Mussoorie : मसूरी की सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा, युवाओं ने उठाई आवाज़, 'द इकोज़ ऑफ लंढौरः ए रेज़ोनेंट लॉन्गिंग' पुस्तक का हुआ विमोचन

इस तरह की साहित्यिक कोशिशें समाज को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। पुस्तक द इकोज़ ऑफ लंढौरः ए रेज़ोनेंट लॉन्गिंग की हर कविता एक प्रतिध्वनित होता है कि मसूरी के लोग ही इसकी धरोहर के

Sep 5, 2025 - 17:28
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Mussoorie : मसूरी की सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा, युवाओं ने उठाई आवाज़, 'द इकोज़ ऑफ लंढौरः ए रेज़ोनेंट लॉन्गिंग' पुस्तक का हुआ विमोचन
मसूरी की सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा, युवाओं ने उठाई आवाज़, 'द इकोज़ ऑफ लंढौरः ए रेज़ोनेंट लॉन्गिंग' पुस्तक का हुआ विमोचन

रिपोर्ट : सुनील सोनकर

पहाड़ों की रानी कही जाने वाली मसूरी आज लगातार हो रहे अवैध निर्माण, बढ़ते प्रदूषण और बेतरतीब विकास के कारण अपनी असली पहचान खोती जा रही है। इसी चिंता को स्वर देने के लिए जुड़वा युवा लेखक राज और राघव बिजलवान ने अपनी चौथी पुस्तक द इकोज़ ऑफ लंढौर, ए रेज़ोनेंट लॉन्गिंग में मसूरी के बदलते स्वरूप को कविता के माध्यम से सामने लाया है। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीरा सकलानी ने इ पुस्तक का विमोचन किया और दोनों युवा लेखकों को इस संवेदनशील विषय पर रचनात्मक काम करने के लिए शुभकामनाएं दीं। विमोचन के अवसर पर राज और राघव विजसवान ने कहा कि अगर हमें मसूरी को बचाना है और इसे पहाड़ों की रानी बनाए रखना है, तो हमें सबको मिलकर काम करना होगा।खासकर स्थानीय नागरिकों को। साथ ही सरकार और प्रशासन को भी मसूरी के भविष्य को लेकर गंभीर होना पड़ेगा। लेखकों की कविताएँ केवल सुंदरता का बखान नहीं करतीं, बल्कि यह बताती हैं कि कैसे एक ऐतिहासिक और नैसर्गिक शहर आज लालच, अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरणीय उपेक्षा का शिकार बन रहा है। मीरा सकलानी ने अपने संबोधन में कहा कि राज और राघव जैसे युवाओं ने छोटी सी उम्र में मसूरी जैसे शहर की वास्तविक समस्याओं को अपनी कविताओं में बहुत गहराई से उतारा है। इनकी सोच और प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अवैध निर्माण को लेकर सजग है और समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर पालिका की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।इस अवसर पर मसूरी के वरिष्ठ लेखक गणेश षैली, रिटायर्ड आईजी मनोरंजन त्रिपाठी, पूर्व पालिका अध्यक्ष ओ.पी. उनियाल, और मनमोहन सिंह माल ने भी लेखकों की प्रशंसा की और कहा कि मसूरी की असली सुंदरता को बचाने की यह मुहिम सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी है।राज और राघव बिजलवान युवा लेखक मसूरी

इस तरह की साहित्यिक कोशिशें समाज को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। पुस्तक द इकोज़ ऑफ लंढौरः ए रेज़ोनेंट लॉन्गिंग की हर कविता एक प्रतिध्वनित होता है कि मसूरी के लोग ही इसकी धरोहर के संरक्षक है और हमारी जिम्मेदारी है कि हम मसूरी की सास्कृतिक धरोहर को आने वाले पीढिंयों के लिये सुरक्षित रखें। हम सब को मसूरी के स्थापत्य कला, इसकी परंपराओं और इसकी पा्रकृतिक सुंदरता को बचाने के लिये मिलकर कार्य करना होगा।हम सब को मसूरी की खोई हुई गरिमा को पुनर्जीवित करना होगा, इसे पुनः उसकी भव्यता तक पहुचाना होगा और अपने व अवपे बच्चों के उज्ज्वल भविशय का निर्माण करना होगा।मीरा सकलानी पालिकाध्यक्ष मसूरी

यह आयोजन न सिर्फ एक साहित्यिक उपलब्धि था, बल्कि एक सामाजिक चेतना का संदेश भी। ऐसे समय में जब मसूरी की पहचान खोने का खतरा मंडरा रहा है, दो युवा लेखकों ने अपनी कविताओं से यह सिद्ध किया है कि शब्दों की शक्ति से भी बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

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