Operation Sindoor के नन्हे हीरो श्रवण सिंह- भारतीय सेना ने उठाई शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी, फिरोजपुर में सम्मानित। 

Punjab News: पंजाब के फिरोजपुर जिले के तारा वाली गांव में रहने वाले 10 साल के श्रवण सिंह ने अपनी बहादुरी और देशभक्ति से पूरे देश का दिल जीत लिया है...

Jul 21, 2025 - 17:30
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Operation Sindoor के नन्हे हीरो श्रवण सिंह- भारतीय सेना ने उठाई शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी, फिरोजपुर में सम्मानित। 
Operation Sindoor के नन्हे हीरो श्रवण सिंह- भारतीय सेना ने उठाई शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी, फिरोजपुर में सम्मानित। 

Punjab News: पंजाब के फिरोजपुर जिले के तारा वाली गांव में रहने वाले 10 साल के श्रवण सिंह ने अपनी बहादुरी और देशभक्ति से पूरे देश का दिल जीत लिया है। Operation Sindoor के दौरान, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर था, इस नन्हे बच्चे ने भारतीय सेना के जवानों की मदद के लिए जो हिम्मत दिखाई, वह हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई। श्रवण ने बिना किसी डर के सैनिकों को पानी, चाय, दूध, लस्सी और बर्फ जैसी जरूरी चीजें पहुंचाईं। उनकी इस नन्ही उम्र में दिखाई गई हिम्मत और समर्पण को देखते हुए भारतीय सेना ने उन्हें एक खास तोहफा दिया है। सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने श्रवण की पूरी शिक्षा का खर्च उठाने का फैसला किया है। शनिवार, 19 जुलाई 2025 को फिरोजपुर कैंटोनमेंट में एक विशेष समारोह में वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने श्रवण को सम्मानित किया।

  • Operation Sindoor: एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई

Operation Sindoor भारतीय सशस्त्र बलों की एक ऐसी सैन्य कार्रवाई थी, जिसने देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत इरादों को दुनिया के सामने रखा। यह ऑपरेशन 6-7 मई 2025 की रात को शुरू हुआ, जो 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में 26 मासूम लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने Operation Sindoor के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने नौ ठिकानों पर 24 सटीक हमले किए, जो केवल 25 मिनट में पूरे हुए।

इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने सीमा पर जवाबी गोलीबारी शुरू की, जिसके कारण पंजाब के फिरोजपुर और आसपास के गांवों में तनाव बढ़ गया। तारा वाली गांव, जो भारत-पाकिस्तान सीमा से महज 2 किलोमीटर दूर है, इस तनाव का केंद्र बन गया। यहीं पर 10 साल के श्रवण सिंह ने अपनी बहादुरी से सभी का ध्यान खींचा।

  • श्रवण सिंह की बहादुरी

श्रवण सिंह, जो तारा वाली गांव में अपने किसान पिता सोना सिंह के साथ रहता है, कक्षा 4 का छात्र है। जब Operation Sindoor के दौरान सीमा पर गोलीबारी शुरू हुई, तब गांव में तैनात सैनिकों को भोजन और पानी की जरूरत पड़ी। इस तनावपूर्ण माहौल में, जहां बड़ों का डरना स्वाभाविक था, श्रवण ने बिना किसी डर के सैनिकों की मदद करने का फैसला किया। उसने अपने घर से पानी, बर्फ, चाय, दूध और लस्सी जैसी चीजें सैनिकों तक पहुंचाईं।

श्रवण ने यह काम बिना किसी के कहे, अपनी मर्जी से किया। उसका कहना था, “मुझे डर नहीं लगा। मैं बड़ा होकर फौजी बनना चाहता हूं और देश की सेवा करना चाहता हूं।” उसके पिता सोना सिंह ने बताया कि सैनिकों को भी श्रवण की यह हिम्मत बहुत पसंद आई। सैनिकों ने उसे प्यार से “नन्हा हीरो” कहा और उसकी तारीफ की। श्रवण की इस हिम्मत ने न केवल उसके गांव, बल्कि पूरे देश में उसकी कहानी को मशहूर कर दिया।

  • भारतीय सेना का खास तोहफा

श्रवण की इस बहादुरी और देशभक्ति को देखते हुए भारतीय सेना ने उसे सम्मानित करने का फैसला किया। सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने घोषणा की कि वह श्रवण की पूरी शिक्षा का खर्च उठाएगी, ताकि आर्थिक तंगी उसकी पढ़ाई में बाधा न बन सके। यह फैसला न केवल श्रवण के लिए, बल्कि उसके परिवार और पूरे गांव के लिए गर्व की बात थी।

