Lucknow News: राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन संघर्ष प्रेरणा का स्रोत -जयवीर सिंह
पर्यटन मंत्री अपने शासकीय आवास 02 एम0एन0आर विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ में भारतेन्दु नाट्य अकादमी द्वारा प्रदेश के 75 जनपदों में आयोजित किए जाने वाले राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवनवृत्त प....
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रदेश के समस्त जनपदों में आयोजित किए जाने वाले राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवनवृत्त पर आधारित कार्यशाला का पोस्टर जारी किया
By INA News Lucknow.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय इतिहास में राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का अहम योगदान है। वह मालवा क्षेत्र की शासक थी। उनका शासन दूरदृष्टि और न्यायप्रियता के लिए विख्यात था। उनका राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक तथा धार्मिक योगदान अविस्मरणीय है। उनकी दृष्टि व्यापक थी।
उन्होंने निष्पक्ष रूप से देवालयों, सांस्कृतिक प्रतीकों का जीर्णोद्धार तथा नवनिर्माण कराया। उन्होंने पूरे भारत में सैकड़ों मंदिरों, धर्मशालाओं को पुनर्जीवन दिया। इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर का भी पुनर्निमाण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
पर्यटन मंत्री अपने शासकीय आवास 02 एम0एन0आर विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ में भारतेन्दु नाट्य अकादमी द्वारा प्रदेश के 75 जनपदों में आयोजित किए जाने वाले राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवनवृत्त पर आधारित कार्यशाला का पोस्टर जारी करने के अवसर पर विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की एकता तथा धर्म की रक्षा एवं लोक कल्याण के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जाना जाता है।
जयवीर सिंह ने कहा कि उ0प्र0 के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2025-26 के बजट में उनके नाम पर श्रमजीवी महिला हॉस्टल योजना संचालित करने की घोषणा की। श्रमजीवी महिलाओं के लिए वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर और झांसी में महिला हॉस्टल स्थापित किए जाएंगे।
तत्कालीन राजनीति में राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का महत्वपूर्ण का योगदान था। उन्होंने मंदिरों एवं धार्मिक प्रतीकों की रक्षा करने का साहस दिखाया। उन्हें महिला शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का भारतीय इतिहास में दिये गए योगदान को हर समय स्मरण किया जाएगा। भारतीय परंपरा में नारी सशक्तिकरण के लिए उठाए गए उनके कदम साहसिक थे। उनके योगदान से नई पीढ़ी को जोड़कर देश निर्माण के लिए भूमिका निर्धारित करना हम सबका दायित्व है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धजंलि होगी।
उन्होंने कहा कि समस्त जनपदों में उनके जीवनवृत्त पर आधारित कार्यशाला निश्चित रूप से जनमानस एवं युवा पीढ़ी के लिए जागरूकता उत्पन्न करने का कार्य करेगी।इस अवसर पर अपर निदेशक संस्कृति डा0 सृष्टि धवन, भारतेन्दु नाट्य अकादमी के निदेशक विपिन्न कुमार, प्रशिक्षक डॉ सुमित वास्तव के अलावा अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
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