यदि सरकार अविमुक्तेश्वरानंद के साथ साजिश करती तो बटुक दर दर की ठोकर ना खाते - रीना एन सिंह
लोगों को बटुकों की पीड़ा नहीं दिख रही है। रीना एन सिंह ने कहा कि पास्को के मामले में पीड़ित के कानूनी और संवैधानिक अधिकार के तहत उनकी पहचान गुप्त रखी जाती है और परोपकार के
बटुकों के पैरोकार आशुतोष ब्रह्मचारी की सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता का बयान
नई दिल्ली। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के ऊपर स्पेशल पास्को कोर्ट के द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के आदेश के बाद सियासत गर्म हो गई है समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दल इसे सरकार के द्वारा शंकराचार्य के खिलाफ साजिश बता रहे हैं वही शंकराचार्य के ऊपर आरोप लगाने वाले बटुकों के पैरोकार आशुतोष ब्रह्मचारी की सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने कई टीवी चैनलों पर आकर यह बात स्पष्ट की कि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने यदि मुकदमा दर्ज कर लिया होता तो न्यायालय जाने की आवश्यकता ना पड़ती।
उन्होंने कहा कि घटना 18 जनवरी 2026 की है इसके बाद झूसी थाने में प्रार्थना पत्र दिया गया, पुलिस कमिश्नर को प्रार्थना पत्र दिया गया सरकार के माध्यम से कहीं पर भी कार्रवाई न होने पर निराश होकर बटुक न्यायालय की शरण में आए और न्यायालय ने साक्ष्य को देखते हुए प्रथम दृष्टया मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।इतनी परेशानी झेलने के बावजूद यह आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार कोई साजिश कर रही है।
लोगों को बटुकों की पीड़ा नहीं दिख रही है। रीना एन सिंह ने कहा कि पास्को के मामले में पीड़ित के कानूनी और संवैधानिक अधिकार के तहत उनकी पहचान गुप्त रखी जाती है और परोपकार के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के कहने पर यह होता तो कोर्ट जाने की आवश्यकता ही ना पड़ती। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह घटना एक तरह का अपराध है और इसकी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए इसे राजनीति और धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
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