Lucknow : यूजीसी के नए नियमों से सामाजिक न्याय पर चोट, देशभर में विरोध तेज
विरोध अब राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा दे दिया। लखनऊ के कुम्हरावा मंडल के भाजपा महामंत्री अंकि
15 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम-2026' को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ये नियम उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए हैं लेकिन सवर्ण समाज इन्हें असमानता बढ़ाने वाला बता रहा है। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सवर्ण समाज का कहना है कि ये नियम उनके खिलाफ शिकायतों का दुरुपयोग होने का खतरा पैदा करते हैं। कोई भी एससी, एसटी या ओबीसी छात्र या कर्मचारी शिकायत दर्ज करा सकता है, जिससे सवर्णों को अपनी सफाई में समय बर्बाद करना पड़ सकता है। वे इसे सवर्णों को अलग-थलग करने की कोशिश मानते हैं। विश्वविद्यालयों में पहले से ओबीसी को एडमिशन में आरक्षण 1990 से और फैकल्टी नियुक्तियों में 2010 से मिल रहा है। नए नियमों से और दबाव बढ़ने का आरोप है।
विरोध अब राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा दे दिया। लखनऊ के कुम्हरावा मंडल के भाजपा महामंत्री अंकित शुक्ला समेत 11 कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर सरकार पर आरोप लगाए। रायबरेली में भाजपा किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने इस्तीफा दिया और नियमों को घातक तथा विभाजनकारी बताया। लखनऊ के माल विकासखंड की अटारी गांव की प्रधान और भाजपा नेत्री रानी संयोगिता सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये नियम शिक्षा को बोझ बनाते हैं और छात्रों के सपनों पर पहरा लगाते हैं। उन्होंने वापसी की मांग की तथा शिक्षा में स्वायत्तता और अवसरों की बात कही।
उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में भी भाजपा के कई जमीनी कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। कुछ ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखे तो कुछ ने इस्तीफे दिए। सवर्ण समाज ने यूनिवर्सिटी स्तर पर फोरम बनाए हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं की नाराजगी का डर सरकार को है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले पेपर लीक से युवा नाराज हुए थे जिसका असर पड़ा था।
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