Hardoi : हरदोई भाजपा में फोटोशूट से सुलझे मतभेद? श्याम प्रकाश का व्यंग्यात्मक टिप्पणी ने बढ़ाई अटकलें
पार्टी के स्थानीय स्तर पर सक्रिय सदस्यों और पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह फोटोशूट हाल ही में पिहानी ब्लॉक प्रमुख पद को लेकर हुए विवाद के बाद कराया गया। पिहानी ब्लॉक प्रमुख का चुनाव एक बड़ा राज
हरदोई : उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक राजनीति एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिला अध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन द्वारा आयोजित एक फोटोशूट सेशन ने न केवल पार्टी के नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सतही एकता का संदेश दिया, बल्कि गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक श्याम प्रकाश के एक व्यंग्यात्मक कमेंट ने इसे और गहरा मोड़ दे दिया। यह घटना पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी, महत्वाकांक्षाओं और विभिन्न नेताओं के संरक्षणदाताओं के बीच खींचतानी को उजागर करती है। जहां एक ओर यह प्रयास संगठन को मजबूत करने का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत दे रहा है कि हरदोई भाजपा में सब कुछ उतना सहज नहीं है जितना दिखाया जा रहा है।
पार्टी के स्थानीय स्तर पर सक्रिय सदस्यों और पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह फोटोशूट हाल ही में पिहानी ब्लॉक प्रमुख पद को लेकर हुए विवाद के बाद कराया गया। पिहानी ब्लॉक प्रमुख का चुनाव एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था, जहां दो प्रमुख दावेदारों मनोज सिंह और कुशी बाजपेई के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिली। कुशी बाजपेई, जो वर्तमान ब्लॉक प्रमुख हैं, को पूर्व सांसद और भाजपा के प्रभावशाली नेता अशोक बाजपेई तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी के खेमे का मजबूत समर्थन प्राप्त है। वहीं, मनोज सिंह को प्रदेश सहकारिता राज्य मंत्री जेपीएस राठौर का करीबी माना जाता है, और उनकी दावेदारी भी काफी मजबूत थी। चुनाव परिणामों के बाद मनोज सिंह को टिकट न मिलने से नाराजगी पैदा हो गई, जो पार्टी के स्थानीय हलकों में खुलकर व्यक्त हुई। ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव के दरमियान राजनितिक गलियारों में यह चर्चा रही थी कि पहले चुनावी दावेदारों की लिस्ट में नाम मनोज सिंह का था लेकिन कुछ ही समय में मनोज सिंह का नाम काटकर कुशी बाजपेई का नाम सामने आ गया, यह मुद्दा भी जिले की राजनीति में काफी चर्चित रहा था।
ऐसे में जिला अध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने एक अनोखी पहल की। उन्होंने दोनों नेताओं को एक साथ बुलाकर फोटोशूट सेशन आयोजित किया, जिसमें 'पार्टी एक परिवार है' का नारा जोर-शोर से गूंजा। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में मनोज सिंह और कुशी बाजपेई एक-दूसरे के साथ मुस्कुराते नजर आ रहे हैं, जो बाहर से तो एकता का प्रतीक लगता है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मिलन 'अधूरा' है क्योंकि विचारधाराओं, संरक्षणदाताओं और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के टकराव को पूरी तरह सुलझाने के बजाय केवल सतही तौर पर छिपाने का प्रयास किया गया। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "फोटो तो अच्छी लग रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर मतभेद जस के तस हैं। थोड़े दिनों बाद फिर वही पुरानी कहानी शुरू हो जाएगी।"
यह फोटोशूट अजीत सिंह बब्बन की फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया गया, जिसने जल्द ही सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। हजारों व्यूज और लाइक्स के साथ-साथ कमेंट्स की बाढ़ आ गई। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचा गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश के कमेंट ने। उन्होंने लिखा: "नरेश जी की राजनीति के रास्ते पर सांप-बिच्छू सब एक साथ?" यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से व्यंग्यात्मक थी, जिसमें पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर चुटकी ली गई। श्याम प्रकाश, जो हरदोई की स्थानीय राजनीति में अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं, अक्सर सोशल मीडिया पर विवादास्पद बयानों से सुर्खियां बटोरते रहते हैं। इस कमेंट को लेकर पार्टी के विभिन्न धड़ों में बहस छिड़ गई। कुछ ने इसे हास्यपूर्ण बताया, तो कुछ ने इसे आंतरिक कलह का संकेत माना।
हरदोई भाजपा की पृष्ठभूमि को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना जरूरी है। अजीत सिंह बब्बन को मार्च 2025 में दोबारा जिला अध्यक्ष बनाया गया था, जो 17 दावेदारों के बीच एक कड़ा मुकाबला था। प्रदेश नेतृत्व ने उनकी वफादारी और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी। बब्बन, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं, ने पिछले एक साल में कई प्रयास किए हैं पार्टी को एकजुट करने के। लेकिन जिले की राजनीति में विभिन्न खेमों जैसे अशोक बाजपेई-रजनी तिवारी गुट, जेपीएस राठौर गुट और स्थानीय विधायकों के प्रभाव क्षेत्र की वजह से चुनौतियां बनी हुई हैं। पिहानी ब्लॉक प्रमुख चुनाव इसी का एक उदाहरण है। यहां कुशी बाजपेई की जीत को बाजपेई-तिवारी खेमे की नैतिक विजय माना गया, जबकि मनोज सिंह के समर्थक इसे अन्याय करार दे रहे हैं।
फोटोशूट के बाद पार्टी के बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही। कुछ ने इसे सराहनीय प्रयास कहा, जो संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। प्रदेश स्तर पर भी इसकी चर्चा हुई, जहां इसे आंतरिक मतभेदों को सुलझाने का सकारात्मक उदाहरण बताया गया। लेकिन श्याम प्रकाश का कमेंट इस प्रयास पर एक सवालिया निशान लगा गया। विधायक प्रकाश, जो गोपामऊ से 2022 में विधायक चुने गए, अपनी ही पार्टी के फैसलों पर अक्सर खुलकर बोलते हैं। अगस्त 2025 में उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर विवादित टिप्पणी की थी, जिससे ब्राह्मण समुदाय में नाराजगी फैल गई थी। इस बार भी उनका कमेंट पार्टी के भीतर असंतोष को दर्शाता प्रतीत हो रहा है। क्या यह नरेश अग्रवाल (पूर्व राज्यसभा सांसद) की पुरानी राजनीतिक शैली पर कटाक्ष है, जहां गुटबाजी को साधने के लिए असंगत गठजोड़ किए जाते थे? या फिर यह हरदोई की स्थानीय कलह का आईना?
