Lucknow : नॉन हाइब्रिड धान कुटाई पर चावल मिलों को 1 प्रतिशत रिकवरी छूट, 15 लाख किसानों को लाभ

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने लोकभवन स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में कुछ चावल मिलें

Nov 4, 2025 - 23:54
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Lucknow : नॉन हाइब्रिड धान कुटाई पर चावल मिलों को 1 प्रतिशत रिकवरी छूट, 15 लाख किसानों को लाभ
Lucknow : नॉन हाइब्रिड धान कुटाई पर चावल मिलों को 1 प्रतिशत रिकवरी छूट, 15 लाख किसानों को लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार ने चावल मिल उद्योग को बढ़ावा देने और नॉन हाइब्रिड धान की कुटाई को प्रोत्साहित करने के लिए रिकवरी प्रतिशत में 1 प्रतिशत की छूट दी है। इससे चावल मिलें सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदे गए नॉन हाइब्रिड धान की कुटाई करने के लिए प्रोत्साहित होंगी तथा मिलों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। चावल मिल उद्योग को नई ताकत मिलेगी तथा उद्योग लगाने वाले उद्यमियों का विश्वास बढ़ेगा। इससे चावल मिलों में काम करने वाले लगभग 2 लाख लोगों के रोजगार को मजबूती मिलेगी तथा इससे जुड़े अनुमानित 13 से 15 लाख किसान लाभान्वित होंगे। नॉन हाइब्रिड धान की कुटाई में रिकवरी प्रतिशत की छूट के बराबर धनराशि की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार अपने बजट से इस वर्ष से करेगी, जिसके लिए अनुमानित 166.51 करोड़ रुपये का खर्च आंका गया है।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने लोकभवन स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में कुछ चावल मिलें नॉन हाइब्रिड धान की कम रिकवरी प्रतिशत के कारण सरकारी धान की कुटाई में रुचि नहीं लेती थीं। मिलों के पास पर्याप्त पूंजी न होने से वे अपनी मशीनों को समय पर आधुनिक नहीं बना पाती थीं। अब छूट की प्रतिपूर्ति से मिलने वाली धनराशि से वे अपनी क्षमता बढ़ा सकेंगी, जिससे प्रदेश में धान कुटाई की अतिरिक्त क्षमता बनेगी। राइस मिलर्स धान खरीद प्रक्रिया की रीढ़ हैं तथा इनमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। मिलों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है। पिछले वर्षों में चावल मिल उद्योग की संख्या में हर साल कमी आ रही थी, जिसका मुख्य कारण धान कुटाई में कम रिकवरी प्रतिशत था। राइस मिलर्स द्वारा 67 प्रतिशत मानक का चावल तैयार कर भारतीय खाद्य निगम को देने से उन्हें आर्थिक नुकसान होता था।

सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि पूरे देश में धान से चावल बनाने के लिए 67 प्रतिशत रिकवरी निर्धारित है। जब यह समस्या बताई गई कि हाइब्रिड धान की कुटाई में ब्रोकन राइस का प्रतिशत ज्यादा होने से रिकवरी कम होती है तो सरकार ने 2018-19 से चावल मिलर्स को कुटाई में 3 प्रतिशत रिकवरी की प्रतिपूर्ति अपने बजट से शुरू की। पिछले वर्ष इस मद में लगभग 94.79 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की गई। इस वर्ष नॉन हाइब्रिड धान में भी अपेक्षित रिकवरी न मिलने की जानकारी दी गई, जिससे मिलों के अस्तित्व पर संकट आ सकता था। इसलिए चावल मिलों को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष से नॉन हाइब्रिड धान की कुटाई में भी 1 प्रतिशत रिकवरी छूट के बराबर धनराशि की प्रतिपूर्ति राज्य बजट से की जाएगी, जिसमें लगभग 166.51 करोड़ रुपये का व्यय होगा।

प्रदेश में सीएमआर की अग्रिम लॉट के सापेक्ष धान देने का प्रावधान है, इसलिए चावल मिलें जल्द सीएमआर का समर्पण भारतीय खाद्य निगम को कर धान प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहेंगी। इससे जून तक समर्पित होने वाले सीएमआर का अप्रैल तक ही केंद्रीय पूल में शत प्रतिशत समर्पण होने की संभावना बढ़ेगी। रिकवरी प्रतिशत में छूट से कुटाई में मिलों की प्रतिस्पर्धा बढ़ने से किसानों द्वारा लाए गए किसी भी प्रकार के धान को सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदा जा सकेगा। किसानों को हाइब्रिड धान के अलावा अन्य प्रजातियों की फसल लगाने का प्रोत्साहन मिलेगा। इससे धान की देशी प्रजातियों की बुआई को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रों पर खरीद बढ़ने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए भारतीय खाद्य निगम को अन्य राज्यों से चावल की रैक नहीं मंगानी पड़ेगी, जिससे केंद्र सरकार की रैकों पर होने वाले व्यय में बचत होगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित 4000 धान खरीद केंद्रों के सापेक्ष अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में 1244 केंद्र तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में 2856 केंद्र, कुल 4100 खरीद केंद्र संचालित हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर से तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर से खरीद शुरू हो चुकी है। सभी जिलों के खरीद केंद्रों पर खरीद संबंधी सभी व्यवस्थाएं तथा किसानों की सुविधाओं की पूर्ण तैयारी है। प्रदेश में अब तक 2,53,339 किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीकरण कराया है। पिछले वर्ष अब तक 0.58 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जबकि इस वर्ष अब तक 1.41 लाख मीट्रिक टन धान खरीद लिया गया है, जो 2.5 गुना अधिक है।

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