Hardoi : गर्भवती महिलाओं के लिए अब छह जांचें होंगी अनिवार्य, परिवार कल्याण महानिदेशक ने जारी किए निर्देश
नई व्यवस्था के अनुसार, गर्भवती महिलाओं की छह जरूरी जांचों का समय तय कर दिया गया है। पहली जांच गर्भावस्था के रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद (12 हफ्ते के अंदर) होगी। दूसरी जांच 16 से 20 हफ्ते के बीच, तीसरी जांच 24 से 28 हफ्ते के बीच, चौथी जांच 28 से 32 ह
उत्तर प्रदेश सरकार ने मां और बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी प्रसव पूर्व जांचों की संख्या चार से बढ़ाकर छह कर दी गई है। परिवार कल्याण महानिदेशक डॉक्टर एच.डी. अग्रवाल ने इस संबंध में सभी जिलों को जरूरी दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर भवनाथ पांडेय ने बताया कि इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशानियों की समय पर पहचान करना और मां-बच्चे की मृत्यु दर को कम करना है। जांच बढ़ने से खून की कमी, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और उनका सही इलाज हो सकेगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, गर्भवती महिलाओं की छह जरूरी जांचों का समय तय कर दिया गया है। पहली जांच गर्भावस्था के रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद (12 हफ्ते के अंदर) होगी। दूसरी जांच 16 से 20 हफ्ते के बीच, तीसरी जांच 24 से 28 हफ्ते के बीच, चौथी जांच 28 से 32 हफ्ते के बीच, पांचवीं जांच 32 से 36 हफ्ते के बीच और छठी जांच 36 से 40 हफ्ते के बीच की जाएगी।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉक्टर अरविंद सचान ने बताया कि इन अतिरिक्त जांचों से आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं से संपर्क बनाए रखने का ज्यादा मौका मिलेगा। इस दौरान महिलाओं को अच्छे खान-पान, आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां खाने, टीका लगवाने और अस्पताल में ही प्रसव कराने के फायदों के बारे में समझाया जाएगा। जिले में हर महीने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष जांच शिविर लगाए जाते हैं। पिछले सत्र के दौरान इस अभियान के तहत हजारों गर्भवती महिलाओं की जांच की गई और जोखिम वाले मामलों की पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज की सुविधा दी गई।
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