Sambhal : ट्रेन कैंसिल होने पर रेलवे को चुकाने पड़ेगा भारी मुआवजा, 360 रुपये की टिकट के बदले देने होंगे 15,560 रुपये

चंदौसी निवासी रमेश बाबू शर्मा अपनी पत्नी के साथ रुड़की से चंदौसी की यात्रा लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन से करना चाहते थे। उन्होंने पहले ही टिकट आरक्षित क

Sep 28, 2025 - 23:15
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Sambhal : ट्रेन कैंसिल होने पर रेलवे को चुकाने पड़ेगा भारी मुआवजा, 360 रुपये की टिकट के बदले देने होंगे 15,560 रुपये
Sambhal : ट्रेन कैंसिल होने पर रेलवे को चुकाने पड़ेगा भारी मुआवजा, 360 रुपये की टिकट के बदले देने होंगे 15,560 रुपये

Report : उवैस दानिश, सम्भल

ट्रेन कैंसिल होने पर टिकट का पैसा न लौटाना रेलवे को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग सम्भल ने एक मामले में रेलवे को आदेश दिया है कि वह 360 रुपये की टिकट राशि के साथ मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि के लिए यात्रियों को 15,560 रुपये का मुआवजा अदा करे।

चंदौसी निवासी रमेश बाबू शर्मा अपनी पत्नी के साथ रुड़की से चंदौसी की यात्रा लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन से करना चाहते थे। उन्होंने पहले ही टिकट आरक्षित कर लिया था। लेकिन निर्धारित तिथि पर अत्यधिक बारिश के कारण ट्रेन रुड़की रेलवे स्टेशन पर पहुंची ही नहीं। यात्रा रद्द होने के बाद रमेश बाबू शर्मा ने रेलवे से टिकट की राशि वापस मांगी, लेकिन काउंटर पर उन्हें पैसा लौटाने से मना कर दिया गया।इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय से संपर्क कर अपनी समस्या बताई। अधिवक्ता ने रेलवे विभाग को नोटिस भेजा और टिकट की राशि तथा नोटिस शुल्क 1,200 रुपये की मांग की। रेलवे की ओर से कोई कार्रवाई न होने पर रमेश बाबू शर्मा ने जिला उपभोक्ता आयोग सम्भल में परिवाद दाखिल किया। आयोग ने रेलवे को तलब किया और टिकट की राशि न लौटाने का कारण पूछा, लेकिन रेलवे की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आयोग ने माना कि जब ट्रेन निर्धारित तिथि को स्टेशन पर आई ही नहीं तो यात्री को टिकट का पैसा न लौटाना गलत है। रमेश बाबू शर्मा को अपनी यात्रा अन्य साधनों से करनी पड़ी, जिससे उन्हें अधिक समय और अधिक खर्च करना पड़ा।आयोग ने रेलवे मंडलीय कार्यालय मुरादाबाद को आदेश दिया कि वह परिवादी को टिकट की राशि 360 रुपये, नोटिस व्यय 1,200 रुपये, कुल 1,560 रुपये मय 7% वार्षिक ब्याज के साथ दो माह में अदा करे। साथ ही मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि के लिए 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान भी किया जाए। यदि निर्धारित अवधि में राशि अदा नहीं की जाती है, तो ब्याज की दर 9% वार्षिक कर दी जाएगी। यह फैसला यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करने और रेलवे की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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