संजय कुमार सिंह, आईपीएस – सेवा और ईमानदारी का जीवन - प्रवीण प्रताप सिंह 

Special: बलिया जनपद के पिपरा कलां गांव में गर्व की लहर दौड़ गई जब यह समाचार आया कि संजय कुमार सिंह, आईपीएस (बिहार कैडर, 2012) को राष्ट्रपति

Aug 21, 2025 - 15:36
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संजय कुमार सिंह, आईपीएस – सेवा और ईमानदारी का जीवन - प्रवीण प्रताप सिंह 
संजय कुमार सिंह, आईपीएस – सेवा और ईमानदारी का जीवन - प्रवीण प्रताप सिंह 

Special: बलिया जनपद के पिपरा कलां गांव में गर्व की लहर दौड़ गई जब यह समाचार आया कि संजय कुमार सिंह, आईपीएस (बिहार कैडर, 2012) को राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा हेतु) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान भारतीय पुलिस सेवा का सर्वोच्च अलंकरण है, जिसे उन अधिकारियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने दीर्घकालीन सेवा के दौरान असाधारण नेतृत्व, अटूट ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण का परिचय दिया हो।

यह क्षण पिपरा कलां के लिए एक प्रकार का काव्यात्मक न्याय था—जिसे स्थानीय रूप से करईल कहा जाता है, वह भूमि जिसकी काली मिट्टी न केवल फसलों को उपजाऊ बनाती है, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों को 
भी जन्म देती है  जो संघर्ष और संकल्प की गहराई से पनपते हैं । संजय कुमार सिंह इसी धरती के सपूत हैं, जिनकी यात्रा इस उपजाऊ भूमि से देश की सर्वोच्च पुलिस सेवा तक पहुंची और यह दर्शाती है कि समर्पण और चरित्र से क्या कुछ हासिल किया जा सकता है ।

  • साहस, प्रतिबद्धता और विशिष्ट सेवा का जीवन

संजय कुमार सिंह, आईपीएस, भारतीय पुलिस सेवा में ईमानदारी और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। बिहार कैडर के 2012 बैच के अधिकारी, उनकी सेवा यात्रा निर्भीकता, बौद्धिक प्रतिभा और जनकल्याण के प्रति अटूट समर्पण से परिपूर्ण रही है । 15 अगस्त 2025 को उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा हेतु) से सम्मानित किया गया—एक ऐसी यात्रा का शिखर, जो साहस, गरिमा और सेवा से परिभाषित होती है। 

  • विनम्र शुरुआत और शैक्षणिक उत्कृष्टता

रोहतास (बिहार) और पिपरा कलां (बलिया) की धरती पर जन्मे संजय सिंह की प्रारंभिक शिक्षा ने अनुशासन और उद्देश्य की नींव रखी। उन्होंने अपनी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में प्राप्त की, जहाँ वे फर्स्ट क्लास रिटेनर रहे और निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया ।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से उन्होंने भूविज्ञान (Geology) में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की, जहाँ वे गोल्ड मेडलिस्ट और विश्वविद्यालय के टॉपर रहे। उनकी शैक्षणिक यात्रा बहुआयामी रही—उन्होंने बीपीएससी में 5वीं रैंक प्राप्त की और आरपीएससी तथा एमपीपीएससी जैसी अन्य राज्य सेवाओं की परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं ।

  • सेवा में ढली हुई एक करियर यात्रा

संजय सिंह ने 1999 में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के रूप में अपनी सेवा यात्रा शुरू की और समय के साथ विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए विशिष्ट पहचान बनाई:
*     अपर पुलिस अधीक्षक (2012)
*     एसपी, रेलवे, मुजफ्फरपुर (2018)
*     एसपी, ग्रामीण पटना (2019)
*     कमांडेंट, बीएसएपी (2019–2020)
*     एसपी, शियोहर एवं मद्य निषेध विभाग (2020–2021)
*     एसपी, भोजपुर (2022)
*     एसपी, एटीएस (2023–2024)
*     वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ (2025)

उनकी नियुक्तियाँ अत्यधिक चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रहीं—8 वर्षों से अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और 8 वर्षों से अधिक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) में सेवा करते हुए उन्होंने आतंकवाद विरोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया ।

  • सम्मान और अलंकरण

संजय सिंह की वीरता और सेवा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया:
*     राज्य वीरता पुरस्कार: 2005 एवं 2008
*     आंतरिक सुरक्षा पदक: 2013
*     राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता हेतु): 2015
*     राष्ट्रपति पुलिस पदक (सराहनीय सेवा हेतु): 2018
*     राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा हेतु): 2025
*     नकद पुरस्कार: ₹2 लाख से अधिक    प्रशंसा पत्र: 70 से अधिक, जिनमें 5 अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुखों द्वारा प्रदान किए गए l

  • नेतृत्व की विरासत

अपनी अडिग ईमानदारी और रणनीतिक दृष्टिकोण के लिए संजय सिंह को सहकर्मियों, अधीनस्थों और आम नागरिकों का गहरा सम्मान प्राप्त है । उनका नेतृत्व न केवल संचालनात्मक दक्षता से परिपूर्ण है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है—जो उन्हें एक सच्चे जनसेवक के रूप में प्रतिष्ठित करता है। बीएचयू की कक्षाओं से लेकर बिहार के सबसे चुनौतीपूर्ण जिलों की अग्रिम पंक्तियों तक उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि निरंतर समर्पण और नैतिक साहस से क्या कुछ संभव है । राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा हेतु) प्राप्त करते हुए, उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। 

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