19 जुलाई 2025 को फिरोजपुर कैंटोनमेंट में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने श्रवण को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने श्रवण की हिम्मत की तारीफ की और कहा, “श्रवण जैसे नन्हे हीरो देश के असली रत्न हैं। भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि देश की अगली पीढ़ी को संवारने की जिम्मेदारी भी निभाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि सेना श्रवण के हर कदम पर उसके साथ रहेगी और उसकी शिक्षा के लिए हर तरह की मदद करेगी।

इस समारोह में श्रवण के पिता सोना सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने सेना के इस कदम के लिए आभार जताया और कहा, “हमें अपने बेटे पर गर्व है। सेना का यह फैसला हमारे लिए बहुत बड़ी बात है।” समारोह में मौजूद सैनिकों और स्थानीय लोगों ने भी श्रवण की तारीफ की और उसे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • गोल्डन एरो डिवीजन

गोल्डन एरो डिवीजन, जो भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, ने श्रवण की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाकर एक मिसाल कायम की है। इस डिवीजन ने न केवल Operation Sindoor में अपनी सैन्य क्षमता दिखाई, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया। डिवीजन ने श्रवण की स्कूल फीस, किताबें, और अन्य शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने का वादा किया है, ताकि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सके और अपने सपने को पूरा कर सके।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने समारोह में कहा, “श्रवण की कहानी उन सभी नन्हे नायकों की कहानी है, जो चुपके से देश के लिए कुछ बड़ा करते हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम ऐसे बच्चों को हर संभव मदद दें।” इस पहल ने सेना और आम लोगों के बीच के मजबूत रिश्ते को और गहरा कर दिया।

श्रवण की इस कहानी ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं। कई समाचार चैनलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने उसकी तारीफ में पोस्ट साझा किए। एक यूजर ने X पर लिखा, “10 साल का श्रवण सिंह Operation Sindoor का सबसे छोटा योद्धा है। उसकी हिम्मत को सलाम!” एक अन्य यूजर ने लिखा, “सेना का यह कदम हर बच्चे को प्रेरित करेगा। श्रवण जैसे बच्चे देश का भविष्य हैं।” टीवी9 भारतवर्ष और आजतक जैसे समाचार चैनलों ने भी श्रवण की कहानी को अपने प्लेटफॉर्म पर साझा किया और उसे “नन्हा हीरो” करार दिया।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि श्रवण की कहानी देश के हर बच्चे को यह सिखाती है कि उम्र कोई मायने नहीं रखती, जब बात देश के लिए कुछ करने की हो। एक यूजर ने लिखा, “श्रवण ने दिखा दिया कि सच्ची देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती।” इन पोस्ट्स से साफ है कि श्रवण की कहानी ने न केवल पंजाब, बल्कि पूरे देश में लोगों को प्रेरित किया है।

  • श्रवण का सपना

श्रवण ने कई बार कहा है कि वह बड़ा होकर सेना में भर्ती होना चाहता है। उसका यह सपना न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। उसके पिता सोना सिंह ने बताया कि श्रवण हमेशा से सैनिकों की वर्दी और उनके काम से प्रभावित रहा है। Operation Sindoor के दौरान सैनिकों के साथ बिताया गया समय उसके लिए एक प्रेरणा बन गया।

सेना के इस फैसले से श्रवण को अपने सपने को पूरा करने का एक मजबूत आधार मिलेगा। उसकी शिक्षा का खर्च उठाकर सेना ने यह सुनिश्चित किया है कि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और भविष्य में देश की सेवा कर सके।

श्रवण सिंह की कहानी एक नन्हे बच्चे की हिम्मत और देशभक्ति की मिसाल है। Operation Sindoor जैसे तनावपूर्ण समय में, जब सीमा पर गोलीबारी हो रही थी, इस 10 साल के बच्चे ने बिना डर के सैनिकों की मदद की। उसकी इस बहादुरी को भारतीय सेना ने न केवल सम्मानित किया, बल्कि उसकी शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी भी उठाई। यह कदम सेना की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि अपने नागरिकों, खासकर अगली पीढ़ी के भविष्य को भी संवारती है।

श्रवण की कहानी हर उस बच्चे के लिए प्रेरणा है, जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से देश के लिए कुछ करना चाहता है। उसका यह जज्बा और सेना का यह कदम देशवासियों के लिए गर्व का विषय है। श्रवण जैसे नन्हे नायकों की वजह से ही भारत का भविष्य उज्ज्वल है।

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