पितृ पक्ष 2025: 7 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, जानें महत्व, तिथियां और नियम।

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह 15-16 दिनों की अवधि होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान करते हैं।

Aug 29, 2025 - 13:36
 0  275
पितृ पक्ष 2025: 7 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, जानें महत्व, तिथियां और नियम।
पितृ पक्ष 2025: 7 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, जानें महत्व, तिथियां और नियम।

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह 15-16 दिनों की अवधि होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस साल पितृ पक्ष रविवार, 7 सितंबर 2025 से शुरू होगा और रविवार, 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। इस अवधि में श्राद्ध के नियमों का पालन करना और सही तरीके से अनुष्ठान करना बहुत जरूरी है, ताकि पितर प्रसन्न हों और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिले।

पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से होती है, जो इस साल 7 सितंबर को रात 1:41 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 11:38 बजे समाप्त होगी। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करते हैं। अगर मृत्यु तिथि का पता नहीं हो, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है। यह दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन सभी पितरों को याद किया जाता है। 2025 में पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं: पूर्णिमा श्राद्ध- 7 सितंबर, रविवार; प्रतिपदा श्राद्ध- 8 सितंबर, सोमवार; द्वितीया श्राद्ध- 9 सितंबर, मंगलवार; तृतीया और चतुर्थी श्राद्ध- 10 सितंबर, बुधवार; पंचमी श्राद्ध और महा भरणी- 11 सितंबर, बृहस्पतिवार; षष्ठी श्राद्ध- 12 सितंबर, शुक्रवार; सप्तमी श्राद्ध- 13 सितंबर, शनिवार; अष्टमी श्राद्ध- 14 सितंबर, रविवार; नवमी श्राद्ध- 15 सितंबर, सोमवार; दशमी श्राद्ध- 16 सितंबर, मंगलवार; एकादशी श्राद्ध- 17 सितंबर, बुधवार; द्वादशी श्राद्ध- 18 सितंबर, बृहस्पतिवार; त्रयोदशी और मघा श्राद्ध- 19 सितंबर, शुक्रवार; चतुर्दशी श्राद्ध- 20 सितंबर, शनिवार; सर्वपितृ अमावस्या- 21 सितंबर, रविवार।

पितृ पक्ष का महत्व हिंदू धर्म में बहुत गहरा है। मान्यता है कि इस दौरान पितरों की आत्मा पितृ लोक से धरती पर आती है। श्राद्ध और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे परिवार को सुख, समृद्धि और संतान का आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक ग्रंथों, जैसे ब्रह्म पुराण और भागवद गीता, में कहा गया है कि पितरों को भोजन और जल अर्पित करने से उनकी आत्मा को मुक्ति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के समय जब कर्ण की आत्मा स्वर्ग पहुंची, तो उन्हें भोजन के बजाय सोना और चांदी खाने को दिया गया। कर्ण ने इसका कारण पूछा, तो इंद्र ने बताया कि उन्होंने जीवन में दूसरों को तो बहुत दान दिया, लेकिन अपने पितरों को भोजन नहीं दिया। इसके बाद कर्ण को धरती पर लौटकर पितृ पक्ष में दान करने का मौका दिया गया। इस कहानी से यह सिख मिलती है कि पितरों को भोजन और जल अर्पित करना कितना जरूरी है।

पितृ पक्ष के दौरान कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहले, श्राद्ध हमेशा उस तिथि पर करना चाहिए, जिस दिन पूर्वज की मृत्यु हुई थी। अगर तिथि नहीं पता, तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। अनुष्ठान सुबह के समय, स्नान के बाद करना चाहिए। घर को साफ रखना और सात्विक भोजन तैयार करना जरूरी है। श्राद्ध के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा की जाती है, क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है। पूजा में कुशा घास, काले तिल, जौ, चावल, शुद्ध जल और सफेद कपड़े का उपयोग होता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना भी अनुष्ठान का हिस्सा है। इसके अलावा, गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन देना शुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हें पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है। विशेष रूप से, कौवे का भोजन खाना अच्छा संकेत माना जाता है, क्योंकि वे यम के दूत कहे जाते हैं।

पितृ पक्ष में कुछ चीजों से बचना भी जरूरी है। इस दौरान मांसाहार, अंडा और शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित है। तामसिक भोजन, जैसे प्याज, लहसुन, बैंगन, मूली, आलू और सत्तू, नहीं खाना चाहिए। पान, सुपारी और तंबाकू का उपयोग भी नहीं करना चाहिए। बासी भोजन से बचना चाहिए, क्योंकि यह पितरों के लिए अशुद्ध माना जाता है। इस अवधि में कोई नया कार्य शुरू करना, जैसे शादी, गृह प्रवेश या नया वाहन खरीदना, अशुभ माना जाता है। बाल कटवाने या दाढ़ी बनवाने से भी बचना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पितृ दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है, जो तब होती है जब पूर्वजों को उचित अंतिम संस्कार या श्राद्ध नहीं मिलता या वे किसी कारण से असंतुष्ट रहते हैं। इस दोष के कारण व्यक्ति को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे आर्थिक परेशानी, स्वास्थ्य समस्याएं या संतान संबंधी कठिनाइयां। पितृ पक्ष में नारायण बली और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे विशेष अनुष्ठान करके इस दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। बिहार के गया में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। गया में किए गए अनुष्ठान से पितरों को मुक्ति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितृ पक्ष में दान का भी विशेष महत्व है। इस दौरान ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अनाज, तिल, फल और दक्षिणा दान करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। कुछ लोग इस दौरान गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन दान करते हैं, क्योंकि ये पितरों तक भोजन पहुंचाने का माध्यम माने जाते हैं। इसके अलावा, पितृ पक्ष में सात्विक जीवनशैली अपनाना चाहिए। स्वच्छता, संयम और श्रद्धा के साथ अनुष्ठान करने से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस साल पितृ पक्ष में दो विशेष खगोलीय घटनाएं भी होंगी। 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण और 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण होगा। इन ग्रहणों के दौरान सुतक काल का पालन करना जरूरी है, और इस समय श्राद्ध या तर्पण नहीं करना चाहिए। ग्रहण के बाद स्नान करके ही अनुष्ठान शुरू करने चाहिए। यह संयोग करीब 100 साल बाद हो रहा है, जिससे इस पितृ पक्ष का महत्व और बढ़ गया है।

पितृ पक्ष परिवार और पूर्वजों के बीच आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने का अवसर है। यह समय हमें अपनी जड़ों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका देता है। श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से हम न केवल अपने पितरों को सम्मान देते हैं, बल्कि अपने जीवन में शांति और समृद्धि भी लाते हैं। इस दौरान नियमों का पालन करना और सच्चे मन से अनुष्ठान करना बहुत जरूरी है। पितृ पक्ष हमें सिखाता है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं है, बल्कि यह जन्म और पुनर्जन्म के चक्र का हिस्सा है। अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और प्रेम के साथ किए गए कार्य न केवल उनकी आत्मा को शांति देते हैं, बल्कि हमारे जीवन को भी सुखमय बनाते हैं।

Also Read- भारत के अंतरिक्ष नायक शुभांशु शुक्ला का लखनऊ में भव्य अभिनंदन, गगनवीर ने बढ़ाया देश का मान।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।