांग ...

By INA News Desk
May 7, 2025 - 00:32
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Hardoi News: हरदोई में मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स को झटका: उच्च न्यायालय के आदेश के बाद संदीप सिंह को मिलेगा 3.02 लाख का भुगतान
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वेतन भुगतान अधिनियम के तहत सहायक श्रमायुक्त का अल्टीमेटम, 22 जून तक अपील की सूचना न देने पर होगी कार्रवाई

By INA News Hardoi.

हरदोई: वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के तहत एक महत्वपूर्ण मामले में सहायक श्रमायुक्त सत्यबीर सिंह ने मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स, हरदोई को कड़ा निर्देश जारी किया है। इस मामले में वादी संदीप सिंह को बकाया वेतन और क्षतिपूर्ति के रूप में 3,02,000 रुपये की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ ने भी इस आदेश को बरकरार रखते हुए प्रतिवादी पक्ष की अपील को खारिज कर दिया। अब सहायक श्रमायुक्त ने मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के मालिक शेखर गुप्ता को 22 जून 2025 तक किसी नई अपील या वाद की सूचना देने का अंतिम मौका दिया है, अन्यथा संदीप सिंह को उक्त राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

यह मामला वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के तहत दर्ज वाद संख्या पी.डब्ल्यू. 02/2023 से संबंधित है, जिसमें संदीप सिंह ने मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के खिलाफ बकाया वेतन और क्षतिपूर्ति की मांग की थी। सहायक श्रमायुक्त, हरदोई ने अपने प्रारंभिक आदेश में प्रतिवादी पक्ष मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स को संदीप सिंह को 3,02,000 रुपये (वेतन और क्षतिपूर्ति सहित) का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

इस आदेश के खिलाफ मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के मालिक शेखर गुप्ता ने उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ में रिट याचिका संख्या 44/2024 दायर की। उच्च न्यायालय ने 30 जून 2023 को अपने आदेश में सहायक श्रमायुक्त के फैसले को सही ठहराते हुए संदीप सिंह को 3,02,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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शेखर गुप्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए एक और अपील (रिट संख्या सी-2452/2025) दायर की, लेकिन उच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2025 को उनकी अपील को खारिज कर दिया और भुगतान के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद, संदीप सिंह ने 27 मार्च 2025 को सहायक श्रमायुक्त के समक्ष एक प्रार्थनापत्र दायर कर भुगतान की मांग दोहराई।

सहायक श्रमायुक्त सत्यबीर सिंह ने मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के मालिक शेखर गुप्ता (पता: रफी अहमद किदवई स्कूल चौराहा, हरदोई) को स्पष्ट निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा कि यदि शेखर गुप्ता ने उच्च न्यायालय के 20 मार्च 2025 के आदेश के खिलाफ किसी सक्षम न्यायालय में अपील या वाद दायर किया है, तो इसकी सूचना 22 जून 2025 तक सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और वेतन भुगतान अधिनियम के प्राधिकारी को देना अनिवार्य है।

यदि निर्धारित तिथि तक कोई सूचना नहीं दी जाती, तो संदीप सिंह को 3,02,000 रुपये की राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। इस स्थिति में भुगतान न करने की सारी जिम्मेदारी शेखर गुप्ता और मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स की होगी। सहायक श्रमायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भुगतान वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा, जो श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है।

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वेतन भुगतान अधिनियम 1936 भारत में श्रमिकों के वेतन से संबंधित अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों को उनका बकाया वेतन समय पर मिले और किसी भी तरह के शोषण से उनकी रक्षा हो। इस मामले में सहायक श्रमायुक्त ने अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करते हुए संदीप सिंह के हक में फैसला सुनाया।

उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ ने इस मामले में दो बार संदीप सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया। पहली बार 30 जून 2023 को रिट याचिका 44/2024 में और दूसरी बार 20 मार्च 2025 को रिट संख्या सी-2452/2025 में। दोनों ही बार न्यायालय ने मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स की दलीलों को खारिज करते हुए सहायक श्रमायुक्त के भुगतान आदेश को सही ठहराया। यह फैसला श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और नियोक्ताओं की जवाबदेही को रेखांकित करता है।

यह मामला हरदोई और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में श्रमिकों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स जैसे ठेकेदारों के लिए यह एक सबक है कि श्रमिकों के वेतन में देरी या अनदेखी कानूनी रूप से गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। साथ ही, यह मामला वेतन भुगतान अधिनियम 1936 की प्रभावशीलता को दर्शाता है, जो श्रमिकों को उनके हक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संदीप सिंह जैसे श्रमिकों के लिए यह फैसला न केवल आर्थिक राहत लेकर आया है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून उनके साथ है। सहायक श्रमायुक्त के अल्टीमेटम से यह स्पष्ट है कि अगर शेखर गुप्ता ने समय पर अपील की सूचना नहीं दी, तो संदीप सिंह को उनका हक मिलना तय है।

शेखर गुप्ता, जो एक राजकीय ठेकेदार हैं और मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के मालिक हैं, अब दबाव में हैं। उनके पास 22 जून 2025 तक का समय है कि वे उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ किसी नई अपील या वाद की जानकारी दें। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें 3,02,000 रुपये का भुगतान करना होगा, और इसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि शेखर गुप्ता इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।

संदीप सिंह ने 27 मार्च 2025 को सहायक श्रमायुक्त के समक्ष प्रार्थनापत्र दायर कर भुगतान की मांग की थी। उनका कहना है कि मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स ने उनके साथ वेतन भुगतान को लेकर अनुचित व्यवहार किया, जिसके कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब उनके पक्ष में मजबूत कानूनी आधार है, और वे अपने हक की राशि प्राप्त करने के लिए आशान्वित हैं।

हरदोई में संदीप सिंह और मेसर्स लक्ष्मी बिल्डर्स के बीच चल रहा यह वेतन विवाद अब अपने अंतिम चरण में है। सहायक श्रमायुक्त सत्यबीर सिंह ने शेखर गुप्ता को 22 जून 2025 तक का अंतिम मौका दिया है कि वे किसी नई अपील की सूचना दें, अन्यथा 3,02,000 रुपये का भुगतान संदीप सिंह को कर दिया जाएगा। उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ के लगातार दो फैसलों ने इस मामले में संदीप सिंह के पक्ष को मजबूत किया है।

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