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक एकता पर जोर दिया जा रहा है। हरदोई जैसे जिलों में, जहां विधानसभा सीटें भाजपा के पास हैं लेकिन ब्लॉक स्तर पर प्रतिस्पर्धा तीव्र है, ऐसे प्रयास जरूरी हो जाते हैं। अजीत सिंह बब्बन ने हाल ही में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कई बैठकें कीं, जिनमें सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर और अन्य नेताओं ने भाग लिया। इन बैठकों में फोटोशूट जैसी पहल को पार्टी की 'परिवारिक' छवि मजबूत करने का माध्यम बताया गया। लेकिन आलोचकों का कहना है कि असली समस्याएं जैसे टिकट वितरण में पारदर्शिता की कमी और खेमों के बीच विश्वास का अभाव अभी बरकरार हैं।
पिहानी ब्लॉक का मामला विशेष रूप से जटिल रहा। कुशी बाजपेई, एक युवा और लोकप्रिय नेता, ने अपनी सक्रियता से स्थानीय मुद्दों पर पकड़ बनाई है। उनके समर्थन में अशोक बाजपेई का प्रभाव स्पष्ट था, जो मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद हैं। बाजपेई परिवार का हरदोई राजनीति में लंबा इतिहास रहा है, और रजनी तिवारी की भूमिका ने इसे और मजबूत किया। दूसरी ओर, मनोज सिंह की दावेदारी जेपीएस राठौर के सहयोग से मजबूत हुई। राठौर, जो सहकारिता विभाग संभालते हैं, ने हाल ही में हरदोई में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। चुनाव हारने के बाद के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की, जो फोटोशूट के बाद भी शांत नहीं हुई।
श्याम प्रकाश का कमेंट इस पूरे घटनाक्रम को एक नया आयाम दे रहा है। गोपामऊ क्षेत्र, जो हरदोई जिले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा। यहां विधायक प्रकाश का प्रभाव मजबूत है, लेकिन उनकी बयानबाजी अक्सर विवादों को न्योता देती है। इस कमेंट को पार्टी के वरिष्ठ नेता भी नजरअंदाज नहीं कर पा रहे। एक सीनियर कार्यकर्ता ने कहा, "यह सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि एक संदेश है। सांप-बिच्छू का जिक्र पार्टी के भीतर के जहर को इंगित करता है।" सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल हो गई, और विपक्षी दलों ने इसे हथियार बनाना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इसे भाजपा की 'नकली एकता' का प्रतीक बताया।
फिर भी, अजीत सिंह बब्बन का प्रयास पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने पार्टी को परिवार बताते हुए कई ऐसे आयोजन किए हैं, जो मतभेदों को कम करने में मददगार साबित हुए। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2025 में उनके स्वागत समारोह में एक पुलिसकर्मी के नारे लगाने पर विवाद हुआ था, लेकिन बब्बन ने इसे शांतिपूर्ण तरीके से संभाला। इसी तरह, अक्टूबर 2025 में स्नातक चुनावों को लेकर संगठनात्मक बैठकें आयोजित की गईं, जहां विभिन्न गुटों को एक मंच पर लाया गया। प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने भी हरदोई में बैठकें कीं, जो एकता पर जोर देती रहीं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या फोटोशूट जैसे प्रयास लंबे समय तक टिक पाएंगे? हरदोई की राजनीति में जातिगत समीकरण ब्राह्मण, क्षत्रिय, ओबीसी और दलित भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अजीत सिंह बब्बन, क्षत्रिय समुदाय से आते हैं, और उनकी नियुक्ति को संतुलन का प्रयास माना गया। लेकिन ब्लॉक स्तर पर टिकट वितरण में अगर असंतोष बरकरार रहा, तो यह एकता की दीवार कमजोर हो सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षक राकेश तिवारी कहते हैं, "फोटोशूट अच्छा है, लेकिन असली परीक्षा तो आगामी चुनावों में होगी। अगर जमीनी मुद्दों पर सहमति नहीं बनी, तो यह सब दिखावा साबित होगा।"
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