Sambhal: चौधरी सराय में रज़ा-ए-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस और जश्ने दस्तार, दस हाफ़िज़-ए-किराम की दस्तारबंदी। 

चौधरी सराय स्थित मदरसा अहले सुन्नत रज़ा-ए-मुस्तफा अजमल उलूम में शुक्रवार को रज़ा-ए-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस एवं जश्ने दस्तार हाफ़िज़-ए-किराम

Dec 6, 2025 - 15:10
Dec 6, 2025 - 17:16
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Sambhal: चौधरी सराय में रज़ा-ए-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस और जश्ने दस्तार, दस हाफ़िज़-ए-किराम की दस्तारबंदी। 
चौधरी सराय में रज़ा-ए-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस और जश्ने दस्तार, दस हाफ़िज़-ए-किराम की दस्तारबंदी। 

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल: चौधरी सराय स्थित मदरसा अहले सुन्नत रज़ा-ए-मुस्तफा अजमल उलूम में शुक्रवार को रज़ा-ए-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस एवं जश्ने दस्तार हाफ़िज़-ए-किराम का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उलेमा-ए-किराम, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, अभिभावक और मदरसे के छात्र मौजूद रहे। मदरसे को आकर्षक रोशनी और सजावट से दुल्हन की तरह सजाया गया था। महफ़िल की शुरुआत मौलाना कारी लईक की तिलावत-ए-कुरआन से हुई, जिसके बाद उत्तराखंड से तशरीफ लाए कारी नावेद और मदीना मस्जिद के इमाम मौलाना जुनैद ने नात-ए-पाक पेश कर माहौल को रूहानी रंगों से भर दिया।

मुख्य अतिथि हजरत मौलाना मुफ़्ती जलीस अहमद ने अपने खिताब में इस्लामी तालीम की अहमियत पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि जीवन की कामयाबी नेक रास्ते पर चलने और बुराई से दूर रहने में है। उन्होंने बच्चों को दीनी और दुनियावी दोनों तालीम में उत्कृष्टता हासिल करने की नसीहत की। उन्होंने कहा कि हिफ़्ज़-ए-कुरआन एक बड़ी नेमत है और मुस्लिम समाज की असली पहचान भी। मुफ़्ती जलीस अहमद ने अभिभावकों और उस्तादों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे बच्चे पूरी कौम का सर फख्र से ऊँचा करते हैं। वहीं मौलाना तौसीफ रज़ा मिस्बाही बरकाती ने भी अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। मौलाना तालिब मिस्बाही बरकती ने भी जनता से  खिताब किया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह पल रहा जब दस बच्चों की दस्तारबंदी की गई, जिन्होंने कुरआन-ए-पाक का हिफ़्ज़ मुकम्मल किया। दस्तारबंदी पाने वाले बच्चों में हाफिज मोहम्मद फ़रमान, हाफिज मोहम्मद जैद, हाफिज मोहम्मद जमाल अशरफ, हाफिज मोहम्मद रेहान, हाफिज अब्दुल मन्नान, हाफिज अब्दुल मालिक, हाफिज मोहम्मद गुफ़रान, हाफिज मोहम्मद शाहनवाज़, हाफिज मोहम्मद शाहबाज़ और हाफिज मोहम्मद फ़हीम शामिल रहे। मंच से इन बच्चों की मेहनत और लगन की सराहना की गई। उलेमा-ए-किराम ने उनके उज्ज्वल भविष्य और दीनी व सामाजिक सेवाओं में आगे बढ़ने की दुआ दी। विशेष तौर पर बताया गया कि चार बच्चों ने एक ही कमरे में एक साथ हिफ़्ज़-ए-कुरआन मुकम्मल किया, जो कार्यक्रम का गौरवपूर्ण क्षण रहा।

दस्तारबंदी के बाद मदरसे के नातख्वानों ने अपनी मधुर आवाज़ों से महफ़िल को चार चांद लगा दिए। अभिभावकों ने बच्चों की इस बड़ी कामयाबी पर खुशी का इज़हार किया। मदरसे के जिम्मेदारों ने बताया कि शिक्षा का बेहतर माहौल, योग्य उस्ताद और अनुशासन के साथ बच्चों की हिफ़्ज़ व दीनी तालीम को आगे भी बढ़ाया जाएगा।

अंत में मुल्क और कौम की तरक्की, अमन-ओ-चैन और भाईचारे के लिए दुआ की गई। कार्यक्रम में शहर मुफ्ती कारी अलाउद्दीन, हाजी मुख्तार, कारी दानिश सहित सैकड़ों अकीदमंद मौजूद रहे। कॉन्फ्रेंस दुआओं के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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