Sambhal : सम्भल में राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव का ऐतिहासिक आयोजन, 16 घंटे गूंजी अखंड काव्यधारा

हिन्दू जागृति महिला मंच की प्रदेश अध्यक्ष नेहा मलय ने कहा कि यह आयोजन न केवल अद्भुत है, बल्कि साहित्य जगत में सम्भल की यश पताका को भी बुलंद करता है। अतुल कुमार शर्मा

By INA News Desk
Jan 5, 2026 - 21:50
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Sambhal : सम्भल में राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव का ऐतिहासिक आयोजन, 16 घंटे गूंजी अखंड काव्यधारा
Sambhal : सम्भल में राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव का ऐतिहासिक आयोजन, 16 घंटे गूंजी अखंड काव्यधारा
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Report : उवैस दानिश, सम्भल

सम्भल में रविवार को साहित्यिक ऊर्जा और काव्य रस से सराबोर नजर आई। एक रिसोर्ट में आयोजित राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव में देश के आठ राज्यों से आए 137 कवि एवं कवयित्रियों ने अखंड काव्य पाठ कर साहित्य के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह महोत्सव प्रातः 8 बजे से लेकर रात्रि 12 बजे तक लगातार 16 घंटे चला। यह आयोजन श्री कल्कि देव तीर्थ समिति की प्रेरणा से तथा हिन्दू जागृति मंच के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय डी के शर्मा की स्मृति में आयोजित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सत्र अध्यक्ष उपजिलाधिकारी रामानुज ने कहा कि साहित्य वह अमूल्य धरोहर है जो आने वाली पीढ़ी को संस्कारित करती है और मन-मस्तिष्क को सदैव तरोताजा बनाए रखती है। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित साहित्यकारों एवं मंच पदाधिकारियों को भगवान श्री कल्कि का चित्र, श्रीमद्भगवद्गीता ग्रंथ एवं स्पर्शी पत्रिका भेंट कर सम्मानित किया।नगर हिंदू सभा के अध्यक्ष कमलकांत तिवारी ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि एक साथ 137 साहित्यकारों का समागम और इतने लंबे समय तक अखंड काव्य पाठ, साहित्य के इतिहास में एक अनूठा उदाहरण है। उन्होंने इसके लिए हिन्दू जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा को बधाई दी।हिन्दू जागृति महिला मंच की प्रदेश अध्यक्ष नेहा मलय ने कहा कि यह आयोजन न केवल अद्भुत है, बल्कि साहित्य जगत में सम्भल की यश पताका को भी बुलंद करता है। अतुल कुमार शर्मा ने बताया कि उनका संगठन बीते चार वर्षों से लगातार ऐसे साहित्यिक आयोजनों का सफल संचालन कर रहा है और साहित्यकारों का सम्मान करना उनके लिए गौरव का विषय है। महोत्सव के दौरान कई चर्चित कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामपुर से आए गीतकवि शिवकुमार चंदन ने मातृभूमि के यशगान की पंक्तियां सुनाईं। डॉ. संदीप कुमार सचेत ने जीवन के द्वंद्व को शब्दों में पिरोया, वहीं दीपक गोस्वामी ‘चिराग’ ने गीता सार से ओतप्रोत पंक्तियां प्रस्तुत कीं। श्रीपाल शर्मा ईदरीशपुरी, सुखपाल सिंह गौर सहित अनेक कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। कार्यक्रम का संचालन एवं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी तीर्थ देव शर्मा सरल, श्रीपाल शर्मा ईदरीशपुरी, उज्ज्वल वशिष्ठ, ईशांत शर्मा ‘ईशू’, आवरण अग्रवाल ‘श्रेष्ठ’ एवं ज्ञानप्रकाश उपाध्याय ने संभाली। संयुक्त संचालन सुखपाल सिंह गौर, ईशांत शर्मा ईशू, अतुल कुमार शर्मा, सुबोध कुमार गुप्ता एवं मीनू रस्तोगी ने किया। इस अवसर पर अनंत कुमार अग्रवाल, नेहा मलय, संतोष गुप्ता, अनुराग गुप्ता, संजीव कुमार सारस्वत, अजय गुप्ता सर्राफ, निशिकांत तिवारी, अरविन्द गुप्ता, चरन सिंह भारती, पूनम शुक्ला, नवरत्न वार्ष्णेय, सुमंत शुक्ला, दिनेश कुमार जाटव, रंजीत कुमार, अरुण अग्रवाल, सुबोध कुमार पाल, नवनीत कुमार, निखिल शर्मा, अमन सिंह, अमित शुक्ला सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सम्भल अब केवल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि साहित्यिक मानचित्र पर भी अपनी सशक्त पहचान बना रहा है।

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